साउथ फिल्मों के सुपरस्टार महेश बाबू को आपने पर्दे पर कई तरह के रोल प्ले करते हुए देखा होगा, लेकिन उनकी जिंदगी में एक जगह ऐसी भी है जिसका रिश्ता उनके दिल और परिवार से बहुत गहरा है। हम आंध्र प्रदेश के बुर्रिपालेम गांव की बात कर रहे हैं। दरअसल, यह गांव एक्टर के पिता और तेलुगु सिनेमा के जाने-माने स्टार कृष्णा का जन्मस्थान है। महेश बाबू ने भी अपने बचपन का कुछ समय इस गांव में अपनी दादी के साथ बिताया था।
यही वजह है कि इस जगह से उनका कनेक्शन सिर्फ एक बड़े स्टार का नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से प्यार करने वाले इंसान का है। ऐसे में अगर आप आंध्र प्रदेश घूमने का प्लान बना रही हैं, तो इस गांव को भी एक्सप्लोर कर सकती हैं। यह जगह पर्यटकों को खूब पसंद आती है। खास बात तो यह है कि इस गांव को महेश बाबू ने गोद भी ले रखा है। आइए यहां का पूरा ट्रैवल गाइड जानते हैं-
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घूमने के लिहाज से क्यों खास है बुर्रिपालेम?
आपको बता दें कि यह जगह किसी बड़े ऐतिहासिक स्मारक की तरह मशहूर नहीं है। इसकी खासियत गांव की जिंदगी, स्थानीय संस्कृति और महेश बाबू के परिवार से जुड़ी कहानी है। इस गांव की सादगी ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। आप यहां आकर इस गांव की सादगी को देख सकती हैं। साथ ही आसपास के इलाकों को भी ट्रिप में शामिल कर सकती हैं।
- तेनाली: यह शहर अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। यहां घूमकर आप आंध्र प्रदेश की स्थानीय संस्कृति को करीब से समझ सकती हैं।
- अमरावती: यहां की बौद्ध विरासत और पुराने ऐतिहासिक अवशेष इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों को पसंद आएंगे।
- मोव्वा वेणुगोपाल स्वामी मंदिर: कृष्णा जिले में मौजूद यह मंदिर आकर्षण का केंद्र है। आप यहां भी जा सकती हैं।
बुर्रिपालेम कैसे पहुंचें?
अगर आप आंध्र प्रदेश के बुर्रिपालेम जाने का प्लान बना रही हैं, तो आपके पास कई ऑप्शंस हो सकते हैं।
- फ्लाइट से: अगर आप प्लेन से जा रही हैं, तो सबसे नजदीकी विजयवाड़ा एयरपोर्ट है। यहां से टैक्सी या बस लेकर आसानी से बुर्रिपालेम पहुंचा जा सकता है।
- ट्रेन से: ट्रेन से आने वालों के लिए तेनाली रेलवे स्टेशन सबसे अच्छा ऑप्शन है। आप तेनाली में रुक सकती हैं और वहां से लोकल गाड़ियों के जरिए गांव तक जा सकती हैं।
- सड़क के रास्ते: बुर्रिपालेम तक सड़क मार्ग से भी आसानी से जाया जा सकता है। बस ध्यान रखें कि निकलने से पहले रास्ते और लोकल गाड़ियों की जानकारी निकाल लें।
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बुर्रिपालेम घूमने क्यों जाएं?
इस गांव को देखने की वजह सिर्फ इतनी नहीं है कि इसका नाता सुपरस्टार महेश बाबू से है। यहां आकर आपको यह देखने और जानने को मिलेगा कि कैसे एक इंसान अपनी जड़ों और अपने परिवार के पुराने गांव के लिए दिल से काम करता है।
महेश बाबू ने क्यों लिया था बुर्रिपालेम गांव को गोद?
आपको बता दें कि साल 2015 में महेश बाबू की एक फिल्म आई थी 'श्रीमंथुडु'। इस फिल्म में अपनी जड़ों की तरफ लौटने और गांव के विकास का संदेश दिया गया था। इसी से इंस्पायर्ड होकर एक्टर ने अपने पैतृक गांव बुर्रिपालेम को गोद लेने का फैसला किया था। गांव को गोद लेने के करीब एक साल बाद यानी मई 2016 में उन्होंने यहां जमीनी स्तर पर विकास का काम शुरू करवा दिया था।
गांव की सूरत बदलने के लिए लगभग 2.14 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया गया। इसमें बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल में नए कमरे, कम्युनिटी हॉल जैसे काम शामिल थे।
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