फैशन की दुन‍िया बहुत बड़ी है। जब भी फैशन की बात होती है तो स‍िर्फ कपड़ों और मेकअप का ही नहीं, बल्‍क‍ि गहनों का भी ज‍िक्र जरूर होता है। गहनों में कानों में पहने जाने वाले झुमकों की खास जगह है। शादी हो, कोई फेस्‍ट‍िवल हो या फ‍िर कोई खास मौका ही क्‍यों न हो, झुमके पहनने से मह‍िलाओं की सुंदरता चार गुना ज्‍यादा बढ़ जाती है। आज मार्केट में छोटे और बड़े साइज, स‍िंपल और ड‍िजाइनर ईयरर‍िंग्‍य की कई व‍ैरायटीज म‍िल जाते हैं, लेक‍िन झुमकों की बात ही अलग है।

इसी वजह से फैशन का दौर भले ही बदल गया हो, लेक‍िन झुमकों का ट्रेंड आज भी पुराना नहीं हुआ है। द‍िलचस्‍प बात तो ये है क‍ि इसका फैशन कोई नया नहीं है। इसका इत‍िहास हजारों साल पुरानी है। अगर आप भी झुमकों का द‍िलचस्‍प इत‍िहास जानना चाहती हैं तो हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

घंटी की तरह होता है झुमके का ड‍िजाइन

इति‍हास जानने से पहले हम आपको झुमका शब्‍द का मतलब बताएंगे। दरअसल, इसका डि‍जाइन आमतौर पर घंटी की तरह होता है। जब कोई मह‍िला इसे पहनती हैं और जब ये जब इधर-उधर होता है तो खनक सुनाई देती है। आज भी आप जब झुमकों को देखेंगी तो आपको साफ पता चलेगा क‍ि ये घंटी की ड‍िजाइन में है।

2000 साल पुराना है झुमके का इत‍िहास

आपको बता दें क‍ि झुमकों की शुरुआत फैशन और स्टाइल के लिए नहीं की गई थी। इसका इत‍िहास चोल साम्राज्य से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है क‍ि उस दौरान लोग मंदिरों में मूर्तियों को सजाने के लिए झुमके बनाया करते थे। उस दौर में झुमके केवल गहना ही नहीं हुआ करते थे बल्‍क‍ि ये सम्‍मान का प्रतीक भी थे।

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भरतनाट्यम के समय झुमके पहनने लगीं नृत्‍यांगनाएं  

इसका ड‍िजाइन लोगों को इतना पसंद आया क‍ि मंद‍िरों की नृत्‍यांगनाओं ने भी इन्‍हें पहनना शुरू कर द‍िया। भरतनाट्यम करते समय तो खासकर नृत्‍यांगनाएं इसे जरूर पहनती थीं। डांस करते समय झुमकों की मूवमेंट और चमक इसकी नृत्‍य की खूबसूरती को और ज्‍यादा बढ़ा देते थे।

राजघरानों की भी पहली पसंद बने झुमके

धीरे-धीरे ये झुमके मंद‍िरों से लेकर राजघरानों तक पहुंच गए। रानियां और शाही परिवारों की महिलाएं इन्हें पहनने लगीं। झुमकों की एक खास बात ये थी कि वो दि‍खने में बड़े लगते थे और इन्‍हें पहनने पर एकदम रॉयल लुक म‍िलता था। ये द‍िखने में भले ही बड़े लगते थे लेक‍िन इन्‍हें बनाते समय अंदर से खोखला रखा जाता था, ज‍िससे ये हैवी नहीं होते थे।

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मुगल काल में मिला नया रूप

मुगलों के समय झुमकों के डिजाइन में कई बदलाव देखने को मिले। उस समय कानफूल और संकली जैसे डिजाइन लोगों को खूब पसंद आए। संकली में झुमकों को एक चेन लगाकर बालों से जोड़ा जाता था, जिससे लुक और भी रॉयल लगता था। इसके बाद झुमकों में सोने की नक्काशी, मोतियों की लड़ियां और हीरों का इस्तेमाल भी किया जाने लगा। आज शादी ब्‍याह में दुल्‍हनें झुमके ही पहनना पसंद करती हैं।

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आज भी क्यों नहीं कम हुआ झुमकों का क्रेज?

फैशन की दुनिया में कई ट्रेंड आए और गए, लेकिन झुमके उन गहनों में शामिल हैं जो सदियों से लोगों की पसंद बने हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि झुमकों ने समय-समय पर नए ड‍िजाइन बना ल‍िए। इससे इसे पुराने समय के लोगों से लेकर जेन जी तक खूब पसंद करते हैं।

तो अगर आप भी समझती थीं कि‍ झुमके का फैशन आज से है तो हम आपको इसकी द‍िलचस्‍प कहानी बताई है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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