आयुर्वेद केवल बीमारियों का इलाज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जिंदगी जीने का एक मुकम्मल विज्ञान है। यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति रोग मिटाने के साथ-साथ सेहत को हमेशा बरकरार रखने पर भी पूरा जोर देती है। इसके दो सबसे बड़े और बुनियादी नियम हैं - दिनचर्या और ऋतुचर्या। आयुर्वेद के जानकारों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की आदतों और मौसम के बदलाव के हिसाब से अपनी लाइफस्टाइल ढाल ले, तो वह हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान बना रह सकता है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे ये नियम हमारी सेहत और त्वचा को संवारते हैं।

दिनचर्या

दिनचर्या का सीधा सा मतलब है अपने रोज के कामों को एक सही तरीके से व्यवस्थित करना, जैसे सुबह वक्त पर जागना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और शरीर को सक्रिय रखना। इसमें तेल मालिश और उबटन का खास महत्व है।

तेल मालिश के फायदे

आयुर्वेद के अनुसार रोजाना शरीर पर तेल से मालिश करने से त्वचा को अंदरूनी पोषण मिलता है, बुढ़ापे के लक्षण जल्दी नहीं आते और चेहरे पर नेचुरल चमक बनी रहती है। इससे थकान मिटती है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है। मॉडर्न साइंस भी मानती है कि नारियल और तिल जैसे तेल त्वचा की नमी बनाए रखने में बहुत कारगर हैं। 

उद्वर्तन से शरीर की खूबसूरती बढ़ाएं

उद्वर्तन एक तरह का सूखा या हल्का गीला उबटन होता है, जिसे शरीर पर बालों की उल्टी दिशा में रगड़ा जाता है। इसमें त्रिफला और कुलत्थ जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है। यह शरीर की फालतू चर्बी को कम करने, ब्‍लड सर्कुलेशन सुधारने और त्वचा का रंग निखारने में बेहद मददगार साबित होता है।

ऋतुचर्या

लेखिका: डॉ. शुभा पी. यू. (सहायक प्राध्यापक, अगदतंत्र विभाग, एस. डी. एम. आयुर्वेद महाविद्यालय, उडुपी) के अनुसार जैसे दिनचर्या हमारी रोजमर्रा की आदतों को सुधारती है, वैसे ही ऋतुचर्या हमें मौसम बदलने के साथ खान-पान और लाइफस्टाइल बदलने का सही रास्ता दिखाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बाहर मौसम चाहे कैसा भी बदले, हमारे शरीर का अंदरूनी मेटाबॉलिज्म संतुलित रहे। ठंड के दिनों में सेहत का ख्याल रखने के लिए आयुर्वेद हेमंत और शिशिर ऋतु के नियमों का पालन करने की सलाह देता है। 

हेमंत और शिशिर ऋतु की जीवनशैली

शुरुआती ठंड यानी हेमंत ऋतु में हमारी पाचन शक्ति बहुत मजबूत होती है, इसलिए इस दौरान पौष्टिक आहार, गुनगुना पानी, गेहूं, काले चने और दूध से बनी चीजें खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा तेल मालिश करना और खुद को ठंड से बचाना जरूरी है। कड़ाके की ठंड वाले शिशिर मौसम में भी शरीर को गर्म रखना, अच्छा पोषण लेना और एक्टिव रहना बेहद आवश्यक होता है।

त्योहारों में छिपी है सेहतमंद जीवनशैली

हमारी संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों का सीधा कनेक्शन ऋतुचर्या से जुड़ा है। उदाहरण के लिए, दीपावली का त्योहार ठीक उस समय आता है जब ठंड की शुरुआत होती है। इस दौरान तेल से नहाना, खुशबूदार चीजों का उपयोग करना और गरम चीजें खाना असल में मौसम के मुताबिक सेहत का ख्याल रखने का ही एक सांस्कृतिक तरीका है।  

त्वचा बताती है अंदर की सेहत

आयुर्वेद में त्वचा को सिर्फ शरीर की ऊपरी परत नहीं माना गया है, बल्कि यह हमारे अंदर की सेहत का आईना होती है। अगर आपका पाचन सही है और मन शांत है, तो आपकी त्वचा अपने आप चमकदार और स्वस्थ दिखेगी। लेखिका: डॉ. शुभा पी. यू. (सहायक प्राध्यापक, अगदतंत्र विभाग, एस. डी. एम. आयुर्वेद महाविद्यालय, उडुपी) के अनुसार असली खूबसूरती इस बात का प्रमाण है कि आप अंदर से कितने संतुलित और खुशहाल हैं।

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