किसी के भी जीवन में मुश्किलें कभी बताकर नहीं आती हैं। अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी का जाना या घर की कोई बड़ी मरम्मत हमारे पूरे बजट को एकदम से हिलाकर रख सकती है। ऐसे में ज्यादातर लोग अपनी सालों की जमा-पूंजी को न केवल खर्च कर देते हैं बल्कि भारी ब्याज पर कर्ज ले लेते हैं। यहीं पर काम आता है इमरजेंसी फंड। यह आपके बचत का वह हिस्सा है, जिसे आप सिर्फ और सिर्फ बुरे वक्त के लिए बचाकर रखते हैं। हर व्यक्ति के पास कम से कम उसके 6 महीने के खर्च के बराबर का बैकअप होना चाहिए। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि इमरजेंसी फंड क्या है और यह क्यों जरूरी है? जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

कैसे आपकी बचत बर्बाद हो सकती है?

लोग अक्सर अपने बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने के लिए पैसे जोड़ते हैं, लेकिन अचानक आई मुसीबत में वे इन पैसों को खर्च कर देते हैं, जिससे उनके फ्यूचर के सपने अधूरे रह जाते हैं।

बचत न होने पर लोग क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन की मदद लेते हैं। बता दें कि इनकी ब्याज दरें इतनी ज्यादा होती हैं कि इंसान सालों तक कर्ज में बंधा रहता है। बता दें कि आर्थिक तंगी न केवल आपकी जेब पर बल्कि आपके मैंटल हेल्थ और रिश्तों पर भी बुरा असर डालती है।

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इमरजेंसी फंड क्यों जरूरी है?

जब आपको पता होता है कि आपके पास 6 महीने का बैकअप है, तो आप नौकरी जाने या किसी अनहोनी के डर में नहीं जीते। आप शांत रहकर सही फैसले ले पाते हैं। यह फंड आपकी लंबी अवधि के इंवेस्ट को समय से पहले कम होने से बचाता है।

अपना इमरजेंसी फंड कैसे तैयार करें?

सबसे पहले अपनी जरूरतों की एक लिस्ट बनाएं। मान लीजिए आपका महीने का खर्च ₹30,000 है, तो आपको ₹1.80 लाख का फंड जमा करना होना चाहिए। जैसे ही आपकी सैलरी आए तब सबसे पहले एक तय पैसे इमरजेंसी फंड के लिए अलग कर दें। इससे अलग बाहर का खाना, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या शॉपिंग को कम करें। 

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