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Main Hoon Apni Dhanlaxmi Part-37: सेहतमंद रिटायरमेंट की करें तैयारी, जानें क्यों जरूरी है हेल्थ प्लानिंग?

सेवानिवृत्ति में स्वास्थ्य और धन के गहरे संबंध पर जोर देते हुए, यह लेख महिलाओं के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता बताता है। जानते हैं, इसके बारे में...
Updated:- 2026-08-04, 16:52 IST
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पिछले हफ्ते हमने सेवानिवृत्ति की योजना की चर्चा की। उसके लिए आपको कितनी धनराशि की आवश्यकता होगी। उसे जोड़ने के कौन से तरीके हो सकते हैं। महिलाओं को क्यों स्वतंत्र रूप से इसकी योजना बनानी चाहिए, उन्हें अपेक्षाकृत लंबे समय तक इसकी आवश्यकता क्यों होती है। इन बातों को लेकर एक समझ का निर्माण हुआ। अब हम बात करेंगे सेवानिवृत्ति से जुड़े उस पहलू की, जिसकी सामान्यत: लोग चर्चा नहीं करते, ये है आपका स्वास्थ्य।

ये स्वास्थ्य से जुड़ा स्तंभ नहीं है। ये अर्थ से जुड़ा स्तंभ है, पर ये बात हम सभी स्वीकार करेंगे कि स्वास्थ्य और धन आपस में जुड़े हैं। सेवानिवृत्ति व उसके बाद के वर्षों में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ सकता है, इसलिए इसके विषय में भी सोचकर चलने की आवश्यकता की नदेखी नहीं की जा सकती।

दो वास्तविकताओं के साथ हम इस चर्चा की शुरुआत करेंगे, जिन पर भारतीय महिलाओं को विचार करना चाहिए।

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ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी भारतीय महिलाओं में बहुत आम हो गई है। महिलाओं को होने वाले कैंसर के प्रत्येक चार मामलों में एक ब्रेस्ट कैंसर होता है। वर्ष 2019 में इसके मामले करीब दो लाख थे जो वर्ष 2023 में बढ़कर सवा दो लाख से अधिक हो गए। ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस स्तंभ में इसके चिकित्सीय आयाम के बजाय वित्तीय पहलू पर बात करना उद्देश्य है। भारत में ब्रेस्ट कैंसर पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और टारगेटेड थेरेपी को मिलाकर करीब सात लाख से लेकर 17 लाख तक खर्च आता है। ये खर्च इस पर भी निर्भर करता है कि बीमारी की कौन सी स्टेज है, अस्पताल और ट्रीटमेंट प्लान क्या है। मेट्रो शहर में ट्रीटमेंट का खर्च अधिक होगा, जबकि सरकारी अस्पताल में अपेक्षाकृत कम होगा, लेकिन जरूरी खर्चों को तो आपको वहन करना ही पड़ेगा।

नौ करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रसित

दूसरा वास्तविकता है डायबिटीज की समस्या।। भारत में करीब नौ करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं। खासकर महिलाओं में 40 वर्ष की आयु के बाद इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। शहरी व कस्बाई इलाकों में जीवनशैली और खानपान की आदतों की वजह से अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। डायबिटीज एक ऐसी समस्या है जो जीवनभर बनी रहती है, इसका इलाज, जांच, डाक्टर के परामर्श का खर्च भी साथ चलता है। इस समस्या की जटिलताएं भी समय के साथ बढ़ती हैं। करीब एक दशक तक डायबिटीज को नियंत्रित रखने का खर्च कई लाख रुपये हो सकता है।
हालांकि उपरोक्त दोनों ही वजहों से तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है, बस यदि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हों तो उसके लिए तैयारी पूरी होनी चाहिए। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है अपने नाम पर लिया गया हेल्थ इंश्योरेंस। बीमारी के निदान से पहले ही इसे खरीद लेना सही होगा।

कुछ बाते बातें हैं, जिनके बारे में अधिकांश लोगों को काफी देर से पता चलता है।

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दो से चार साल का वेटिंग पीरियड

अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी में मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों के साथ दो से चार साल का वेटिंग पीरियड होता है। इसका अर्थ है कि जब आप पालिसी खरीदते हैं, उस समय आपको डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थायरायड या कोई अन्य क्रानिक बीमारी है तो इंश्योरेंस कंपनी वेटिंग इन पीरियड में उन बीमारियों के इलाज को कवर नहीं करेगी। इस प्रकार अगर बीमारी का निदान होने के बाद आप पालिसी खरीदती हैैं तो इंश्योरेंस कंपनी को आप जो प्रीमियम देंगे, उसका लाभ तब नहीं मिलेगा जब आपको उसकी सर्वाधिक जरूरत होगी।

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इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी काफी पहले ही खरीद लेनी चाहिए। बीमारी हो उससे पहले ही हेल्थ पालिसी लेना उचित है। 35 वर्षीय व्यक्ति यदि आज पालिसी खरीदता है तो उसे पूर्ण कवरेज के साथ कम प्रीमियम देना पड़ेगा। यानी क्रानिक बीमारी मेडिकल हिस्ट्री का हिस्सा बने, उससे पहले ही उसके इलाज के खर्च का इंतजाम हो जाएगा। 55 वर्षीय व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर अधिक प्रीमियम के साथ शुरुआत करनी पड़ेगी, लंबा वेटिंग पीरियड होगा, हो सकता है कि आपकी स्वास्थ्य परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में पहले ही कुछ बीमारियों के इलाज को उससे बाहर रखा गया हो।

पालिसी लेते समय वर्तमान हेल्थ कंडीशन के बारे में बताएं

बहुत से भारतीय परिवारों में किसी न किसी रूप में हेल्थ इंश्योरेंस होता है, पर कुछ निर्धारित खांचों के कारण समस्या आती है। प्रथम, अगर नियोक्ता द्वारा प्रदत्त ग्रुप पालिसी है तो उसकी सुरक्षा तब तक ही रहेगी, जब तक आप नौकरी कर रहे हैं। जिस दिन आप त्यागपत्र देते हैं, सेवानिवृत्त होते हैं या हटाए जाते हैं, वह सुरक्षा भी समाप्त हो जाती है। 55 वर्ष की आयु के करीब पहुंचने पर जब महिलाओं को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब उन्हें इसका महत्व समझ आता है। दूसरा, फैमिली इंश्योरेंस, जिसमें सामान्यत: पति के नाम पर पालिसी जारी होती है। यदि उसकी मृत्यु हो जाए या शादी समाप्त हो जाए तो महिला उसके दायरे से बाहर हो जाएगी। तब बढ़ी हुई आयु में उसे अधिक प्रीमियम देकर नई पालिसी खरीदने की आवश्यकता होगी। बीमारियों का खर्च साथ में होगा और पालिसी लेते समय वर्तमान हेल्थ कंडीशन के बारे में भी बताना होगा।

इसलिए हर महिला को अपने नाम पर पालिसी की जरूरत होती है, न कि किसी अन्य पालिसी धारक के साथ में उसका नाम जुड़ा हो।

अब सवाल आता है कि कितना कवर पर्याप्त होगा। बहुत से भारतीय शहरों में न्यूनतम पांच लाख रुपये का प्रति व्यक्ति बीमा होता है, जो किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में पर्याप्त नहीं होता। वास्तविकता को देखें तो ये राशि न्यूनतम दस लाख रुपये होनी चाहिए। यदि एक बार में इसके लिए प्रीमियम देना मुश्किल हो तो पांच लाख रुपये की बेस पालिसी खरीद सकते हैं, जिसके साथ सुपर टाप अप जोड़ सकते हैं, दोनों की कुल लागत कम होगी और आपको अर्थपूर्ण कवरेज भी मिल जाएगा। सुपर टाप अप प्रीमियम सामान्यत: बेस पालिसी प्रीमियम से कम होते हैं।

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क्रिटिकल इलनेस पालिसी में कुछ बीमारियों के निदान जैसे कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल होने पर एकमुश्त राशि दी जाती है। ये अस्पताल में भर्ती के खर्च से इतर होता है। जब आप बीमारी के दौरान काम नहीं कर पाते और मासिक आय बाधित होती है तो उस अवधि में इस राशि से मदद हो जाती है। जो महिलाएं अपने घर खर्च में योगदान देती हैं, उन्हें इस विकल्प पर गौर करना चाहिए।

यदि आप 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी खरीद रहे हैं तो तत्काल जितना वहन कर सकें वो पालिसी खरीदें। इसके साथ ही एक मेडिकल इमरजेंसी फंड बनाएं। ये लिक्विड धन स्वास्थ्य संबंधी उन खर्चों के लिए होना चाहिए जो आपकी पालिसी कवर नहीं करती, जैसे वेटिंग पीरियड का अंतर, जिन ट्रीटमेंट को बाहर रखा गया है, क्रानिक बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए दिन प्रतिदिन होने वाला खर्च। दो-तीन लाख का लिक्विड फंड इस स्वास्थ्य खर्च के लिए पर्याप्त होगा।

इलाज का खर्च होता है कम

एक और जरूरी बात। बहुत सी महिलाएं हेल्थ चेकअप कराने से बचती हैं। उन्हें लगता है कि पता नहीं परिणाम में क्या निकलकर आएगा। वे महंगे भी होते हैं, पर ये भी समझें कि ब्रेस्ट कैंसर का स्टेज एक में पता लग जाता है तो बचने की संभावना 90 प्रतिशत होती हैै और इलाज का खर्च भी कम आता है। वही खर्च स्टेज तीन या चार में काफी बढ़ जाता है। बीमारी का पहले पता लगने से आपको समय मिल जाता है। आप सोच-विचारकर सही इलाज करवा सकते हैं।

सालाना हेल्थ चेकअप, खासकर 40 वर्ष की आयु के बाद मेमोग्राफी और डायबिटीज के खतरे को लेकर सजगता की सलाह चिकित्सीय सलाह नहीं है, बल्कि ये वित्तीय सलाह है। जितना शीघ्र उसके विषय में आपको पता लगेगा, खर्च उतना ही कम आएगा।

  • आपका शरीर वह इंजन है जिसपर आपकी वित्तीय यात्रा निर्भर है। इसे सुरक्षित रखना भी वित्तीय योजना का हिस्सा है।
  • अगर आप स्वयं का ध्यान नहीं रखेंगे तो अन्य लोगों के लिए भी संपदा सृजित नहीं कर सकते।
  • यदि आपके मन में अर्थ से जुड़ी जिज्ञासाएं हैं तो हमें लिखें- iamolaxmi@gmail.com

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Images: magnific

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