आखिर आज भी क्यों अधूरी हैं जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियां, क्या है इसका रहस्य?

हमारा देश विभिन्न मंदिरों और धर्मों का मुख्य स्थान है और यहां न जाने कितने छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं। हर एक मंदिर अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित है , इनमें से कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जो अपने विचित्र रहस्यों की वजह से प्रचलित हैं। इन मंदिरों की एक अलग कहानी है और अपना एक अलग ओतिहास। इन्हीं में से एक मंदिर है पूरी का जगन्नाथ मंदिर, जो समय के साथ बहुत लोकप्रिय हो गया है। ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं और इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया है। इस मंदिर से जुड़ी जगन्नाथ यात्रा जितनी प्रसिद्द है उतनी ही इसमें मौजूद मूर्तियों की अनोखी आकृति भी है। इस मंदिर के भीतर जगन्नाथ जी के साथ बलभद्र और सुभद्रा जी की मूर्ति भी मौजूद है। इन मूर्तियों की खासियत यह है कि ये सभी मूर्तियां अधूरी हैं। मंदिर की सभी मूर्तियों को नीम की लकड़ी से तराशा गया है और एक रत्नों से जड़े चबूतरे पर स्थापित किया गया है। आइए आपको बताते हैं मंदिर की अधूरी मूर्तियों के रहस्य के बारे में कुछ बातें।
जगन्नाथ मंदिर की अधूरी मूर्तियों के पीछे की कहानी
जगन्नाथ मंदिर की अधूरी मूर्तियों के लिए ऐसा कहा जाता है कि भगवान के परम भक्त राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान का आशीर्वाद मिलने और सपनों में नील माधव को खोजने के निर्देश मिलने के बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर बनने के बाद, राजा ने बनाने के लिए सही कच्चा माल खोजना शुरू किया। भगवान ने फिर से उनके सपने में आकर बताया कि उन्हें नदी के किनारे सुनहरे रंग की लकड़ी का एक लट्ठा मिलेगा जो बिल्कुल सही होगा। उनके निर्देशानुसार, राजा ने वह लट्ठा मंगवा लिया, लेकिन उन्हें मूर्तियां तराशने के लिए कोई सही मूर्तिकार नहीं मिला।

अगले दिन, देवताओं के वास्तुकार विश्वकर्मा राजा के सामने प्रकट हुए और तीन हफ़्ते में मूर्तियां बनाने के लिए तैयार हो गए। हालांकि, उनकी एक शर्त थी कि उन्हें अपने लिए एक कमरा चाहिए और मूर्तियों के निर्माण के समय उन्हें कोई परेशान न करे। राजा मान गए और बूढ़ा आदमी मूर्तियों को बनाने के काम में लग गया। शुरू में, जिस कमरे में बूढ़ा आदमी काम कर रहा था, वहां से काफ़ी आवाजें आ रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, कमरे के अंदर से कोई हलचल सुनाई नहीं दी और कमरे के बाहर रखा खाना भी वैसा ही पड़ा रहा।
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रानी को इस बात की चिंता हुई और उसने राजा से बूढ़े आदमी का हाल जानने के लिए कहा। राजा ने रानी को मना किया क्योंकि वह मूर्तिकार से किए गए वादे से पीछे नहीं हटना चाहता था। कुछ ही समय के बाद राजा को भी मूर्तिकार की चिंता हुई और उसने रानी की बात मानकर कमरे का दरवाजा खोल दिया। राजा उस कमरे का दृश्य देखकर हैरान हो गया कमरे में सिर्फ़ भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की तीन अधूरी मूर्तियां थीं। उन सभी मूर्तियों में न तो हाथ-पैर थे और न ही आंखें।
ऐसी मान्यता है कि राजा ने कमरे का दरवाजा खोल दिया जिससे मूर्तियां पूरी नहीं बन पाईं। उस रात, भगवान उसके सामने प्रकट हुए और उससे कहा कि वह उन अधूरी मूर्तियों को मंदिर में स्थापित करे। आज भी मंदिर में अधूरी मूर्तियों की ही पूजा होती है।
इसी कथा की वजह से आज भी जगन्नाथ मंदिर में अधूरी मूर्तियों की पूजा का विधान है और मूर्तियों के हाथ-पैर और पंजे नहीं बने हुए हैं। है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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