आज के समय में अनचाहे बालों को हटाने के लिए रेजर, वैक्स, ट्रिमर और हेयर रिमूवल क्रीम जैसे न जाने कितने आधुनिक तरीके आ गए हैं। आज भले ही पार्लर जाना आम बात है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि जब ये आधुनिक चीजें नहीं थीं, तब महिलाएं अपने शरीर के बाल कैसे साफ करती थीं? नीचे लेख में जानें इतिहास-

महिलाओं ने शेविंग करना कब शुरू किया?

मध्यकाल से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक महिलाओं के कपड़े बेहद ढके हुए होते थे, इसलिए शेविंग का कोई खास चलन नहीं था। वहीं साल 1930 के दशक में कपड़ों की लंबाई में थोड़ी कमी आने के बावजूद, महिलाओं का फैशन लगातार अधिक से अधिक खुला होता गया, जिससे शेव किए जाने की शुरुआत हुई।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नायलॉन की कमी के बाद महिलाओं ने अपने पैरों को शेव करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे महिलाओं में शेविंग आम होती गई, कंपनियों ने इस पर ध्यान दिया और इस तरह छोटे गुलाबी रेजर का जन्म हुआ।

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पहले की महिलाएं शरीर के बाल कैसे हटाती थी?

पहले के समय मधुमक्खी की वैक्स, चीनी के लेप और सीपियों से बने ट्ववीजर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा रोमन साम्राज्य और ग्रीस की महिलाएं पत्थर और एक खास तरह की क्रीम का इस्तेमाल करती थीं। हालांकि, ये अमीर और उच्च वर्ग की महिलाएं करती थीं।

शरीर पर इतने सारे बाल क्यों हैं?

सबसे पहले इस तथ्य पर जोर देना जरूरी है कि शरीर पर बाल होना पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसमें कुछ भी गंदा नहीं है। ज्यादातर वयस्कों के शरीर पर लगभग 50 लाख बाल होते हैं। शरीर के लगभग हर हिस्से को ढकने वाले बाल त्वचा की संवेदी क्षमताओं और पसीने के जरिए तापमान को नियंत्रित करने की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं।

पहली बार कब बनी थी हेयर रिमूवल क्रीम?

आज मार्केट में हेयर रिमूवल क्रीम की डिमांड बढ़ गई है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि पहली यह कब बनी थी? बता दें कि साल 1844 में पहली हेयर रिमूवल क्रीम का आविष्कार किया था। इसे पौड्रे सबटाइल कहा जाता था। तब से महिलाएं इस तरह की क्रीम का इस्तेमाल करती आ रही हैं।

इसके कुछ समय बाद, 1880 में पुरुषों के लिए पहला आधुनिक रेजर बना। उस समय पुरुष शेव करने के लिए ब्लेड का इस्तेमाल कर रहे थे। हालांकि, महिलाओं के रेजर बाजार में आने में तीन दशक और लग गए, फिर भी महिलाएं अक्सर शरीर के बाल हटाने के लिए पुरुषों के रेजर का इस्तेमाल करती थीं।

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इतिहास के अलग-अलग दौर में सौंदर्य और स्वच्छता के मानक बदलते रहे हैं। इसलिए, शेविंग करने या न करने का निर्णय किसी सामाजिक दबाव के बजाय केवल आपकी सुविधा और पसंद पर आधारित होना चाहिए। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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