आप कहां जाती हैं, किससे बात करती हैं… क्या कोई चुपके से रख रहा है नजर? जानें अपने कानूनी अधिकार

किसी का बार-बार यह पूछना कि आप कहां जा रही हैं, किससे बात कर रही हैं या फोन पर किसका मैसेज आया है, कभी-कभी सामान्य चिंता लग सकती है। मगर जब यही सवाल हर एक एक्टिविटी पर बार-बार उठने लगे, हर गतिविधि पर नजर रखने, फोन की जांच करने या बिना अनुमति लोकेशन ट्रैक करने तक पहुंच जाएं, तो मामला सिर्फ शक या रिश्तों में भरोसे की कमी का नहीं रह जाता। यह कंट्रोल आपकी प्राइवेसी और पर्सनल फ्रीडम से भी जुड़ा है। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि यह सामान्य बात है या फिर वह इस स्थिति में क्या ही कर सकती हैं। ऐसे में चाहकर भी महिलाएं अपने लिए स्टैंड नहीं ले पाती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इसके लिए भी संविधान में कानून है। आज निडर नारी सीरीज में हम अंकित देव अर्पण, साइबर लॉयर डायरेक्टर Lex Cyber Attorneys से जानेंगे कि इसके खिलाफ शिकायत कैसे करें और इसके लिए कौन से कानून बने हैं?
महिला की गतिविधियों पर नजर रखना है अपराध, जानें क्यों?
किसी महिला की गतिविधियों पर चुपके से नजर रखना, उसका पीछा करना या उसके फोन व सोशल मीडिया की जासूसी करना 'परवाह' या 'अधिकार' नहीं, बल्कि एक गंभीर दंडनीय अपराध है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर महिला को निजता और स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, चाहे वह घर के भीतर हो या डिजिटल दुनिया में। कोई भी व्यक्ति, यहां तक कि जीवनसाथी या परिजन भी, किसी महिला की निजता का हनन नहीं कर सकता।
महिला पर बिना मर्जी के नजर रखने के खिलाफ क्या कानून हैं?
यदि कोई व्यक्ति किसी महिला का वास्तविक रूप से या डिजिटल माध्यम से (Cyber Stalking/Spying) पीछा कर रहा है, तो भारतीय कानून में इसके विरुद्ध सख्त प्रावधान मौजूद हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 78 स्टॉकिंग की चर्चा करता है, जिसमें वर्णित है कि अगर कोई व्यक्ति किसी महिला का बिना उसकी अनुमति या इच्छा के पीछा करता है या उससे संपर्क करने की कोशिश करता है या फिर डिजिटल दुनिया में ईमेल, सोशल मीडिया व किसी भी इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन जैसे चैट्स, कॉल लॉग्स, लोकेशन इत्यादि की निगरानी करता है, तो यह स्टॉकिंग का अपराध है। इसके अंतर्गत पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की सजा एवं जुर्माना तथा दूसरी बार ऐसा करने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।
फोन में बिना परमिशन स्पाईवेयर इंस्टॉल करने को लेकर क्या कहता है कानून?
वहीं IT Act 2000 की चर्चा करें तो यदि कोई व्यक्ति महिला के फोन में चुपके से स्पाईवेयर इंस्टॉल करता है, बिना अनुमति जीपीएस लोकेशन ट्रैक करता है, व्हाट्सएप/सोशल मीडिया क्लोन या हैक करता है, तो IT Act की धारा 43 व 66 के तहत यह अनधिकृत एक्सेस (Unauthorized Access) का अपराध है, जिसमें 3 साल तक की कैद या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, निजी पलों की फोटो या वीडियो चुपके से कैप्चर करने पर धारा 66E (निजता का उल्लंघन) के तहत 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
वहीं अगर किसी महिला के निजी कार्य स्थान या ऐसे स्थान पर जहां वह निजता की अपेक्षा रखती है, चुपके से नजर रखना या हिडन कैमरे से रिकॉर्डिंग करना गंभीर अपराध है।
इसे BNS की धारा 77, (IPC की धारा 354C) के अंतर्गत Voyeurism माना जाता है और इसमें पहली बार में 1 से 3 साल और दूसरी बार में 3 से 7 साल तक की सजा हो सकती है।
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है यह अनुच्छेद
अगर इसको केसेज के आधार पर देखें तो कुछ ऐसे केस हैं जिन्होंने निजता के अधिकार को और सशक्त बनाया है।
जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) में स्पष्ट किया गया कि 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। किसी की सहमति के बिना उस पर निगरानी रखना उसके मौलिक अधिकार का सीधा हनन है। गौरतलब है कि इस ऐतिहासिक फैसले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने किया था।
वहीं PUCL VS UOI ने कॉल रिकॉर्डिंग और इंटरसेप्शन के नियमों को सख्त किया था। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्धारित किया कि किसी व्यक्ति की टेलीफोन बातचीत को चुपके से सुनना या टैप करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसकी निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act), 2023 की धारा 42 में भी वर्णित है कि बिना कानूनी अनुमति के किसी के फोन को टैप करना या चुपके से कॉल इंटरसेप्ट करना गैर-कानूनी है। इसके लिए 3 साल तक की सजा या 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
पति-पत्नी के रिश्ते के बीच भी प्राइवेसी का अधिकार
अगर मामला पति पत्नी का हो तो इसके लिए भी रायला एम. भुवनेश्वरी बनाम नागफनेंदर रायला के मामले को ध्यान में रखना होगा जहां न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक संबंध में होने का अर्थ यह नहीं है कि पत्नी ने अपनी निजता का अधिकार खो दिया है। पति द्वारा पत्नी की जानकारी के बिना उसकी बातचीत को चुपके से रिकॉर्ड करना या जासूसी करना पूर्णतः अवैध और निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
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आज के दौर में निगरानी केवल सड़कों पर पीछा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पाई ऐप्स, लोकेशन ट्रैकर और सोशल मीडिया क्लोनिंग के जरिए 'डिजिटल स्टॉकिंग' के रूप में घर के भीतर तक पहुंच चुकी है। कानून की नजर में किसी महिला की सहमति के बिना उसका फोन चेक करना, लोकेशन ट्रैक करना या कॉल रिकॉर्ड करना ना केवल BNS और IT Act के तहत सीधा अपराध है अपितु यह व्यक्ति के आधारभूत अधिकारों का उल्लंघन भी है। महिलाओं को यह समझना होगा कि रिश्ते या सुरक्षा के नाम पर उनकी निजता की जासूसी करने का हक किसी को नहीं है।
रिश्ते में भरोसा होना जरूरी है, लेकिन भरोसे के नाम पर किसी की निजी जिंदगी पर कंट्रोल रखना सही नहीं है। किसी महिला का पति, पार्टनर या परिवार का सदस्य होना अपने आप में उसे फोन, मैसेज और लोकेशन की हर समय निगरानी करने का अधिकार नहीं देता। हालांकि, किसी घटना को अपराध मानने के लिए संबंधित कानून और परिस्थितियों को देखना जरूरी है।
अगर कोई चुपके से नजर रख रहा है, तो महिला कहां शिकायत करे?
अगर आपको लगता है कि कोई आपकी लोकेशन ट्रैक कर रहा है, फोन की जासूसी कर रहा है या लगातार परेशान कर रहा है, तो आप ये कदम उठा सकती हैं।
- नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। महिला सुरक्षा से जुड़े मामले में महिला पुलिस अधिकारी से बात करने का अनुरोध भी कर सकती हैं।
- ऑनलाइन निगरानी, अकाउंट हैकिंग या डिजिटल उत्पीड़न से जुड़े मामले में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) का इस्तेमाल कर सकती हैं।
- तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें। महिला हेल्पलाइन 181 भी सहायता के लिए उपलब्ध है; इसकी उपलब्धता और सेवा राज्य के अनुसार अलग हो सकती है।
- अनजान ऐप, लोकेशन शेयरिंग, लॉग-इन डिवाइस और अकाउंट की अनुमतियां जांचें। पासवर्ड किसी सुरक्षित डिवाइस से बदलें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।
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रिश्ते में भरोसा होना जरूरी है, लेकिन भरोसे के नाम पर किसी की निजी जिंदगी पर कंट्रोल रखना सही नहीं है। किसी महिला का पति, पार्टनर या परिवार का सदस्य होना अपने आप में उसे फोन, मैसेज और लोकेशन की हर समय निगरानी करने का अधिकार नहीं देता। हालांकि, किसी घटना को अपराध मानने के लिए संबंधित कानून और परिस्थितियों को देखना जरूरी है।
महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकार से जुड़ी हर अहम बात हम हफ्ते में दो दिन अपनी खास सीरीज निडर नारी के जरिए आपको बताएंगे।
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