गोवा तो कई बार जा चुके हैं, इस बार योजना गोकर्ण जाने की थी। गोवा जाते हुए कई बार हम गोकर्ण को छूते हुए आगे बढ़े, लेकिन यहां कभी रुके नहीं थे। अबकी बार प्लानिंग ट्रैवल के साथ पौराणिक स्थलों के दर्शन की भी थी, इसलिए बिना देर किए हमने गोकर्ण घूमने का प्लान बना लिया। गोकर्ण ऐसी जगह है, जहां आप फैमिली और फ्रेंड्स दोनों के साथ जा सकते हैं। यहां तीर्थयात्रियों के लिए कई पौराणिक मंदिर हैं, तो पर्यटन प्रेमियों के लिए खूबसूरत बीचेज और बाजार।

देश के महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों में से एक माने जाने वाले इस शहर का मिजाज़ हालांकि अब काफी बदल चुका है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव की पूजा करने यहां आते हैं। गोकर्ण का मतलब है, गाय का कान। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का जन्म गाय के कान से हुआ था। यह जगह दो नदियों गंगावली और अघनाशिनी के संगम पर स्थित है। तय समय पर हम कार में गोकर्ण के लिए निकले, जो बेंगलुरु से लगभग 8-9 घंटे की दूरी पर है। लेकिन वहां पहुंचने में हमें थोड़ा ज़्यादा समय लगा। भारी ट्रैफिक और खाने के लिए 3 ब्रेक इसकी वजह थी। गोकर्ण पहुंचने में शाम हो गई थी, इसलिए कहीं जाने की बजाय हमने होटल में आराम करना उचित समझा।

महाबलेश्वर मंदिर

अगली सुबह हमारा सबसे पहला कार्यक्रम मंदिर दर्शन का था। यहां के महाबलेश्वर मंदिर के बारे में काफी सुना था। कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों में से एक इस मंदिर को हिंदू पौराणिक कहानियों में अलग स्थान प्राप्त है। किंवदंती है कि मंदिर में मौजूद प्रसिद्ध शिवलिंग की सिर्फ एक झलक से आने वाले पर भगवान शंकर की कृपा हो सकती है।

मंदिर को पूरी तरह से सफेद ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है, जो द्रविड़ स्थापत्य शैली में है। मंदिर के बाहर आपको उपयोगी फ्ली मार्केट दिख जाएगा, जहां से आप एक से एक गिफ्ट आइटम्स ले सकते हैं। बोहो, जंक ज्वेलरी के अलावा कलरफुल बैग्स, डेकोरेटिव आइटम्स, मसाले, चाय और हाथ के बने साबुनों से सजा यह मार्केट महिलाओं की पहली पसंद है। मैंने भी यहां से कई गिफ्ट्स खरीदे।

यह भी पढ़ें- कर्नाटक के गोकर्ण जाएं और इन बीच पर लुत्फ उठाएं


महागणपति मंदिर

प्रसिद्ध महाबलेश्वर मंदिर से कुछ मीटर की दूरी पर महागणपति मंदिर स्थित है। यह नाम के अनुसार भगवान गणेश को समर्पित है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसे भगवान गणेश के सम्मान में बनाया गया था, क्योंकि वह रावण से आत्मलिंग (शिवलिंग) ले आए थे। किंवदंती के अनुसार महाबलेश्वर जाने से पहले इस मंदिर में दर्शन के लिए ज़रूर जाना चाहिए। हमने भी ऐसा ही किया।

गोकर्ण बीच

इसके बाद हमने गोकर्ण बीच की ओर रुख किया, जो यहां से बहुत दूर नहीं है। महाबलेश्वर मंदिर के समीप होने की वजह से यह बीच हमेशा भीड़ से भरा रहता है। एक ओर पत्थर और दूसरी ओर अरेबियन-सी से सजा यह बीच अब तक पूरी तरह से कमर्शियलाइज्ड नहीं हुआ है, इसलिए शांति के शौकीन पर्यटकों के लिए यह परफेक्ट गेटवे है। यहां शांति से टहलना और समुद्र की लहरों के बीच खुद को खो देना एक कभी न भूलने वाला अनुभव हो सकता है।

यह भी पढ़ें- वीकेंड में घूमने के लिए गोकर्ण से कोई बेहतरीन जगह नहीं

कुडले बीच

शाम होते-होते हम कुडले बीच पहुंच गए, जो गोकर्ण के टॉप चार बीचेज़ में है। यह गोकर्ण और ओम बीच के बीचों-बीच स्थित है। इस एकदम साफ और खूबसूरत बीच पर कई क्यूट कैफे हैं, जहां बैठकर शाम की ठंडी हवा का आनंद लिया जा सकता है। यदि आपकी रुचि बीच ट्रैकिंग में है, तो भी यह शानदार डेस्टिनेशन है। कुछ ही देर में सूरज ढलने को बेताब था और आसमान में कई रंग बिखर गए थे।

इन पीले, लाल, संतरी, नीले, सफेद, ग्रे आदि रंगों को देखकर ऐसा महसूस हो रहा था मानो किसी चित्रकार ने रंगों से अठखेलियां की हों। आप इंटरनेट मीडिया फ्रेंडली हैं, तो यहां क्लिक की गई सूर्यास्त की तस्वीरें निस्संदेह आपको ढेरों लाइक्स और कमेंट्स दिलवा सकती हैं। यहां बैठे-बैठे रात हो आई थी और हमने सितारों से सजे आसमान के नीचे डिनर का कार्यक्रम बनाया। यहां हमने कैफे 1987 में खाना खाया, जहां का मेन्यू तो लिमिटेड था, लेकिन खाना इतना लजीज था कि हमेशा के लिए याद रह जाए।

ओम बीच

तीसरा दिन हमने शांति से घूमने और एंजॉय करने के लिए रखा था। इस दिन हम आराम से जागे और रिलैक्स होने के बाद आसपास का मार्केट घूमने निकल गए। गोकर्ण के एक रेस्तरां में जल्दी लंच किया और होटल में थोड़ा सुस्ता भी लिया। चार बजते ही हम ओम बीच के लिए निकल गए।

यह बीच अपने नाम के अनुसार ही पवित्र ओम आकार में है। यह गोकर्ण की आध्यात्मिक जगहों में से है। यहां कई स्पोर्ट्स एक्टिविटीज का लुत्फ भी उठाया जा सकता है, जिसमें स्पीड बोट, सर्फिंग, बनाना राइड शामिल हैं। कई युवा तो सिर्फ इन्हीं के लिए गोकर्ण आते हैं। ओम बीच पर हमें कई सीप भी दिखे, जिन्हें हमने जेबों में भर लिया। इन सीपों से घर डेकोरेट करने का सपना मैं पहले ही देख चुकी थी। यह भी सोच लिया था, इनमें से कुछ यादगार गिफ्ट के रूप में किन्हें देने हैं।

ओम बीच पर फेमस नमस्ते कैफे है, जहां काफी इंतजार के बाद हमने कॉफी के साथ स्नैक्स का आनंद लिया। यहां से बीच का नजारा देखने और मोबाइल फोन कैमरे से क्लिक करने लायक है। ओम बीच आप सिर्फ शाम को ही नहीं, बल्कि सूर्योदय के समय भी देखने आ सकते हैं, जिसकी योजना हमने अंतिम दिन यानी चौथे दिन के लिए बना रखी थी। प्लान के मुताबिक अगले दिन सुबह हमने ओम बीच पर सूर्योदय का नज़ारा लिया और वापस गंतव्य के लिए निकल पड़े। एक सुनहरी याद लिए मैं अपने बैग से आ रही सीपियों की आवाज से मंद-मंद मुस्कुरा रही थी।

गोकर्ण यात्रा का यह खूबसूरत अनुभव एस. रानी ने हमारे साथ साझा किया है। उन्होंने इस ट्रिप के दौरान पौराणिक मंदिरों के दर्शन से लेकर समुद्र तटों की खूबसूरती तक हर पल का भरपूर आनंद उठाया और अपनी यादगार यात्रा को शब्दों में पिरोया। अगर आपके पास भी ऐसी कोई रोचक यात्रा अनुभव, यादगार ट्रिप या घूमने-फिरने से जुड़ी कहानी है, तो उसे हमारे साथ अवश्य साझा करें। 

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: Shutterstock.com