कई बार आपने देखा होगा कि बातचीत के दौरान जब कोई अपनी परेशानी या एक्सपीरियंस शेयर करता है, तो सामने वाला व्यक्ति तुरंत अपनी कोई कहानी सुनाना शुरू कर देता है। पहली नजर में यह आदत दूसरों की अटेंशन पाने की कोशिश लग सकती है। हालांकि, मनोविज्ञान इस व्यवहार को हमेशा निगेटिव नहीं समझता। कई बार यह दूसरों से जुड़ने और अपनी बात बेहतर ढंग से समझाने का एक आसान तरीका होता है। आइए समझते हैं कि इस अनजाने में होने वाले व्यवहार के पीछे दिमाग का कौन सा गणित काम करता है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
1. अनुभवों और कहानियों के जरिए बात समझाने की आर्ट
हर व्यक्ति की सोच और उसे समझाने का तरीका अलग होता है। कुछ लोग फैक्ट्स के जरिए बात करते हैं, तो कुछ अपने एक्सपीरिंयस का उदाहरण देते हैं। ऐसे लोग अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए जीवन के छोटे-बड़े किस्सों का सहारा लेते हैं। इससे अलग जब सामने वाला कोई बात कहता है, तो उनके दिमाग में उससे जुड़ा पुराना किस्सा तुरंत ताजा हो जाता है, जिसे वे बिना किसी बुरे इरादे के शेयर कर देते हैं।
2. एम्पेथी और रिलेशनल कम्युनिकेशन आगे बढ़ाना
किसी की बात सुनकर अपनी कहानी सुनाना हमेशा बातचीत को अपनी तरफ मोड़ने के लिए नहीं होता, बल्कि यह सामने वाले को यह महसूस कराने की कोशिश होती है कि आप अकेले नहीं हैं।
समानता का अहसास कराना: उदाहरण के लिए, यदि कोई दोस्त अपनी किसी असफलता का जिक्र करता है, तो आप भी अपने किसी कठिन दौर को शेयर करके उसका हौसला बढ़ाते हैं।
सहानुभूति जताने का जरिया: साइकोलॉजी में इसे 'रिलेशनल कम्युनिकेशन' कहते हैं, जहां लोग एक जैसे अनुभवों के जरिए आपस के संबंध मजबूत करते हैं।
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3. हर बार सिर्फ अटेंशन पाना मकसद नहीं होता
आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि बार-बार अपनी कहानी सुनाने वाला व्यक्ति केवल खुद को केंद्र में रखना चाहता है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग हो सकती है।
स्वाभाविक बातचीत का हिस्सा: कई लोगों के लिए अपने एक्सपीरियंस शेयर करना बात करने की एक आम और नेचुरल आदत होती है।
बेहतर समझ विकसित करना: वे दूसरों के अनुभवों से खुद को जोड़कर उस स्थिति को ज्यादा गहराई से समझने की कोशिश करते हैं।
4. खुशियों के किस्सों से बढ़ती है नजदीकियां
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के एक शोध के अनुसार, जब लोग आपस में अपनी खुशियों और पॉजिटिव टाइम की कहानियां शेयर करते हैं, तो उनके बीच आपसी जुड़ाव तेजी से बढ़ती है।
एक्सपर्ट की राय: साइकोलॉजी के अनुसार, इंसान का दिमाग कहानियों के जरिए ज्यादा तेजी से सीखता और जुड़ता है। जब दो लोग पॉजिटिव एक्सपीरियंस शेयर करते हैं, तो उनके बीच न्यूरल सिंक्रोनाइजेशन बेहतर होता है, जिससे रिश्ते और ज्यादा मजबूत होते हैं।
इस लेख से पता चलता है कि दूसरों की बात सुनकर अपना किस्सा शुरू करना केवल ध्यान आकर्षित करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे से जुड़ने और सहानुभूति जताने की आदत है। यदि सही नीयत और बैलेंस के साथ अपने एक्सपीरियंस शेयर किए जाएं, तो यह बातचीत को ज्यादा अर्थपूर्ण और रिश्तों को मजबूत बनाने का काम करता है।
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