ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए जब पीला बोर्ड आंखों के सामने से गुजरता है, तो आपका ध्यान केवल रेलवे स्टेशन के नाम पर जाता है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि स्टेशन का नाम हमेशा पीले बोर्ड पर ही क्यों लिखा जाता है? बचपन से लेकर आज तक हमने हर स्टेशन पर यह पीला बोर्ड देखा है। इसके साथ ही एक और सवाल मन में आता है कि पीले रंग के बोर्ड पर हमेशा काले अक्षरों से से ही नाम क्यों लिखा जाता है? आइए जानते हैं इस 'पीले बोर्ड और काले अक्षर' के मैच के पीछे छुपा दिलचस्प कारण।

कोहरे और अंधेरे में भी साफ नजर आता है बोर्ड

सर्दियों के मौसम में धुंध की वजह से ट्रेक भी दिखाई नहीं देता, ऐसे में अगर किसी और रंग के बोर्ड पर स्टेशन का नाम लिखा जाएगा, तो अंधेरे में पढ़ना मुश्किल हो जाएगा। वहीं पीले रंग लाइट पड़ते ही चमकने लगता है, जिससे आप आसानी से स्टेशन पर लिखा नाम पढ़ पाती हैं।

  • पीले रंग से कोहरे के बीच भी लोको पायलट और गार्ड को स्टेशन की लोकेशन समझ आ जाती है।
  • इस रंग के बोर्ड पर नाम लिखने से किसी भी मौसम या समय पर स्टेशन मिस होने का डर नहीं रहता।

नाम पढ़ने में नहीं होती दिक्कत

हमेशा नाम पीले बोर्ड पर ही इसलिए लिखा जाता है, ताकि चलती ट्रेन में भी यात्री प्लेटफॉर्म का नाम आसानी से पढ़ पाएं। पीला रंग बहुत चमकदार होता है और इसके ऊपर काले रंग से नाम लिखने पर शब्द खिलकर दिखाई देते हैं। जब ट्रेन बहुत तेज स्पीड में प्लेटफॉर्म से निकलती है, तब भी आपको पढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। पीले बैकग्राउंड पर काले अक्षरों का कॉम्बिनेशन होने की वजह से आप दूर से भी आराम से स्टेशन का नाम पढ़ पाती हैं।

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  • पीला रंग पर लिखे काले शब्द को आंखें बहुत जल्दी कैच करती हैं, जिससे दूर से ही ध्यान चला जाता है।
  • पीला रंग पर शब्द धूंधले नहीं लिखते, अंग्रेजी या हिंदी दोनों में ही शब्द पढ़ना आसान होता है।

सेफ्टी और काम में मदद मिलती है

पीले बोर्ड पर लिखा स्टेशन का नाम रेलवे कर्मचारियों के लिए भी मददगार होता है। इससे ट्रैक पर काम चल रहा है या कोई स्टेशन आने वाला है, इसपर ड्राइवर की पहले ही नजर पड़ जाकी है, जिससे ट्रेन कब धीमी करनी है और कहां रोकनी है और सिग्नल पर क्या करना है? इसके बारे में उसे सोचने का वक्त मिल जाता है।

  • ब्रेक लगाने और स्टेशन पर गाड़ी खड़ी करने में कोई गड़बड़ी नहीं होती।
  • यात्रियों के साथ-साथ ट्रेन चलाने वाली टीम की मदद के लिए बनाई गई है।
  • बोर्ड साफ दिखेगा तो ड्राइवर ट्रेन को सही टाइम पर कंट्रोल कर पाएगा।
 
रेलवे स्टेशन का नाम पीले बोर्ड पर लिखने का चलन ब्रिटिश काल से ही तय हो गया था। उस समय से रेलवे ने पीले रंग को एक फिक्स नियम बना दिया था।

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Image Credit- gemini, indian railway