पुरुषों से ज्यादा महंगे क्यों होते हैं महिलाओं के सामान? समझिए इस पिंक टैक्स का पूरा गणित

शॉपिंग तो हम सभी करते हैं। आप चाहें अपने लिए खरीदारी कर रही हों या पति, बेटे और भाई के लिए ही क्यों न शॉपिंग करती हों, एक चीज आपने नोटिस जरूर की होगी कि एक ही कंपनी का रेजर, परफ्यूम, शैंपू या डियोडोरेंट महिलाओं का ज्यादा महंगा मिलता है जबकि पुरुषों के सामानों की कीमत कम होती है। इतना ही नहीं, सैलून में हेयरकट, कुछ कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग और कई दूसरी फैसिलिटीज के लिए भी महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
इसे ही पिंक टैक्स कहा जाता है। नाम में टैक्स जरूर है, लेकिन यह गवर्नमेंट नहीं लेती है। दरअसल, यह एक तरह का एक्स्ट्रा खर्च है, जो महिलाओं के लिए बनाए गए सामान और सेवाओं की कीमत से जुड़ जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर पिंक टैक्स क्या है और इसका असर महिलाओं की जेब पर कैसे पड़ता है?
क्या है पिंक टैक्स?
सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह बाजार में अपनाई जाने वाली ऐसी प्राइसिंग है, जिसमें महिलाओं के लिए बनाए गए सामान या सेवाओं की कीमत पुरुषों के सामानों से थोड़ी ज्यादा रखी जाती है। यानी अगर दो प्रोडक्ट एक जैसा काम करते हैं, लेकिन उनमें से एक पर For Women लिखा है या उसकी पैकेजिंग अलग है, तो उसकी कीमत कई बार ज्यादा हो सकती है।
यह भी पढ़ें- Cheap Shopping: सस्ते में करना चाहती हैं खरीदारी तो कानपुर की गोविंद नगर मार्केट को जरूर करें एक्सप्लोर
-1784871429118.jpg)
एक आसान एग्जांपल से समझिए
मान लीजिए आप और आपका कोई मेल फ्रेंड एक ही कंपनी का फुटवियर खरीदते हैं। उसका फुटवियर 700 का होगा, जबकि आपका 1000 रुपये का मिल रहा है। दोनों के ब्रांड एक जैसे ही है। सब फर्क सिर्फ रंग, पैकेजिंग या मार्केटिंग का है। यही एक्स्ट्रा कीमत पिंक टैक्स का सबसे आसान एग्जांपल है।
यह भी पढ़ें- Kanpur Market: कानपुर की '40 दुकान' मार्केट है फेमस, जानें क्या मिलता है यहां औरतों के लिए खास
किन-किन चीजों में दिखता है पिंक टैक्स?
आपको बता दें कि पिंक टैक्स सिर्फ फुटवियर के ऊपर ही नहीं लगाया जाता है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई चीजों में आपको पिंक टैक्स देना पड़ता है। जैसे-
- रेजर, शैंपू, साबुन और डियोडोरेंट
- लिपस्टिक, नेल पेंट और दूसरे ब्यूटी प्रोडक्ट
- कुछ तरह के कपड़े और एसेसरीज
- सैलून में हेयरकट और दूसरी सर्विस
- कुछ जगहों पर ड्राई क्लीनिंग की कीमत
- लड़कियों के लिए बनाए गए कुछ टॉयज और साइकिल
कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?
ऐसा कहा जाता है कि महिलाओं के प्रोडक्ट में अलग डिजाइन, खुशबू, पैकेजिंग या फिनिशिंग होती है। यही वजह है कि इनका रेट हाई होता है, लेकिन सच तो यह है कि ज्यादातर मामलों में फर्क सिर्फ मार्केटिंग का होता है। पैकेजिंग को अट्रैक्टिव दिखाना और टीवी-अखबारों में विज्ञापन दिखाकर महिलाओं के मन में यह बात बैठा दी जाती है कि उनके लिए अलग से सामान बनना कितना जरूरी है। इसी चक्कर में महिलाएं बिना किसी दूसरे सामान से तुलना किए, खुशी-खुशी ज्यादा पैसे दे देती हैं।
फैशन और ब्यूटी में भी बढ़ जाता है खर्च
ये तो आपने देखा ही होगा कि महिलाओं के कपड़े, फुटवियर और फैशन से जुड़ी कोई भी चीज हो, तो वह पुरुषों के मुकाबले महंगी होती हैं। ऐसे समझें कि कई महिलाओं की जींस की जेब इतनी छोटी होती है कि उसमें मोबाइल तक ठीक से नहीं आता है। जबकि पुरुषों की जेब बड़ी होती है। ऐसे में आपको अलग से हैंडबैग खरीदना पड़ता है, जो कि एक आपका एक्स्ट्रा खर्च है। इसी तरह स्किन केयर, फेशियल, लेजर हेयर रिमूवल और दूसरे ब्यूटी ट्रीटमेंट भी लगातार खर्च बढ़ते रहते हैं।
तो अब तो आप जान ही गई होंगी कि पिंक टैक्स कोई लीगल टैक्स नहीं है, बल्कि बाजार में दिखाई देने वाला एक एक्स्ट्रा खर्च है, जिसे महिलाओं को बिना जाने हर दिन चुकाना पड़ता है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Source-
https://jmra.in/archive/volume/12/issue/3/article/24621/pdf
https://www.ebsco.com/research-starters/womens-studies-and-feminism/pink-tax
Image Credit- Freepik
- पिंक टैक्स क्या होता है?
- महिलाओं के प्रोडक्ट्स पर एक्सट्रा टैक्स।
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।