भारत में ओटीटी से क्यों हटाई गई दिलजीत दोसांझ की Satluj? जानें क्या है पूरा विवाद

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी। इस फिल्म को शानदार रिव्यूज मिल रहे थे ओर दो दिन के अंदर ही यह ओटीटी और सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी थी। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म को खूब पॉपुलरिटी मिल रही थी और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि यह फिल्म आपको रोंगटे खड़े कर सकती है, लेकिन 48 घंटों में ही इस फिल्म को ओटीटी से हटा लिया गया है। कल रात ZEE5 ने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी करके इस बात की जानकारी दी। इसके बाद से यह फिल्म एक बार फिर विवादों में है। इसे ओटीटी से हटाए जाने के बाद इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है। दिलजीत दोसांझ ने भी इस पर बेबाक तरीके से रिएक्शन दिया। साथ ही कई सेलेब्स ने इसे गलत बताया। चलिए आपको बताते हैं कि इस फिल्म से जुड़ा पूरा विवाद क्या है और क्यों इसे ओटीटी से हटा लिया गया?
भारत में OTT से क्यों हटाई गई सतलुज?
जी5 की तरफ से जारी किए गए ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा गया कि फिल्म को मिले शानदार रिस्पॉन्स के लिए वो आभार जताते हैं, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इसे ओटीटी से हटाने का फैसला लिया गया है। हालांकि, फिल्म को ओटीटी से हटाने की असली वजह नहीं बताई गई है और न ही सेंसर बोर्ड विवाद से जुड़ी किसी बात का जिक्र किया गया है।
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बता दें कि इस फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है। इस फिल्म में तीन साल पहले सेंसर बोर्ड द्वारा 127 सीन में कट लगाने की बात कही गई थी। यहां तक कि जसवंत सिंह खालरा का नाम तक हटा देने के लिए कहा गया था। इस फिल्म का पहले नाम पंजाब 95 रखा गया था। यह फिल्म 80-90 के दशक में पंजाब में लोगों के गायब होने और हजारों लोगों के शवों का कथित तौर पर गैर-कानूनी रूप से अंतिम संस्कार करने के मामले पर बनी है। माना जा रहा है कि राजनीतिक तौर पर यह एक संवेदनशील मुद्दा रहा है और कहीं न कहीं पंजाब के इतिहास का यह काला चैप्टर उस दौर के पॉलिटिकल सिस्टम के खोखलेपन की पोल खोलता है, इसी वजह से इस फिल्म को हटा लिया गया है।
दिलजीत दोसांझ ने फिल्म के हटाए जाने पर कही यह बात
दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करके कहा कि उन्हें आइडिया था कि ऐसा हो जाएगा, इसलिए वो हैरान नहीं हैं। हालांकि, उन्हें लगा था कि जब सोमवार को ऑफिस वगरैह खुलेंगे तो ऐसा किया जाएगा, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि रविवार शाम को ही इसे हटा दिया जाएगा।
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उन्होंने यह भी बताया कि इसी वजह से वो लोग फिल्म का प्रमोशन नहीं कर पाए थे। दिलजीत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि फिल्म घर-घर तक पहुंच गई है, लोग इसे देख रहे हैं और खासकर खालरा साहब की कहानी को यूथ जान रहा है और समझ रहा है। लोगों ने फिल्म डाउनलोड कर ली है और इसे रोकना मुमकिन नहीं है।
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