जरा सोचिए अचानक लाइट चली गई, आपने इन्वर्टर ऑन किया और वो 10 मिनट में ही बंद हो गया है, तो क्या है वजह? दरअसल, इतनी जल्दी बैटरी बंद होने का कारण है, बैटरी में पानी खत्म होना। अक्सर लोग जल्दबाजी में नल का या आर।ओ। का पानी बैटरी में डाल देते हैं और यहीं आप सबसे बड़ी गलती कर बैठती हैं। इन्वर्टर की लेड-एसिड (Lead-Acid) बैटरी के अंदर लेड प्लेटें सल्फ्यूरिक एसिड और डिस्टिल्ड वॉटर में डूबी होती हैं और अगर उसमें मिनरल वाला पानी गया तो प्लेटों पर सफेद पपड़ी जम जाती है। फिर बैटरी चार्ज ही नहीं होती है। इसे बचाने का सिर्फ एक ही तरीका है, सही वाटर लेवल इंडिकेटर को समझना।
बैटरी में डलता है खास तरह का पानी
क्या आप जानती हैं कि इन्वर्टर बैटरी के टोप पर लगे छोटे-छोटे फ्लोट इंडिकेटर ही उसके बारे में बताते हैं। जब बैटरी में पानी पूरा होता है तो लाल निशान ऊपर उठकर हरे निशान को छू लेता है। जब पानी कम होता है तो वो लाल निशान नीचे बैठ जाता है। यही वो सिग्नल है कि अब बैटरी को डिस्टिल्ड वाटर चाहिए। अगर आपने इस सिग्नल को इग्नोर किया तो प्लेटें हवा में आ जाएंगी और बैटरी हमेशा के लिए डेड हो जाएगी।
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वाटर लेवल इंडिकेटर कैसे समझें?
हर बैटरी के हर सेल पर एक-एक इंडिकेटर लगा होता है यानी कुल 6 सेल होते हैं।
ग्रीन मार्क मतलब OK
अगर लाल फ्लोट ऊपर तैर कर हरे निशान तक पहुंच गया है, तो पानी बिल्कुल लेवल पर है। उसमें कुछ करने की जरूरत नहीं है।
रेड मार्क मतलब खतरा
अगर लाल फ्लोट नीचे गिरा हुआ है और हरे निशान से काफी नीचे है, तो समझिए पानी खत्म होने वाला है। तुरंत टॉप-अप करें।
बैटरी में सिर्फ डिस्टिल्ड वाटर ही क्यों?
लोग सोचते हैं आर।ओ पानी तो एकदम साफ होता है, वहीं डाल देते हैं, लेकिन ये सबसे बड़ी भूल होती है।
नल का पानी, आर।ओ, एसी का पानी: इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन जैसे मिनरल्स होते हैं। ये मिनरल बैटरी के एसिड के साथ मिलकर प्लेटों पर परत बना देते हैं। इससे बैटरी की कैपेसिटी 50% तक कम हो जाती है और बैटरी फूलने भी लगती है।
डिस्टिल्ड वाटर ही सही है: ये पानी भाप बनाकर फिर से बन जाता है, इसमें एक भी आयन या मिनरल नहीं होता है। इसका TDS जीरो होता है, इसलिए ये बैटरी की प्लेटों को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाता है। 20-30 रुपये लीटर वाला ये पानी ही आपकी बैटरी की 5 साल की लाइफ तय करता है।
स्टेप टू स्टेप जानें पानी डालने का सही तरीका
स्टेप 1: सबसे पहले इन्वर्टर का मेन स्विच और पावर सॉकेट बंद कर दें। हाथों में रबर के ग्लव्स और आंखों पर चश्मा पहनें, क्योंकि अंदर तेजाब होता है।
स्टेप 2: बैटरी के ऊपर जमी धूल को सूखे कपड़े से साफ करें ताकि कचरा सेल के अंदर न जाए। फिर सभी 6 कैप को एंटी-क्लॉकवाइज घुमाकर खोलें।
स्टेप 3: पानी हमेशा बैटरी को फुल चार्ज करने के बाद डालें। चार्जिंग के दौरान पानी का लेवल बढ़ता है, अगर पहले डालेंगे तो ओवरफ्लो हो जाएगा।
स्टेप 4: प्लास्टिक की कीप या बोतल का इस्तेमाल करें, लोहे की कीप कभी नहीं। धीरे-धीरे पानी डालें और फ्लोट को देखते रहें। जैसे ही लाल निशान हरे निशान को छुए, रुक जाएं।
स्टेप 5: सभी कैप को क्लॉकवाइज टाइट बंद करें, बैटरी के आसपास गिरा पानी तुरंत पोंछ दें, नहीं तो जंग लगेगा। फिर इन्वर्टर चालू कर दें।
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ये 3 गलतियां भूलकर भी न करें
- हरे निशान से ऊपर पानी भरने पर चार्जिंग के समय एसिड बाहर निकल आएगा और फर्श व तारों में जंग लगा देगा।
- गर्मियों में हर 2 हफ्ते और सर्दियों में हर 45 दिन में लेवल जरूर चेक करें। आजकल कई कंपनियां पानी खत्म होने पर बीप वाला सेंसर भी दे रही हैं।
- जब बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो तो कभी पानी न डालें, इससे एसिड का घनत्व बिगड़ जाता है।
इन्वर्टर बैटरी कोई मेंटेनेंस-फ्री नहीं है, इसे हर महीने 5 मिनट का समय चाहिए। सिर्फ ₹30 का डिस्टिल्ड वाटर और इंडिकेटर पर नजर रखकर आप अपनी बैटरी की उम्र 2 साल से बढ़ाकर 4-5 साल कर सकते हैं। याद रखिए, नल का एक लोटा पानी आपकी पूरी बैटरी को कबाड़ बना सकता है, इसलिए हमेशा बोतल पर लिखा देखकर ही Battery Grade Distilled Water खरीदें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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