महिलाओं को ज्वेलरी पहनना बहुत पसंद होता है। शादी, पार्टी या कोई खास मौका हो तो आमतौर पर महिलाओं के गले में चोकर नेकलेस जरूर देखने को मिलता है। आज के समय में साड़ी, लहंगा से लेकर वेस्टर्न ड्रेस पर चोकर जरूर स्टाइल किया जाता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि चोकर कोई आज का फैशन ट्रेंड नहीं है? इसका इतिहास हजारों साल पुराना है।

दिलचस्प बात तो ये है कि जिस चोकर को आज लोग फैशन और स्टाइल का हिस्सा मानते हैं, उसे कभी शक्ति, सुरक्षा और समाज की पहचान का प्रतीक माना जाता था। समय के साथ इसके डिजाइन तो बदले ही, साथ ही मतलब भी बदल गए। हम आपको इसका दिलचस्प इतिहास बता रहे हैं। आइए जानते हैं-

4500 साल पुराना है इतिहास

बताया जाता है कि चोकर का इतिहास कम से कम 2500 ईसा पूर्व यानी 4500 साल पुराना है। उस समय सुमेरियन सभ्यता के ज्वेलर्स सोने और कीमती पत्थरों से ऐसे गहने बनाते थे जिन्हें गर्दन के पास पहनाया जाता था। कई बार इनमें लैपिस लाजुली जैसे कीमती पत्थर भी लगाए जाते थे। उस समय इसे खास दर्जे और पहचान से जोड़ा जाता था।

प्राचीन सभ्यताओं में भी था लोकप्रिय

सिर्फ सुमेरियन ही नहीं, बल्कि प्राचीन मिस्र और मिनोअन सभ्यता के लोग भी इस तरह के गहने पहना करते थे। उस समय लोगों का मानना था कि कुछ आभूषण बुरी शक्तियों से बचाने का काम करती हैं। इसी वजह से चोकर जैसी डिजाइन वाले गहनों को सुंदरता के साथ-साथ आध्यात्मिक महत्व भी दिया जाता था। कुल मिलाकर ये संस्कृति का हिस्सा होता था।

राजघरानों तक पहुंचा चोकर

जैसे-जैसे समय बीतता गया, चोकर यूरोप के रॉयल परिवारों तक भी पहुंच गया। 16वीं सदी में रानियों के गले में भी चोकर देखा जाने लगा। इससे साफ पता चलता है कि उस समय भी ये गहना राजघरानों में काफी लोकप्रिय था। धीरे-धीरे ये फैशन का प्रतीक बनने लगा।

एक समय विवादों में भी रहा

19वीं सदी की बात है जब चोकर को लेकर समाज में अलग-अलग राय देखने को मिली। एक ओर इसे शाही महिलाओं का फैशन माना जाता था, वहीं दूसरी ओर साधारण रिबन वाले चोकर कुछ दूसरे वर्गों से भी जुड़ गए थे। हालांकि बाद में ब्रिटेन की क्वीन एलेक्जैंड्रा ने इसे फिर से लोकप्रिय बना दिया। कहा जाता है कि वो अपनी गर्दन का एक निशान छिपाने के लिए चोकर पहनती थीं।

हर दौर में बदलता गया इसका अंदाज

आपको बता दें कि 1920 और 1940 के दशक में चोकर का डिजाइन फिर से बदल गया। उस समय मखमल और लेस से बने चोकर अमीर परिवारों की महिलाएं पहनती थीं। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में रॉक म्यूजिक और हिप्पी कल्चर के असर से चोकर को नया रूप मिला। उस दौर में मोती, पंख और स्टड वाले चोकर खूब पहने जाते थे। फिर 1990 के दशक में प्लास्टिक और इलास्टिक से बने चोकर को फैशन स्टेटमेंट बना दिया गया।

आखिर चोकर नाम क्यों पड़ा?

चोकर नेकलेस गर्दन से बिल्कुल सटाकर पहना जाता है। यही वजह है कि इसे चोकर कहा जाने लगा। इसकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि ये आम हार की तरह नीचे नहीं लटकती, बल्कि गर्दन के पास ही चिपकी रहती है।

भारतीय फैशन में कैसे बना खास?

भारतीय फैशन में चोकर की दीवानगी पिछले कुछ सालों में देखने को मिली है। खासकर शादी और त्योहारों के दौरान महिलाएं इसे लहंगे, साड़ी और शरारा के साथ पहनना पसंद करती हैं।

अब तो आप जान गई होंगी कि करीब 4500 साल पुराने इतिहास वाला ये गहना आज भी फैशन की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाए हुए है। चाहे आप इसे शादी में पहनें या किसी पार्टी में, चोकर हमेशा आपके लुक को निखार देगा। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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