उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका असर उनकी सेहत पर होता है। बात चाहें पीरियड्स की हो, प्रेग्नेंसी की हो, पोस्टपार्टम की हो, पेरिमेनोपॉज की हो या मेनोपॉज की...महिलाओं के शरीर में उम्र के साथ कई बदलाव होते हैं और ऐसे में सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। बात अगर 40 साल की उम्र के बाद की करें यानी वो समय जब पेरिमेनोपॉज शुरू होता है और शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ बढ़ता है, उस समय पर महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। पीरियड्स का अनियमित होना, हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस समय पर डाइट में कुछ खास चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी हो जाता है।
यहां हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको पेरिमेनोपॉज फेज में जरूर खानी चाहिए। चलिए इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी डाइटिशियन मनप्रीत कालरा दे रही हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से न्यूट्रिशन्स में मास्टर्स किया है। वह हार्मोन और गट हेल्थ कोच हैं और रीबूट गट हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली की फाउंडर और डायरेक्टर हैं।
पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को जरूर खाने चाहिए ये फूड्स
- एक्सपर्ट का कहना है कि पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। इस समय पर फल, सब्जियां, नट्स, सीड्स और ऐसे मसालों को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए, जो इंफ्लेमेशन कम कर सके, एस्ट्रोजन को बैलेंस कर सके, ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस कर सके और शरीर को ताकत दे।
- इस समय पर स्किन, मूड और हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने वाली चीजें जरूर खानी चाहिए।
- पेरिमेनोपॉज में अनार, सेब, आंवला और बेरीज खाएं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इनसे इंफ्लेमेशन कम होता है, हार्मोन बैलेंस होते हैं, स्किन और हार्ट हेल्थ दुरुस्त होती है।
- सब्जियों में आप ब्रॉकली, गाजर, पालक और गोभी खाएं। ये फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होती हैं। इनसे एस्ट्रोजन बैलेंस होता है, हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर डिटॉक्स होता है।
- फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, अखरोट और तिल के बीज खाएं। इनमें फाइटोएस्ट्रोजन, ओमेगा-3 और मिनरल्स होते हैं, जो हॉट फ्लैशेज को कम करते हैं, मूड को सुधारते हैं और हार्मोन्स को बैलेंस करते हैं।
- हल्दी, मेथी, दालचीनी और सौंफ के बीज को डाइट में शामिल करें। इनसे ब्लड शुगर लेवल रेगुलेट होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और पेरिमेनोपॉज में होने वाला हार्मोनल बदलाव आसानी से होता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि मेनोपॉज और पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को डाइट और रूटीन का खास ख्याल रखना चाहिए। हरजिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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