Sat Sep 12, 2026 | Updated 02:59 AM IST

मां, बीवी और अब उससे कहीं आगे... बॉलीवुड फिल्मों में कैसे बदली फीमेल लीड की तस्वीर?

फिल्मी परदे पर फीमेल लीड की तस्वीर अब काफी हद तक बदल गई है। जहां एक वक्त पर सिर्फ उन्हें रोती हुई महिला, बेचारी और त्याग की मूर्ति के तौर पर दिखाया जाता था, वहीं अब वो सशक्त किरदारों में उभरकर आई हैं।
Updated:- 2026-07-30, 23:34 IST
female lead roles in Bollywood

बॉलीवुड 100 सालों से भी ज्यादा का सफर तय कर चुका है। इस सफर के साथ हिंदी फिल्मों में बहुत कुछ बदला और साथ ही बदली हिंदी फिल्मों में हीरोइनों की भूमिका और एक्ट्रेसेस को देखने का नजरिया भी। एक समय तक बॉलीवुड फिल्मों की कहानियां भी सिर्फ फीमेल लीड के इर्द-गिर्द नहीं लिखी जाती थीं। हीरोइन को मुख्य कहानी का हिस्सा कम और हीरो की कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया ज्यादा दिखाया जाता था। अक्सर किसी भी फिल्म में हीरोइन की पहचान बस पत्नी, मां, बहन या हीरो की प्रेमिका के तौर पर होती थी, लेकिन वक्त के साथ ये तस्वीर तेजी से बदली है। आज बॉलीवुड हीरोइनों को त्याग की प्रतिमूर्ति या बेबस और लाचार महिला के तौर पर नहीं, बल्कि एक सशक्त किरदार के तौर पर दिखाया जाता है, जिसकी खुद की पहचान है और जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी आगे बढ़ रही है। चलिए देखते हैं कि पिछले कुछ दशकों में यह तस्वीर कैसे बदली?

सिर्फ गानों और लव स्टोरी तक सीमित था हीरोइन का काम

एक वक्त तक बॉलीवुड फिल्मों में हीरोइन का काम और उनका रोल सिर्फ गानों और लव स्टोरी तक ही सीमित था। 1950 से लेकर 1980 के दशक तक कई फिल्मों में महिला किरदार मजबूत दिखाए गए थे, लेकिन वो परिवार से जुड़े हुए ही होते थे। वो किरदार इस तरह नहीं गढ़े जाते थे कि पूरी फिल्म उनके कंधों पर आगे बढ़ सके। मदर इंडिया' की राधा के किरदार ने बेशक काफी कुछ बदला। हालांकि, वो किरदार आज की फेमिनिज्म की परिभाषा से अलग हो सकता है, पर उस वक्त वो उसे काफी मजबूत किरदार के तौर पर देखा गया था। हालांकि, एक फिल्म की कहानी ज्यादा कुछ नहीं बदल सकती थी। ऐसे में ज्यादातर फिल्मों में नायिका का किरदार प्रेम, त्याग और परिवार तक सीमित रहता था।

mother india movie

ग्लैमर बढ़ा पर आजादी नहीं मिली

70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे सितारे लीड रोल में हावी रहे और उस समय पर भी हीरोइंस का स्क्रीन टाइम आमतौर पर सिर्फ रोमांटिक सीन तक ही सिमटकर रह जाता था। बात अगर 90 के दशक की करें, तो माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी, जूही चावला, करिश्मा कपूर और काजोल जैसी अभिनेत्रियों ने स्टारडम हासिल तो किया, लेकिन फिर भी फिल्मों में उनका किरदार प्रेमिका या पत्नी के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। परदे पर शाहरुख, सलमान और आमिर की चर्चा होती थी, पर हीरोइन को अभी भी अलग पहचान नहीं मिल पाई थी। हालांकि, इस दौर में 'दामिनी' जैसी फिल्म भी आई, लेकिन अभी भी काफी कुछ बदलना बाकी था।

DDLJ srk kajol romantic movie

यह भी पढ़ें- कोकिलाबेन से लेकर अनुपमा तक, चलिए आपको मिलवाते हैं टीवी सीरियल्स की स्टीरियोटाइप 'मां' से

मजबूत महिला किरदार अब आने लगे हैं नजर

नई सदी के साथ बॉलीवुड में महिला किरदारों को लेकर सोच बदलनी शुरू हुई। अब हीरोइन के दम पर भी फिल्म हिट होती है। 'क्वीन' में रानी (कंगना रनौत) अकेले दुनिया घूमने निकल जाती है, तो 'राजी' में पूरी कहानी ही एक महिला जासूस (आलिया भट्ट) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। 'गंगूबाई काठियावाड़ी' भी आलिया का किरदार काफी दमदार है। वहीं 'मिमी' में कृति एक सशक्त मां के रूप में नजर आई हैं। 'थप्पड़' में तापसी आत्म सम्मान के लिए लड़ती हैं, तो 'मिसेज' में सान्या मल्होत्रा पितृसत्ता की बेड़ियां तोड़कर आजाद हो जाती हैं। ये फिल्में साबित करती हैं कि काफी कुछ बदल चुका है। यह सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी महिलाओं की भूमिका में आने वाले बदलाव को दिखाता है।

raazi movie alia bhatt

 

यह भी पढ़ें- Mother's Day Special: जया बच्चन से लेकर रीमा लागू तक, फिल्मी दुनिया में 'मां' बनकर छा गईं ये एक्ट्रेसेस; आज भी दी जाती है इनकी मिसाल


अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।

 

 

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।