'क्या हुआ परेशान लग रही हो?'

'नहीं..नहीं, कुछ नहीं मैं ठीक हूं।'

अक्सर महिलाएं ऐसा पूछने पर यही जवाब देती हैं। अपनी तकलीफ और दर्द को छिपाकर ठीक होने का दिखावा करना या खुद को ठीक बताना मानो महिलाओं को आदत का हिस्सा होता है, लेकिन यह सही नहीं है। जब कोई महिला इस तरह अपने इमोशन दबाती है और अपनी परेशानी को खुलकर जाहिर नहीं करती है, तो इसका उसकी मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है, चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr. Samant Darshi, Consultant- Psychiatrist,Yatharth Hospitals, Noida जानकारी दे रहे हैं।

बचपन की सीख हो सकती है जिम्मेदार

महिलाएं अक्सर 'मैं ठीक हूं' कहती हैं, भले ही वो अंदर से परेशान क्यों न हों। असल में इसके पीछे की वजहें काफी गहरी होती हैं। महिलाएं ऐसा झूठ बोलने के लिए नहीं करतीं, बल्कि अपने इमोशंस को अंदर रखने के लिए वो ऐसा कहती हैं। डॉक्टर दर्शी का कहना है कि यह बात गुमराह करने की कोशिश के बजाय, इमोशनल बचाव, सामाजिक सोच या झगड़े से बचने की इच्छा को दिखा सकती है।

बचपन से ही कई महिलाओं को मिल-जुलकर रहने, दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखने और 'बहुत ज्यादा इमोशनल' न दिखने की सीख दी जाती है। इसके अलावा उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि उनकी वजह से किसी और को परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में जब उन्हें दुख होता है, वे परेशान होती हैं या उन्हें बात को लेकर कंफ्यूजन होता है कि कि उनकी भावनाओं को समझा जाएगा या नहीं, तो 'मैं ठीक हूँ' कहना उनके लिए एक तरह का बचाव का तरीका बन सकता है।

इस उम्मीद में भी महिलाएं छिपाती हैं अपना दर्द

कभी-कभी महिलाओं को अपनी भावनाओं के बारे में बात करने से पहले ये समझने के लिए समय चाहिए होता है कि दूसरा उनकी फीलिंग्स को समझ पाएगा या नहीं, ऐसे में कई बार वो सिर्फ बहुत करीबी लोगों को अपने दिल का हाल बताती हैं और बाकी लोगों के पूछने पर ठीक न होते हुए भी 'मैं ठीक हूं' कहकर बात टाल देती हैं।
कई बार महिलाओं को ये उम्मीद भी होती है कि उनका पार्टनर का कोई करीबी दोस्त, उनके बिना बताए उनके मन का हाल समझ लेगा या फिर उनके व्यवहार में आए बदलाव को नोटिस करेगा और 'मैं ठीक हूं' कहने के बाद भी उनसे प्यार से दोबारा पूछेगा।

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यह डर भी हो सकता है वजह


डॉक्टर दर्शी का यह भी कहना है कि जज किए जाने, रिजेक्ट किए जाने या बहस बढ़ने के डर से भी कई बार महिलाएं अपनी असली भावना को दबा लेती हैं। जरूरी नहीं है कि ऐसा सिर्फ महिलाओं के साथ हो, कई बार पुरुष भी कुछ कारणों के चलते अपनी भावना व्यक्त करने के बजाय उसे छिपा लेते हैं।

 

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