आज के समय में टेक्स्ट मैसेजिंग बातचीत का सबसे आसान जरिया बन चुका है, लेकिन क्या कभी आपने महसूस किया है कि किसी को मैसेज भेजने के बाद जब देर तक रिप्लाई नहीं आता, तो दिल की धड़कनें तेजी से बढ़ जाती हैं? बता दें कि बार-बार फोन स्क्रीन देखना, सामने वाले के 'Typing...' स्टेटस का इंतजार करना या यह सोचना कि कहीं आपने कुछ गलत तो नहीं लिख दिया, यह सब टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, यह कोई मेडिकल बीमारी नहीं है, लेकिन स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल और लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव लोगों में स्ट्रेस और घबराहट का कारण बन रहा है। ऐसे में जानते हैं कि टेक्स्टिंग एंग्जायटी क्या है, इसके कारण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
क्यों होती है टेक्स्टिंग एंग्जायटी?
मैसेज के जरिए बातचीत करते समय घबराहट होने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में पता होना जरूरी है-
- हाव-भाव और टोन की कमी: आमने-सामने बातचीत में चेहरे के एक्सप्रेशन और टोन से बात का सही मतलब समझ आता है। टेक्स्ट में यह गायब होता है, जिससे गलतफहमी का डर बना रहता है।
- लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव: बार-बार मैसेज आना और हर वक्त रिप्लाई करने की मजबूरी इंसान को दिमागी रूप से थका देती है।
- फोन ज्यादा यूज करना: स्मार्टफोन का लगातार इस्तेमाल दिमाग में 'डोपामाइन' केमिकल के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे नोटिफिकेशन चेक करने की आदत एक लत बन जाती है।
- सोशल एंग्जायटी और साइबर बुलिंग: जो लोग पहले से ही घबराहट महसूस करते हैं या ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार रह चुके हैं, उन्हें मैसेज का जवाब देने या इंतजार करने में ज्यादा डर लगता है।
टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण
यह स्थिति आपके व्यवहार के साथ-साथ शरीर पर भी असर डालती है। इसके लक्षणों (शारीरिक और मानसिक व व्यवहारिक लक्षणों) को दो भागों में समझा जा सकता है-
1. शारीरिक और मानसिक लक्षण
- मैसेज भेजने के बाद अचानक दिल की धड़कन तेज होना या बैचेनी होना।
- बार-बार चिड़चिड़ापन, घबराहट या हाथ-पैरों में कंपकंपी महसूस होना।
- सांस लेने में भारीपन या छाती में खिंचाव महसूस होना।
2. व्यावहारिक लक्षण
- नोटिफिकेशन न आने पर भी बार-बार फोन की स्क्रीन जलाकर देखना।
- अनसोल्वड मैसेज देखकर डरना या मैसेज का जवाब देने से पूरी तरह बचना।
- किसी के देर से रिप्लाई करने पर खुद को दोषी मानना या ओवरथिंकिंग करना।
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मैसेज के स्ट्रेस को दूर कैसे करें?
यदि आपको भी देर से रिप्लाई आने पर एंग्जायटी महसूस होती है, तो इन तरीकों को अपनी लाइफस्टाइल में जरूर शामिल करें-
- फोन का इस्तेमाल ज्यादा न करें। दिन में कुछ घंटे ऐसे तय करें जब आप फोन से पूरी तरह दूर रहें।
- किसी गंभीर मुद्दे पर टेक्स्ट करने के बजाय फोन पर बात करें या मिलकर बात करें। इससे गलतफहमी नहीं होती।
- दोस्तों और सहकर्मियों को साफ रूप से बताएं कि आप हर समय तुरंत रिप्लाई करने के लिए उपलब्ध नहीं रह सकते।
- यदि किसी का रिप्लाई रूखा या देर से आए, तो यह न समझें कि वह आपसे नाराज है। हो सकता है सामने वाला व्यक्ति काम में व्यस्त हो।
डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क कब करें?
यदि यह घबराहट आपकी रोज की दिनचर्या, ऑफिस के काम या पर्सनल रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित करने लगे, तो किसी काउंसलर या थेरेपिस्ट की मदद लेना समझदारी है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकों से इस डिजिटल स्ट्रेस को दूर करने में बड़ी मदद मिलती है।
टेक्स्टिंग एंग्जायटी एक आम समस्या बन चुकी है। यह समझना बेहद जरूरी है कि रिप्लाई में देरी का मतलब हमेशा कोई नकारात्मक बात नहीं होती। याद रखें, तकनीक आपकी सुविधा के लिए है, आपके मानसिक सुकून को छीनने के लिए नहीं।
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