खाना खाने के बाद नींद आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेन्स' या 'फूड कोमा' कहा जाता है। क्या आप भी इस तरह की किसी समस्या से जूझ रहे हैं, खासकर दोपहर के खाने के बाद। आइए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की क्रिया शरीर विशेषज्ञ मीरा केशवलाल भोजाणी से समझते हैं इसके पीछे का विज्ञान क्या है...
अक्सर आपने नोटिस किया होगा कि दोपहर में खाने के बाद नींद या सुस्ती सी लगती है। कई बार आफिस में लंच के बाद भी इतनी नींद आती है कि कंट्रोल ही नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में क्या किया जाए और ऐसा होता क्यों है? आइए आर्टिकल के माध्यम से विस्तार में जानते हैं।
खाने के बाद नींद आने के वैज्ञानिक कारण
अधिकांश लोगों को लगता है कि ज्यादा भारी और तला हुआ भोजन खाने से ऐसा होता है, लेकिन इसके पीछे और भी वैज्ञानिक कारण माने जाते हैं। आईसीएमआर की गाइडलाइन्स के मुताबिक खाने में प्रोसेस्ड फूड (जंक या तले हुए) के बजाय सब्जी, सलाद (विटामिन, प्रोटीन और फाइबर) युक्त खाना खाने से पेट हल्का रहता है और नींद कम आती है।
कफ दोष का बढ़ना- आयुर्वेद के अनुसार, खाना खाने के तुरंत बाद कफ दोष कुछ समय के लिए बढ़ जाता है, जिससे शरीर में भारीपन और नींद या सुस्ती महसूस होती है।
खून के बहाव का दूसरी जगह जाना (रक्त प्रवाह का पुनर्वितरण)- खाना पचने के दौरान शरीर का सारा केंद्र पाचन तंत्र पर होता है। इस वजह से पेट की तरफ खून का प्रवाह बढ़ जाता है और दिमाग तक खून व आक्सीजन की मात्रा थोड़ी कम हो जाती है, जिससे सुस्ती महसूस होती है।
हार्मोनल बदलाव- कुछ भी खाने पर आपका शरीर इंसुलिन बनाता है। इंसुलिन खून से शुगर को आपकी कोशिकाओं (सेल्स) तक पहुंचाने में मदद करता है। इस प्रक्रिया से आपके दिमाग में ट्रिप्टोफैन का लेवल भी बढ़ सकता है, जिससे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन बनते हैं। ये हार्मोन आपको आराम और नींद का एहसास कराते है।
भोजन का प्रकार- ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाने (जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता या मिठाइयां) या भारी और फैट वाले खाने को पचाने में ज्यादा मेहनत लगती है और इनसे आपके ब्लड शुगर और एनर्जी में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है। जिससे सुस्ती का एहसास होता है ।
खाने की मात्रा- बहुत ज्यादा खाना खाने में ज्यादा एनर्जी लगती है और इससे पेट पर खिंचाव महसूस होता है, जिससे दिमाग को आराम मिलने के संकेत मिलते हैं।
सर्केडियन रिदम- हमारे शरीर में एक प्राकृतिक चक्र (सर्केडियन रिदम) होता है, जिसकी वजह से दोपहर के शुरुआती समय में हमारी सतर्कता में कमी आती है; यह समय अक्सर लंच के समय से मेल खाता है, तब सुस्ती का एहसास होता है।
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पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम- खाना खाने के बाद शरीर का 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे दिल की धड़कन और रक्तचाप धीमा हो जाता है और शरीर को सुस्ती महसूस होती है।
खाने के बाद नींद आने से बचने के उपाय
खाने के बाद नींद आना आम बात है, लेकिन ज्यादा सुस्ती परेशानी बन सकती है। इसे कुछ आसान उपायों की मदद से कम किया जा सकता है।
संतुलित आहार लें- दोपहर के खाने में अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट (चीनी और दूध वाली चीजों) के बजाय प्रोटीन और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
कम मात्रा में खाएं- एक बार में पेट भरकर भारी खाना खाने से बचें। आयुर्वेद सलाह देता है कि भारीपन या पेट भरा हुआ महसूस होने से पहले ही खाना बंद कर दें।
थोड़ा टहलें- आयुर्वेद के अनुसार, भोजन के बाद थोड़ी देर 100 कदम अथवा 10 से 15 मिनट तक टहलना चाहिए, इससे भोजन करने के तुरंत बाद बढ़ा हुआ कफ कम हो जाता है, पाचन बेहतर होता है और ऊर्जा बनी रहती है।
हाइड्रेटेड रहें- दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, क्योंकि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से भी थकान और सुस्ती महसूस होती है। हालांकि, खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, बल्कि कुछ मिनट बाद पीना चाहिए।
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Image Credit: magnific.com
लेखक-सुमन अग्रवाल
