जब बात दुर्गा पूजा की हो तो दिल्ली का चित्तरंजन पार्क (C.R. Park) का नाम ज़ुबान पर सबसे पहले आता है। ढोल-ढाक की थाप, सिंदूर की खूशबू और चारों तरफ गूंजती धुन के बीच असली मजा तब तक अधूरा है जब तक गर्मागर्म बंगाली फूड का स्वाद न चखा जाए। इस पावन अवसर पर चित्तरंजन पार्क किसी मिनी कोलकाता में बदल जाता है, जहां की गलियों से आती सरसों वाली मछली की खूशबू, आलू पोस्तो और भोगेर खिचुरी की महक हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है। अगर आप भी इस दुर्गा पूजा असली बंगाली जायके का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं चित्तरंजन पार्क की उन चुनिंदा जगहों के बारे में जहां आपको सबसे बेहतरीन बंगाली खाना मिलेगा।

दुर्गा पूजा पर जरूर ट्राई करें ये फेमस बंगाली फूड

दुर्गा पूजा का पावन पर्व सिर्फ मां दुर्गा की आराधना का ही नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति और उसके लजीज खान-पान का जश्न मनाने का भी बेहतरीन मौका है। दिल्ली में बंगाली संस्कृति का गढ़ कहे जाने वाले चित्तरंजन पार्क इन दिनों फेस्टिव वाइब देखने लायक होता है। अगर आप भी इस साल बंगाली व्यंजनों के असली स्वाद की तलाश में हैं तो इस दुर्गा पूजा जरूर जाएं चित्तरंजन पार्क।

भोगेर खिचुरी

भोगेर खिचुरी दुर्गा पूजा की सबसे जानी-पहचानी डिश में से एक है और दिल्ली में जितने भी बंगाली पंडाल लगते हैं, इसे परोसने की व्यवस्था करते हैं। भोगेर खिचुरी आमतौर पर चावल और मूंग दाल से बनाई जाती है, जिसे पकाने से पहले अक्सर भूना जाता है और मसालों तथा घी से छौंका जाता है। यह बेहद खुशबूदार होती है और उस खिचड़ी से बिल्कुल अलग होती है जिसे आप बीमार होने पर खाते हैं। इस खिचड़ी के साथ आमतौर पर लौबड़ा, बेगुनी और कभी-कभी चटनी, पापड़ और पायेश जैसी कोई मिठाई परोसी जाती है।

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शुक्तो

शुक्तो एक लोकप्रिय बंगाली मिक्स-वेजिटेबल डिश है। इसका हल्का कड़वा और पौष्टिक स्वाद इसे एक खास टेस्ट देता है, जिसे आमतौर पर तीखे खाने से पहले परोसा जाता है। इसे कई तरह की सब्जियों जैसे करेला, बैंगन, सहजन (ड्रमस्टिक), कच्चा केला और शकरकंद से बनाया जा सकता है। इन सभी सब्जियों को सरसों के तेल में तला जाता है और पांच फोरन, रांधुनी जैसे मसालों से छौंका जाता है। खसखस और सरसों के पेस्ट व नारियल के दूध के बेस में हल्की सी चीनी का मेल इसकी ग्रेवी को बेहद स्वादिष्ट और लजीज बना देता है।

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आलू पोस्तो

यह भी एक फेमस बंगाली डिश बनाने में बेहद आसान है और इसे हफ्ते के किसी भी दिन घर पर झटपट तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए, भीगे हुए खसखस (पोस्तो) को हरी मिर्च और अदरक के साथ पीसकर एक दरदरा पेस्ट तैयार किया जाता है। इसके बाद, कटी हुई आलू को कलौंजी और प्याज के तड़के में भूना जाता है। फिर कड़ाही में पोस्तो का पेस्ट, नमक, थोड़ी सी चीनी और हल्का सा पानी मिलाकर पकाया जाता है। जब यह अच्छी तरह पक जाए, तो इसे दाल और चावल के साथ गरमा-गरम परोसा जाता है।

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भेटकी माछेर पातुरी

यह बंगाली घरों में एक बेहद खास स्थान रखने वाला व्यंजन है। ताजी हिलसा मछली को भीगी हुई सरसों, हरी मिर्च और थोड़े से अदरक से बने साधारण पेस्ट से कोट किया जाता है, फिर इसे केले के पत्तों में लपेटकर धीमी आंच पर भाप में पकाया जाता है। पकने के दौरान मछली सरसों के तीखेपन और पत्तों की सोंधी खुशबू को अपने अंदर समा लेती है, जिससे एक ऐसा टेस्टी व्यंजन तैयार होता है जो वाकई लाजवाब होता है। यह उन रेसिपीज में से एक है जो यह साबित करती है कि कुछ ही मसालों से कोई यादगार चीज बनाई जा सकती है।

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लूची और कोशा मंशो

शायद ही कोई ऐसा बंगाली होगा जिसे लूची और कोशा मंशो की जोड़ी देखकर खुशी न होती हो। लूची एक छोटी फूली हुई और तली हुई पूरी होती है, जबकि कोशा मंशो मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया गया मटन है, जिसकी ग्रेवी बहुत गाढ़ी, गहरी और भरपूर स्वाद वाली होती है। यह बंगाली स्ट्रीट फूड्स में से एक है। कोशा मंशो का असली जादू इसके धीमी आंच पर पकने और मसालों के मटन से लिपटे होने में है। अगर आप क्लासिक कॉम्बिनेशन चाहते हैं, तो इसे लूची के साथ खाएं; और अगर आपको ग्रेवी के साथ खाना पसंद है, तो चावल चुनें। और यदि आप वेजिटेरियन हैं, तो चीजों के अलावा भी बंगाली खाने में बहुत कुछ है।

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दिल्ली का चित्तरंजन पार्क सिर्फ एक इलाका नहीं, बल्कि राजधानी में बसने वाला एक मिनी कोलकाता है। अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन में असली बंगाली जायके का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो सीआर पार्क के इन ऑथेंटिक फूड्स जरूर ट्राई करें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।