Fri Sep 11, 2026 | Updated 07:38 PM IST

रथ यात्रा से पहले 15 दिन के लिए क्यों बंद होता है जगन्नाथ मंदिर? टेंपल से जुड़े 5 रहस्य जो कर सकते हैं हैरान

जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा अपने आप में खास मानी जाती है। यह यात्रा इस साल 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान पूरी में भक्तों का जमावड़ा लगता है। जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं जिनके आगे विज्ञान भी हार मान चुका है। इनमें से एक है मंदिर का 15 दिनों तक बंद होना। आइए जानें मंदिर से जुड़े कई रहस्य।
Updated:- 2026-06-10, 16:32 IST
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पुरी का मशहूर जगन्नाथ मंदिर भक्तों के लिए बीच अत्यंत खास है। यह भारत के चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक है और अपनी रथ यात्रा के लिए न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्द है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी रथ यात्रा के लिए तो हमेशा से चर्चा में रहता ही है और इसकी कई ऐसी ख़ास बातें भी हैं जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। इस मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा यह भी है कि जब पांडवों ने यमराज के पास जाने की अपनी यात्रा शुरू की, तो सप्त ऋषियों ने उन्हें 'मोक्ष' पाने के लिए 'चार धाम' की यात्रा करने की सलाह दी थी। पुरी का जगन्नाथ मंदिर 'चार धाम' के पवित्र स्थलों में से एक है। उसी समय से रथ यात्रा का आरंभ हुआ। मंदिर के ध्वजा से लेकर सीढ़ियों तक ऐसे कई रहस्य हैं जो इसे खास बनाते हैं। आइए जानें जगन्नाथ मंदिर से जुड़े उन सभी रहस्यों के बारे में।

रथ यात्रा से पहले 15 दिनों तक क्यों बंद रहता मंदिर

रथ यात्रा से 15 दिन पहले पूर्णिमा तिथि के दिन मंदिर के सेवक एक खास पवित्र कुएं से 108 घड़ों में पवित्र जल लाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, सेवक अपने मुंह को कपड़े से ढक लेते हैं जिससे उनकी सांस से पानी दूषित न हो जाए। उसके बाद इस पवित्र जल में हल्दी, चंदन, फूल, इत्र और अन्य चीजें मिलाई जाती हैं। वैदिक मंत्रों, शंख की ध्वनि और कीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जाता है। इस परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35 घड़ों से जल चढ़ाया जाता है।

temple mystery

बलभद्र को 33, माता सुभद्रा को 22 और सुदर्शन को 18 घड़ों से स्नान कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस भव्य स्नान के बाद जगन्नाथ भगवान को बुखार आ जाता है और भगवान 15 दिनों के लिए बाहर नहीं निकलते हैं। यही नहीं इसी वजह से जगन्नाथ मंदिर के कपाट बंद करने पड़ते हैं और दर्शन पर पाबंदी लगा दी जाती है। 15 दिनों की इस अवधि को 'अनसर' कहा जाता है, जो साल 2026 में 30 जून से शुरू होकर 14 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को मंदिर पुनः खुलेगा और 16 जुलाई से रथ यात्रा आरंभ हो जाएगी।

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मंदिर की तीसरी सीढ़ी में यम का वास

जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के लिए 22 सीढ़ियां सबसे खास मानी जाती हैं और इन्हें बैसी पहाचा कहा जाता है। ये सिर्फ सीढ़ियां नहीं हैं बल्कि मानव जीवन की 22 कमियों को भी दिखाती हैं। यही नहीं ऐसा माना जाता है कि जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी में यम का वास होता है। इसी वजह से आप जब भी इस मंदिर में जाएं इसकी तीसरी सीढ़ी पर पैर न रखें।

हवा की विपरीत दिशा में लहराता है मंदिर का ध्वज

मंदिर के ऊपर लगा झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशा में लहराता है। उल्टी दिशा में लहराता यह झंडा वैज्ञानिक सोच से भी परे है और विज्ञान भी इस रहस्य को सिद्ध नहीं कर पाया है। यह दृश्य वास्तव में आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि विज्ञान से भी पड़े कोई शक्ति मौजूद है।

jagannath temple dhwaja

मंदिर के शिखर पर लगा चक्र क्यों है खास

जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक चक्र लगा है। यह चक्र असल 20 फ़ीट ऊंचा है और इसका वजन एक टन है। इसे मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर लगाया गया है, लेकिन इस चक्र की दिलचस्प बात यह है कि इसे पुरी शहर के किसी भी कोने से देखा जा सकता है। इसे लगाने और इसकी स्थिति तय करने का विज्ञान आज भी एक रहस्य है।

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रोज बदला जाता है मंदिर का ध्वज

जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक परंपरा यह भी है कि हर दिन एक पुजारी मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर चढ़कर झंडा बदलते हैं। यह मंदिर 45 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है। यह परंपरा लगभग 1800 सालों से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि अगर कभी यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो मंदिर अगले 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा। वजह चाहे जो भी ही, लेकिन यह भी एक बड़ा रहस्य है कि इतनी ऊंचाई पर चढ़कर पुजारी रोज सुरक्षित वापस आ जाते हैं।

वास्तव में जगन्नाथ मंदिर से जुड़े ऐसे कई रहस्य हैं, जो इस मंदिर को खास बनाते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं कि आज भी विज्ञान से परे कोई तो शक्ति मौजूद है।
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