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रंग-बिरंगी दुनिया में Tissue Papers हमेशा सफेद ही क्यों होते हैं? जानें यहां

टिशू पेपर हमेशा सफेद क्यों होते हैं, इसका कारण सेल्यूलोज फाइबर, ब्लीचिंग प्रक्रिया और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। 
Updated:- 2026-06-29, 14:12 IST
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जब भी बाथरूम की सबसे जरूरी चीजों की बात आती है तो उनमें से एक है टिशू पेपर। इसका इस्तेमाल ज्यादातर साफ सफाई के दौरान या पानी सोखने के लिए किया जाता है, लेकिन हम शायद ही कभी टिशू पेपर के रंग पर ध्यान देते हैं। जी हां, ये हमेशा सादे सफेद रंग के होते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की असली वजह क्या है? ऐसे में इस प्रश्न के उत्तर के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। हम आपको बताएंगे कि टिशू पेपर क्यों सफेद रंग के होते हैं?। पढ़ते हैं आगे...

सेल्यूलोज फाइबर है वजह

टिशू पेपर बनाने के लिए पेड़ों से मिलने वाले सेल्यूलोज फाइबर या रीसायकल किए गए कागजों का इस्तेमाल किया जाता है। जब इन फाइबर्स को पानी के साथ मिलाया जाता है, तो एक पल्प बनता है। सेल्यूलोज फाइबर नेचुरली सफेद रंग का होता है, लेकिन इन्हें आपस में जोड़ने वाला गोंद भूरे रंग का होता है। 

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मैन्युफैक्चरिंग के दौरान इस भूरे रंग को हटाने और पेपर को ज्यादा चमकदार बनाने के लिए हाइड्रोजन पेरोक्साइड या क्लोरीन से ब्लीच किया जाता है। खास बात यह है कि जो टिशू रीसायकल पेपर से बनते हैं, उनमें भी ऑफिस के सफेद कागजों का इस्तेमाल होता है, जिससे उनका रंग सफेद बना रहता है।

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ब्लीचिंग भी होता है यूज

कई लोगों को लगता है कि टिशू पेपर को सिर्फ अच्छा दिखाने के लिए सफेद किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। ब्लीचिंग का प्रोसेस टिशू पेपर को इस्तेमाल के लायक बनाता है। जब लकड़ी की लुगदी को ब्लीच किया जाता है तो उसमें मौजूद लिग्निन नाम का कड़क तत्व पूरी तरह बाहर निकल जाता है। लिग्निन के हटते ही कागज मुलायम और सोखने वाले हो जाते हैं यानी ब्लीचिंग सिर्फ रंग बदलने के लिए नहीं, बल्कि टिशू को सॉफ्ट बनाने के लिए जरूरी है।

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रंगीन टिशू न बनाने के पीछे बजट है जिम्मेदार

बता दें कि टिशू पेपर को रंग-बिरंगा न बनाने के पीछे कंपनियों का बजट एक कारण है। अगर कंपनियां रंगीन टिशू बनाएंगी, तो उन्हें अलग से डाई करना पड़ेगा, जिससे इसकी कीमत बहुत बढ़ जाएगी। इसके अलावा, सफेद टिशू पेपर पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और रंगीन टिशू के मुकाबले बहुत जल्दी गल सकते हैं।

सेहत के लिए भी जरूरी

रंगीन या प्रिंटेड टिशू में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और डाई से त्वचा में इंफेक्शन और सेहत को परेशानी हो सकती है, इसलिए सफेद टिशू ही सबसे सेफ और बेस्ट चॉइस है।

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Images: magnific

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