अगर किसी गांव की परिभाषा पूछे तो लहलहाते खेत, कच्चे-पक्के मकान और लोगों की सादा जीवनशैली बताते हैं। हालांकि, भारत देश अपनी विविधताओं और परंपराओं के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यहां की सभ्यता, रीति-रिवाज और अलग-थलग रहन-सहन लोगों को खूब भाता है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जिसे सुनने या जानने के बाद लोग सोच में पड़ जाते हैं। इनमें से तमाम परंपराएं ऐसी हैं, जिसके बारे में हममें से बहुत सारे लोग जानते भी होंगे। मगर क्या आपको भारत के ऐसे गांव के बारे में पता है, जो अपने अजीबोगरीब परंपराओं, रहस्यों और अतरंगी कहानियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। आज के इस लेख में हम आपको इन्हीं गांवों के बारे में बताने जा रहे हैं।
शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र)-बिना दरवाजे का गांव
घर को सुरक्षित रखने के लिए हम सभी अपने घर में लकड़ी, लोहे या स्टील के दरवाजे लगवाते हैं। अगर एक भी घर दरवाजा खुला रह जाए, तो चोरी का खतरा बढ़ जाता है। मगर क्या आपको पता है महाराष्ट्र के शिंगणापुर के घरों में एक भी दरवाजा नहीं है। घर ही नहीं बल्कि दुकान और बैंकों में भी दरवाजे या कुंडी नहीं हैं। यहां के लोगों का मानना है कि खुद भगवान शनिदेव उनके घरों की रक्षा करते हैं। साथ ही यहां आज तक कभी चोरी नहीं हुई है।
शेतपाल (महाराष्ट्र)-सांपों के घर
शेतपाल में स्थित गांव को सांपों का गांव कहते हैं। यहां के हर घर में इंसानों के साथ सांप खुलेआम घूमते हैं। यहां नया घर बनाते समय छत में सांपों के रहने के लिए देवघर बनाना जरूरी होता है। आज तक यहां किसी सांप ने किसी इंसान को नहीं काटा है।
कोडिनही (केरल)-जुड़वां बच्चों का गांव
कोडिनही गांव को ट्विन्स विलेज भी कहा जाता है। यहां की कुल आबादी में 400 से ज्यादा जुड़वां लोग हैं। आम तौर पर हजारों बच्चों पर कोई एक जुड़वां बच्चा पैदा होता है, लेकिन इस गांव में हर घर में ट्विंस हैं।
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कोंगथोंग (मेघालय)- सीटी बजाकर बात करने वाला गांव
अगर मैं आपसे कहूं कि भारत में एक गांव ऐसा है, जिसे व्हिसलिंग विलेज के नाम से जाता है। हो सकता है कि आपको थोड़ा अजीब लगे,लेकिन यह सच है। यहां के लोग एक-दूसरे को बुलाने के लिए नाम का नहीं बल्कि एक खास धुन या सीटी का इस्तेमाल करते हैं। यहां जब भी कोई बच्चा पैदा होता है, तो उसकी माँ उसके लिए एक अनोखी धुन तैयार करती है, जो जिंदगीभर उसकी पहचान बन जाती है।
मावलिननॉन्ग (मेघालय)–साफ-सुथरा गांव
साफ-सुथरी जगह की बात भारत में करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मगर मेघालय में एक ऐसी जगह है, जिसे साफ गांव होने का खिताब मिला हुआ है। बता दें कि यहां पर प्लास्टिक पूरी तरह बैन होता है। यहां पर रहने वाले लोग खुद रास्तों को साफ करते है। साथ ही प्लास्टिक डस्टबिन की जगह बांस से बने कूड़ेदान का इस्तेमाल किया जाता है।
मत्तूर (कर्नाटक)-संस्कृत बोलने वाले लोगों का गांव
पहले के समय में लोग संस्कृत भाषा का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। हालांकि, वर्तमान में बहुत कम लोग ही इस भाषा को बोलते और लिखते हैं। मगर आपको बता दें कि भारत में एक ऐसा जगह है, जहां पर हर एक छोटे-बड़ा इंसान संस्कृत में ही बातचीत करता है। यहां रहने वाले लोग आज भी प्राचीन वैदिक जीवन शैली का पालन करते हैं।
हिवरे बाजार (महाराष्ट्र)-करोड़पतियों का गांव
कभी सूखे और भयंकर गरीबी से जूझने वाला यह गांव आज भारत का सबसे अमीर गांव है। यहां की कुल 300-400 परिवारों की आबादी में से 60 से ज्यादा लोग करोड़पति हैं। यहां के लोगों ने पानी के सही प्रबंधन और खेती के आधुनिक तरीकों से अपनी किस्मत खुद बदली है।
लोंगवा (नागालैंड)-आधा भारत और आधा म्यांमार में बसा गांव
भारत-म्यांमार सीमा पर बसे इस गांव के लोगों के पास दोहरी नागरिकता है। यहां के मुखिया का घर तो इतना अनोखा है कि उसका आधा हिस्सा यानी रसोई भारत में पड़ता है और आधा हिस्सा यानी शयनकक्ष म्यांमार में आता है। यहां के लोग बिना वीजा के दोनों देशों में घूमते हैं।
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