भारत के अलग-अलग राज्यों में खान-पान की अपनी विशेष परंपराएं हैं। कहीं मसालों की खुशबू खाने को खास बनाती है, तो कहीं साधारण सामग्री से तैयार व्यंजन लोगों का दिल जीत लेते हैं। असम का पारंपरिक व्यंजन खार भी ऐसी ही एक डिश है। इसकी खासियत यह है कि इसे बनाने में केले के छिलकों को जलाकर उससे तैयार होने वाली राख का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर जहां केले के छिलकों को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वहीं असम की रसोई में इसका उपयोग पारंपरिक खार को बनाने में किया जाता है।

असम का पारंपरिक खार क्या है ?

खार असम के सबसे खास पारंपरिक व्यंजनों में से एक है। इसकी पहचान इसमें इस्तेमाल होने वाले एक विशेष क्षारीय तरल (Acidic Liquid) से होती है, जिसे केले के सूखे छिलकों या केले के पौधे के कुछ हिस्सों की राख से तैयार किया जाता है। असमिया भाषा में केले को कोल या कोला कहा जाता है, इसलिए केले से तैयार इस व्यंजन को कोला खार भी कहते हैं।

इसका इस्तेमाल सब्जियों, दालों और दूसरी खाद्य सामग्रियों को पकाने में किया जाता है। खार की खासियत यह है कि इसमें स्वाद लाने के लिए बहुत अधिक मसालों की जरूरत नहीं होती। इसकी अपनी अलग पहचान और स्वाद होता है।

केले के छिलके से कैसे तैयार होता है खार?

खार तैयार करने की प्रक्रिया इसे दूसरे व्यंजनों से अलग बनाती है। इसे बनाने का तरीका परिवारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। कुछ जगहों पर केले के छिलकों के बजाय केले के तने या पौधे के दूसरे हिस्सों की राख का इस्तेमाल भी किया जाता है। नीचे जानें कैसे केले के छिलके से कैसे बनाई जाती है खार?

  • सबसे पहले केले के छिलकों को अच्छी तरह सुखाया जाता है।
  • इसके बाद सूखे छिलकों को जलाकर राख बनाई जाती है।
  • इस राख में पानी डालकर उसे छाना जाता है, जिससे राख के घुलनशील तत्व पानी में आ जाते हैं।
  • छानने के बाद जो तरल मिलता है, उसका इस्तेमाल खाना पकाने में किया जाता है। यही तरल खार का मुख्य बेस होता है।
  • इसके बाद अपनी मनपसंद सब्जी का उपयोग किया जाता है।

कच्चे पपीते का खार है लोकप्रिय

असम में खार की कई किस्में बनाई जाती हैं, लेकिन कच्चे पपीते से तैयार होने वाला खार काफी लोकप्रिय है। इसे असमिया में ओमिता खार कहा जाता है। इसे बनाने के लिए कच्चे पपीते को छोटे टुकड़ों में काटकर खार के तरल के साथ पकाया जाता है। जरूरत के अनुसार नमक, हरी मिर्च और थोड़े तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। कुछ घरों में इसमें दाल या दूसरी सब्जियां भी मिलाई जाती हैं। इसके अलावा, अलग-अलग जगहों पर पत्तेदार सब्जियों, दालों और मछली के साथ भी खार बनाया जाता है।

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खार का स्वाद दूसरे व्यंजनों से कितना अलग होता है?

खार का स्वाद सामान्य भारतीय सब्जियों या करी से अलग होता है। इसमें मिर्च, गरम मसाले और खट्टे पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल जरूरी नहीं है। इसका स्वाद हल्का मिट्टी जैसा, मिनरल्स की विशेषता लिए हुए और कुछ हद तक क्षारीय होता है। पहली बार इसे खाने वाले व्यक्ति को इसका स्वाद थोड़ा अलग लग सकता है, लेकिन असम में यह कई लोगों के रोजमर्रा के खानपान और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है। खार में इस्तेमाल होने वाला क्षारीय तरल केवल स्वाद ही नहीं बदलता, बल्कि पकने के दौरान सब्जियों की बनावट पर भी असर डालता है। सही मात्रा में इसका इस्तेमाल करने से कुछ सब्जियां नरम हो सकती हैं।

असमिया भोजन में खार सबसे पहले क्यों परोसा जाता है?

असमिया खानपान की एक खास परंपरा यह है कि पारंपरिक भोजन में खार को अक्सर शुरुआत में परोसा जाता है। इसके बाद चावल, दाल, सब्जियां, मछली या अन्य व्यंजन खाए जाते हैं। यह भोजन की एक ऐसी शैली है जिसमें हर व्यंजन को एक खास स्थान दिया जाता है। खार का इस्तेमाल भोजन की शुरुआत में करना असमिया खानपान की पहचान माना जाता है।

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खार और असम की सांस्कृतिक पहचान का रिश्ता

खार असम के लोगों के लिए केवल खाने की एक चीज नहीं बल्कि उनकी खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा है। असम की पारंपरिक रसोई में स्थानीय सब्जियों, चावल, मछली और मौसम के अनुसार मिलने वाली सामग्री का खास महत्व है। खार भी इसी सोच से जुड़ा है, जहां कम सामग्री में स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जाता है। असमिया समाज में खार का महत्व इतना गहरा है कि खार खुवा असमिया यानी खार खाने वाले असमिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी मिलता है। इससे आप सोच सकती हैं कि यह व्यंजन स्थानीय लोगों की पहचान और खानपान की परंपरा से कितना जुड़ा हुआ है।

असम का खार से पता चलता है कि हमें किसी रेसिपी या व्यंजन को बनाने के लिए महंगे मसाले या कठिन विधि की जरूरत नहीं होती है। असमिया भोजन में खार भारतीय खानपान की अनूठी पहचान बनाते हैं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Traditional Assam Food Recipes and Assam Tourism Culinary Treasures of Assam से इस लेख में दी गई जानकारी ली गई है। इसके अलावा इस डिश का पारंपरिक डिश की पुष्टि मैंने असम की स्थानीय निवासी हंसिका द्वारा भी की है।

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