आजकल स्मार्टफोन के आने के बाद से हर एक शख्स के हाथ में स्मार्टफोन देखने को मिल रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है। क्या आपने कभी एक चीज नोटिस की है? जब भी आप अपने दोस्त या किसी खास इंसान से खाने-पीने की या घूमने-फिरने की बातें करते हैं, तो थोड़ी देर बाद ही आपके फोन पर उस चीज से जुड़े विज्ञापन या पोस्ट दिखाई देने लगते हैं।
यह एक ऐसा एहसास है, जो हर स्मार्टफोन यूजर ने कभी-कभी जरूर महसूस किया होगा। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है और आपके मन में यह सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों होता है, तो इस लेख में हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे।
क्या फोन सच में हमारी बातें रिकॉर्ड करता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि फोन का माइक्रोफोन चोरी-छिपे 24 घंटे आपकी बातचीत रिकॉर्ड कर रहा है और इसी वजह से विज्ञापन आने लगते हैं। हालांकि, टेक दिग्गज कंपनियां हमेशा इस बात से इनकार करती रही हैं। तो फिर आखिर सच क्या है? आइए जानते हैं।
स्मार्टफोन माइक्रोफोन से लगातार बातें सुनने के दावे को लेकर टेक एक्सपर्ट्स और शोधकर्ताओं का कहना है कि गूगल असिस्टेंट, सीरी या एलेक्सा जैसे फीचर्स केवल तब एक्टिव होते हैं, जब आप 'हे गूगल' या 'हे सीरी' जैसे हॉटवर्ड्स बोलते हैं। तकनीकी रूप से देखा जाए तो सिस्टम हमेशा एक छोटे से लोकल मेमोरी बफर में आपकी आवाज सुनते हैं, ताकि वे वेक-वर्ड को पहचान सकें, लेकिन कंपनियों के मुताबिक, जब तक आप वह कमांड न बोलें, तब तक डेटा सर्वर पर अपलोड नहीं होता।
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर कोई ऐप लगातार 24 घंटे आपका ऑडियो रिकॉर्ड करके सर्वर पर भेजेगा, तो इससे आपके फोन का इंटरनेट डेटा बहुत तेजी से खत्म होगा और बैटरी कुछ ही घंटों में डाउन हो जाएगी। इसीलिए टेक कंपनियां बातें सुनने के बजाय आपके डिजिटल फुटप्रिंट्स का इस्तेमाल करती हैं, जो विज्ञापनों के लिए ज्यादा सटीक होते हैं।
टारगेटेड एड्स का असली एल्गोरिदम कैसे काम करता है?
बिना आपकी आवाज सुने भी एआई एल्गोरिदम आपकी जरूरतों का एकदम सटीक अंदाजा लगा सकता है। इसके पीछे कुछ खास वजहें हैं -
1. अमेरिका के Federal Trade Commission (FTC, USA) के अनुसार जब आप या आपका दोस्त एक साथ कहीं बैठकर पिज्जा खाते हैं, तो आपके फोन का जीपीएस आपकी लोकेशन ट्रैक कर लेता है। इससे वह आपको आसपास की जगहों और पिज्जा से जुड़े विज्ञापन दिखाने लगता है।
2. जब भी आपका दोस्त फोन में किसी खाने की डिश को सर्च करता है, तो ऐड नेटवर्क यह समझता है कि आप दोनों एक ही विषय पर चर्चा कर रहे हैं। इसी वजह से आप दोनों के फोन में उससे जुड़े विज्ञापन दिखने लगते हैं।
3. आपने गूगल पर क्या सर्च किया है, कौन सी वेबसाइट विजिट की है और क्या प्रोडक्ट खोज रहे हैं, यह सारा डेटा आपकी सर्च हिस्ट्री पर स्टोर होता है। एआई एल्गोरिदम आपकी इन्हीं एक्टिविटी से यह प्रिडिक्ट कर लेता है कि आप अगले कुछ घंटों में क्या खरीदने का सोच रहे हैं।
4. लगभग हर शॉपिंग ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ट्रैकिंग पिक्सेल लगे होते हैं। जब आप किसी ऐप पर कोई सामान देखते हैं, तो उसी से मिलता-जुलता विज्ञापन आपके पास आने लगता है।
निष्कर्ष: अगर आप अभी तक इसी बात को लेकर कंफ्यूज थे कि आपका स्मार्टफोन आपकी सारी बातें सुनता है, तो जान लें कि यह तकनीक और एआई एल्गोरिदम का ही एक जरिया है। आज के समय में हमारे डिजिटल फुटप्रिंट्स, लोकेशन डेटा और ऑनलाइन सर्च ही यह सब तय करते हैं। एआई एल्गोरिदम हमारे बोलने से पहले ही हमारी जरूरतें समझ जाता है और उसी से जुड़े विज्ञापन हमारे सामने ले आता है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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