दुर्गा पूजा के दौरान महिलाएं खूबसूरत साड़ियां पहनकर तैयार होती हैं। कुछ महि‍लाएं रेड बॉर्डर वाली साड़ी पसंद करती हैं, तो किसी को सिल्क की साड़ी अच्छी लगती है, लेकिन अगर आप इस बार कुछ ऐसा पहनना चाहती हैं, जो दिखने में सुंदर होने के साथ अपनी खास पहचान भी रखता हो, तो गुजरात की पाटन पटोला साड़ी ट्राई कर सकती हैं।

इस साड़ी की कीमत लाखों रुपये तक है, लेकिन इसकी खासियत सिर्फ महंगी कीमत नहीं है। कहा जाता है कि असली पाटन पटोला साड़ी 300 साल तक नई जैसी रह सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं क‍ि आखिर इस साड़ी में ऐसा क्या खास है और इसे बनाने में इतनी मेहनत क्यों लगती है?

लाखों में क्यों होती है पाटन पटोला साड़ी की कीमत

आपको बता दें क‍ि पाटन पटोला साड़ी गुजरात के पाटन की पहचान है। इसे बनाने में बुनकरों को काफी समय और मेहनत लगती है। यही वजह है कि इसकी कीमत आम साड़ियों के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है। असली पाटन पटोला साड़ी की कीमत करीब एक लाख रुपये से शुरू होकर 10 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है। हालांकि‍, इसकी कीमत साड़ी के डिजाइन, कलर्स और उसे बनाने में लगी मेहनत पर ड‍िपेंड करती है। इसकी सबसे खास बात यह भी है क‍ि इसे तैयार करने में मशीनों के बजाय हाथों से बुनाई की जाती है। इसलिए हर साड़ी को बनाने में काफी समय लगता है।

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डबल इकत तरीके से बनती है पाटन पटोला साड़ी

गुजराती साड़ी पाटन पटोला की सबसे खास बात इसे बनाने का तरीका भी है। इसे डबल इकत टेक्‍न‍िक से तैयार किया जाता है। आमतौर पर कई साड़ियों में कपड़ा बुनने के बाद कलर या डिजाइन दिया जाता है, लेकिन पटोला में ऐसा नहीं होता है। इसमें ताने और बाने यानी लंबाई और चौड़ाई में जाने वाले धागों को बुनाई से पहले ही कलर क‍िया जाता है। ऐसे में बुनकरों को पहले से हिसाब लगाना पड़ता है कि कौन-सा धागा किस जगह आएगा, ताकि बुनाई पूरी होने पर सही डिजाइन बने। अगर धागों की जगह में थोड़ी भी गड़बड़ी हो जाए, तो पूरा डिजाइन बिगड़ जाता है। इसलिए इसे बनाना आसान नहीं होता है।

पाटन पटोला साड़ी के दोनों तरफ दिखता है एक जैसा डिजाइन

पाटन पटोला की एक और खास बात है, जाे इसे दूसरी साड़ियों से अलग बनाती है। आमतौर पर आपने देखा होगा क‍ि साड़‍ियों में उल्‍टर सीधा पता चल जाता है, लेक‍िन पाटन पटोला में ऐसा नहीं होता है। इसकी दोनों तरफ का कलर और डिजाइन एक जैसा रहता है।

एक साड़ी बनाने में लग सकता है एक साल

अगर आपको लग रहा है क‍ि यह साड़ी 10-15 द‍िन में बनकर तैयार हो जाती होगी, तो ऐसा नहीं है।

  • पटोला साड़ी तैयार करने में बुनकरों की महीनों की मेहनत लगती है।
  • एक स‍िंपल डिजाइन वाली साड़ी को बनाने में भी करीब छह महीने से एक साल तक का समय लग सकता है।
  • अगर डिजाइन ज्यादा बारीक और मुश्किल है, तो इसे तैयार करने में और समय लग सकता है।
  • धागों को कलर करने से लेकर सही तरीके से बुनाई करने तक, हर चीज पर बुनकरों को ध्यान देना पड़ता है।
 
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300 साल तक नई जैसी रह सकती है पाटन पटोला साड़ी

आपको बता दें क‍ि पाटन पटोला के बारे में कहा जाता है कि असली साड़ी सही देखभाल के साथ करीब 300 साल तक नई जैसी रह सकती है। क्‍योंक‍ि इसे बनाने में नेचुरल कलर का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी बुनाई और रंगों की वजह से इसे लंबे समय तक संभालकर रखा जा सकता है। यही वजह है कि कई परिवार ऐसी साड़ियों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संभालकर रखते हैं।

दुर्गा पूजा में पहनें पाटन पटोला साड़ी

दुर्गा पूजा में अगर आप ट्रेड‍िशनल कपड़ों के साथ कुछ खास पहनना चाहती हैं, तो पाटन पटोला साड़ी इस बार ट्राई कर सकती हैं। हालांकि, इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है, इसलिए खरीदने से पहले साड़ी की असलियत, बुनाई और रंगों के बारे में जरूर जानकारी ले लें।

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