फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना एक्ट्रेस नुसरत भरूचा के लिए जितना नया अनुभव था, उतना ही हैरान करने वाला उनके परिवार के लिए भी था। वह बताती हैं कि जब उन्होंने फिल्मों में आने की इच्छा जाहिर की, तो उनके माता-पिता काफी आश्चर्यचकित हो गए थे। उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि बिना किसी अभिनय अनुभव के फिल्मों में अवसर कैसे मिलेंगे। परिवार को यह समझना मुश्किल लग रहा था कि अचानक अभिनय की दुनिया में करियर बनाने का विचार कैसे आया।
हालांकि, धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलीं और उन्हें पहली फिल्म का मौका मिल गया। उस समय न तो उन्हें खुद यह स्पष्ट था कि वे अभिनय को अपना स्थायी करियर बनाएंगी और न ही परिवार को इस बात का अंदाजा था। लेकिन समय के साथ सब कुछ अपने आप तय होता चला गया। आज उनके माता-पिता भी उनके काम से खुश हैं और उन्हें गर्व महसूस होता है। वह मानती हैं कि अभिनय की दुनिया में आने के पीछे उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी गट फीलिंग थी। उन्होंने कभी किसी एक्टिंग स्कूल या क्लास में प्रशिक्षण नहीं लिया। फिल्मों और अभिनय की प्रक्रिया ने उन्हें हमेशा आकर्षित किया और जो कुछ सीखा, वह काम करते-करते और अनुभवों से ही सीखा।
अपने सफर से हैं पूरी तरह संतुष्ट
जब उनसे उनकी फिल्मी यात्रा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे अपने अब तक के सफर से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके अनुसार, करियर में मिलने वाली चुनौतियों और परेशानियों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है। वह हर अनुभव को सीखने का अवसर मानती हैं और अच्छे-बुरे दोनों तरह के पलों को समान रूप से स्वीकार करती हैं।
उनका मानना है कि अभिनय केवल कैमरे के सामने खड़े होकर संवाद बोलने का नाम नहीं है, बल्कि यह लगातार सीखने और खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। काम के दौरान मिले अनुभवों ने ही उन्हें प्रशिक्षित किया है और यही उनकी असली एक्टिंग ट्रेनिंग रही है।
यह भी पढ़ें- ऑफिस में है न्यू ईयर पार्टी तो बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरुचा की तरह खुद को करें स्टाइल
हर किरदार अपने आप में होता है चुनौतीपूर्ण
अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार के बारे में बात करते हुए वह किसी एक भूमिका का नाम नहीं लेतीं। उनका कहना है कि हर किरदार अपने आप में अलग और चुनौतीपूर्ण होता है। चाहे भूमिका छोटी हो या बड़ी, उसे पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से निभाने के लिए मेहनत करनी ही पड़ती है।
वह मानती हैं कि कई बार जो किरदार दर्शकों को बेहद आसान दिखाई देते हैं, उनके पीछे भी कलाकार की काफी मेहनत छिपी होती है। खासतौर पर कॉमेडी और भावनात्मक दृश्यों को निभाना उतना आसान नहीं होता, जितना बाहर से लगता है। किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी सफलता तब होती है, जब दर्शक उसके किरदार से जुड़ाव महसूस करें। उनके अनुसार, अगर ऑडियंस किसी भूमिका को पसंद कर ले, तो समझिए मेहनत सफल हो गई।
खाली समय में करना पसंद है ये काम
व्यस्त शूटिंग शेड्यूल के कारण उन्हें पिछले कई महीनों से खुद के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाया है। हालांकि, जब भी थोड़ा खाली समय मिलता है, तो वह उसे पूरी तरह अपने तरीके से बिताना पसंद करती हैं।
यह भी पढ़ें- नुसरत भरूचा की इन स्कर्ट्स को आप भी कर सकती हैं अपने वार्डरोब में शामिल
उन्हें फिल्में और वेब सीरीज देखना काफी पसंद है। इसके अलावा वह नई स्क्रिप्ट्स पढ़ती हैं और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि जिंदगी के हर पल को खुलकर जीना और छोटी-छोटी खुशियों का आनंद लेना बेहद जरूरी है। यही चीजें उन्हें मानसिक रूप से तरोताजा रखती हैं और नए उत्साह के साथ काम करने की ऊर्जा देती हैं।
इंटरव्यू : गीतांजलि
