Dholkal Ganesh Temple Bastar: भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां के रहस्य जानकार हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसी ही एक जगह छत्तीसगढ़ के बस्तर में है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और अनोखे रहस्यों से भरी हुई है। बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला की पहाड़ियों के बीच ढोलकल गणेश मंदिर मौजूद है, जो समुद्र तल से लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भगवान गणेश ढोल के आकार की एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हैं। अगर आपको भी ऊंचाई और पहाड़ों पर जाना पसंद है, तो आपके लिए यह जगह सबसे बेस्ट हो सकती है।

3000 फीट की ऊंचाई पर स्थापित 1000 साल पुरानी प्रतिमा

घने जंगलों, घुमावदार रास्तों और शांत प्रकृति के बीच स्थित इस मंदिर के दर्शन करना एडवेंचर लवर्स, ट्रेकर्स और अध्यात्म में रुचि रखने वालों के लिए बेहद खास अनुभव है। आइए जानते हैं ढोलकल गणेश मंदिर का पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व और यहां तक पहुंचने का रास्ता।  

(image credit: pinterest/Devendra Chandrakar)

11वीं-12वीं सदी में नागवंशी राजाओं द्वारा स्थापना की गई मूर्ति

छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुरातात्विक अभिलेख के अनुसार ढोलकल में स्थापित गणेश प्रतिमा छिंदक नागवंश के राजाओं के समय 11वीं-12वीं सदी की मानी जाती है। यह गणेश मूर्ति लगभग 3 फीट ऊंची है, जिसे एक ही बड़े ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाया गया है। यहां भगवान गणेश 'ललितासन' मुद्रा में बैठे हुए हैं। प्रतिमा के चार हाथों में फरसा, टूटा हुआ दंत, मोदक और माला सजी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र के नागवंशी राजाओं ने सुरक्षा और साधना के उद्देश्य से इस प्रतिमा को पहाड़ी की चोटी पर स्थापित किया था।

परशुराम और गणेश जी के युद्ध की पौराणिक कथा

स्थानीय और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पहाड़ी पर भगवान गणेश और महर्षि परशुराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान परशुराम जी के फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दांत टूट गया था, जिसके बाद से ही वे 'एकदंत' कहलाए। कहा जाता है कि इस ऐतिहासिक घटना की याद में और भगवान गणेश के सम्मान में स्थानीय राजाओं व लोगों ने यहां यह प्रतिमा स्थापित की थी।

रोमांचक ट्रैकिंग और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य

दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के आधिकारिक NIC पोर्टल के अनुसार ढोलकल गणेश के दर्शन करने के लिए भक्तों को कठिन और रोमांचक ट्रैकिंग करनी पड़ती है। यहां तक पहुंचने के लिए दंतेवाड़ा के फरसपाल गांव से लगभग 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलना होता है। उबड़-खाबड़ रास्तों, घने जंगलों, ऊंची चट्टानों और खूबसूरत झरनों को पार करते हुए लोग पहाड़ी की चोटी तक पहुंचते हैं। शिखर पर पहुंचने के बाद बस्तर के जंगलों और पहाड़ियों का 360-डिग्री नजारा देखने लायक होता है।

(image credit: pinterest/Nitesh Tanwar)

ढोलकल गणेश मंदिर तक कैसे पहुंचें?

अगर आप भी गणेश उत्सव या किसी भी मौसम में इस खास प्रतिमा के दर्शन करना चाहते हैं, तो इन साधनों से पहुंच सकते हैं-

  • यहां जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर (RPR) है। रायपुर पहुंचकर आप जगदलपुर या दंतेवाड़ा के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं।
  • यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन दंतेवाड़ा (DWZ) और जगदलपुर (JDB) हैं। स्टेशन से आपको फरसपाल गांव के लिए लोकल बस या टैक्सी आसानी से मिल जाएगी।
  • दंतेवाड़ा से फरसपाल तक ऑटो या टैक्सी से पहुंचने के बाद आप किसी स्थानीय गाइड की मदद लेकर 5-6 किलोमीटर की पैदल ट्रैकिंग करके मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

निष्कर्ष:
प्रकृति की गोद में बसा छत्तीसगढ़ का ढोलकल गणेश मंदिर एडवेंचर लवर्स, ट्रेकर्स और आध्यात्मिक यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। अगर आप भी ट्रैकिंग के शौकीन हैं और ऐसी ऐतिहासिक व प्राकृतिक जगहों पर जाना पसंद करते हैं, तो दंतेवाड़ा के ढोलकल शिखर की यात्रा करके एक यादगार अनुभव पा सकते हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।