हम सभी को घूमने-फिरने का काफी शौक होता है। भारत में घूमने के लिए एक से एक जगहें मौजूद भी हैं। अगर आप भी घूमने की चाहत रखती हैं तो भारत की आखिरी चाय की दुकान के बारे में जरूर सुना होगा। ये फेमस चाय की दुकान कहीं और नहीं, बल्कि उत्तराखंड के माणा गांव में स्थित है। ये गांव बद्रीनाथ से करीब 3 किलोमीटर दूर है। ये गांव इंडो-चीन बॉर्डर से कुछ ही दूरी पर बसा हुआ है। कहते हैं कि ये वही गांव है जहां से सीधे स्वर्ग का रास्ता जाता है।

करीब 2 साल पहले मेरे कलीग के दोस्‍त जिनका नाम अभय नेगी है, वहां होकर आए हैं। उन्होंने बताया कि माणा में छोटी सी एक चाय की दुकान है। वहां बोर्ड पर ही साफ-साफ लिखा है 'हिंदुस्तान की अंतिम दुकान'। जो भी पर्यटक माणा जाते हैं, वो इस चाय की दुकान पर रुककर चुस्की जरूर लेते हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से -

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11 हजार फीट की ऊंचाई पर है ये दुकान

आपको बता दें कि ये चाय की दुकान समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर है। खास बात तो ये है कि इतनी ऊंचाई पर हाेने के बावजूद आप यहां पर UPI से भी पेमेंट कर सकती हैं।

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किसने खोली थी चाय की दुकान?

अभय नेगी का कहना है कि करीब 33 साल पहले चाय की इस दुकान को वहीं के एक स्थानीय व्यक्ति ने खोली थी, जिसका नाम चंद्र सिंह बरवाल है। बाद में दुकान के बाहर 'भारत की आखिरी चाय की दुकान' का बोर्ड लगा दिया गया। ये नाम पर्यटकों को इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे ये दुकान पूरे देश में फेमस हो गई।

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चारों ओर दिखते हैं शानदार नजारे

उत्तराखंड के चमोली जिले में बसा माणा गांव इतना खूबसूरत है कि हर कोई इसकी खूबसूरती का दीवाना हो जाता है। यहां आपको चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़, ठंडी हवाएं और पास में बहती सरस्वती नदी, इस जगह की खूबसूरती चार गुना बढ़ा देती है। अभय ने बताया कि यहां बैठकर चाय पीने का एक्सपीरियंस बहुत शानदार होता है।

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महाभारत से भी जुड़ा है माणा गांव

माणा गांव सिर्फ अपनी चाय की दुकान के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक और पौराणिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने इसी रास्ते से स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया था।

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कब जाएं यहां?

माणा गांव घूमने के लिए मई से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय अच्छा माना जाता है। बरसात के दिनों में यहां जाना खतरे से खाली नहीं रहता है। वहीं, सर्दियों में यहां भारी बर्फबारी होती है, जिसकी वजह से गांव के ज्यादातर लोग नीचे के इलाकों में चले जाते हैं।

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वसुधारा फॉल्स की भी है दिलचस्प कहानी

आपको बता दें कि माणा गांव से करीब 5 किलोमीटर की ट्रेकिंग करने के बाद वसुधारा फाॅल्स दिखता है। इसकी ऊंचाई करीब 400 फीट है। ऐसा कहां जाता है कि अगर इस झरने का पानी किसी पर पड़ता है तो वो व्यक्ति पाप से मुक्त होता है। वहीं, पापियों पर इस पवित्र जल पर एक भी बूंद नहीं पड़ती है। हालांकि, बस ये कहावत है। इसका जिक्र किसी भी पौराणिक कथाओं में नहीं है।

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कैसे पहुंचे माणा विलेज?

अगर आप माणा विलेज जाना चाहती हैं तो हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचकर आप बस या टैक्सी से चमोली पहुंच सकती हैं। हरिद्वार से चमोली की दूरी करीब 202 किलोमीटर है। यहां से माणा गांव बहुत पास है। वहीं, अगर आप बद्रीनाथ में है, तो यहां से माणा गांव की दूरी करीब 3 किलोमीटर है।

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तो अगर आप भी माणा गांव जाने का सोच रही हैं तो एक बार इस चाय की दुकान पर चुस्की जरूर लें। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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