बंगाली संस्कृति की पहचान है 'अल्पना', जानें दुर्गा पूजा में क्यों खास है यह पारंपरिक आर्ट फॉर्म?

शारदीय नवरात्रि का समापन होने को है। ऐसे में मां की व‍िदाई से पहले हम आपको बंगाल की अल्‍पना कला के बारे में बता रहे हैं। मां के स्‍वागत के ल‍िए इसे बनाया जाता है।
Updated:- 2026-10-19, 13:46 IST
alpana art of bengal

शारदीय नवरात्रि में देशभर में मां दुर्गा की पूजा की जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस त्योहार का रंग कुछ अलग ही नजर आता है। यहां बड़े-बड़े पंडाल, मां दुर्गा की सुंदर मूर्तियां और ढाक की आवाज लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती है। इसी बंगाली संस्कृति का एक खास हिस्सा है अल्पना आर्ट।

यह फर्श पर चावल के घोल से बनाई जाने वाली सुंदर कला है। इसमें फूल, कमल और पैरों के निशान जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान अल्पना घरों और पूजा की जगहों को सजाने के साथ शुभ शुरुआत और मां के स्वागत का प्रतीक भी है। ऐसे में अगर आप अभी तक इसके बारे में नहीं जानती थीं, तो हम व‍िस्‍तार से इसकी जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

alpana art form

image credit- magnific

क्या होती है अल्पना आर्ट?

आपको बता दें क‍ि अल्पना वेस्‍ट बंगाल और बांग्लादेश की एक पुरानी लोक कला है। इसे कागज या कैनवास पर बनाने के बजाय सीधे जमीन या फर्श पर बनाया जाता है। त्योहारों, पूजा और शादी जैसे खास मौकों पर घर की महिलाएं इसे अपने हाथों से बनाती हैं। इसे बनाने के लिए-

  • उंगलियों, सूती कपड़े या रुई लगी छोटी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसका सफेद रंग आमतौर पर चावल को पीसकर बनाए गए घोल से तैयार किया जाता है।
  • कई घरों में सफेद डिजाइन को उभारने के लिए फर्श पर पहले लाल गेरू भी लगाया जाता है।

यह भी पढ़ें- 300 साल तक नई रहती है पाटन पटोला साड़ी, दुर्गा पूजा में पहन सकती हैं मह‍िलाएं; जानें इसकी खास‍ियत

दुर्गा पूजा में क्यों खास माना जाता है अल्पना?

शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के स्वागत के लिए घरों और पूजा की जगहों को अच्‍छे से सजाया जाता है। इसी दौरान अल्‍पना बनाई जाती है। इसके डिजाइन पूजा की जगह को सुंदर बना देते हैं।

  • मां के स्वागत के लिए: अल्पना में पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जो मां दुर्गा के घर आने का संकेत माने जाते हैं।
  • कमल का फूल: इसे पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
  • गोल डिजाइन: गोल आकार में बनी अल्पना पूजा की जगह के बीच में बनाई जाती है।
  • प्रकृति के ड‍िजाइन: धान की बालियां, मछली, सूरज और चांद जैसे डिजाइन भी इसमें बनाई जाती हैं।

alpana art

 

image credit- ai

सैकड़ों साल पुरानी है अल्‍पना वाली कला

अल्पना की शुरुआत सैकड़ों साल पहले हुई थी। माना जाता है कि इसका रिश्ता पुराने ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से रहा है। पहले लोग त्योहारों और खास मौकों पर घर के फर्श को सजाने के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते थे। बाद में बंगाल के कलाकारों ने भी इस कला को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

यह भी पढ़ें- दुर्गा पूजा में महिलाएं शंखनाद क्यों करती हैं? जानें इसके पीछे का रहस्य

अल्पना के डिजाइन में छिपे हैं कई मतलब

बताया जाता है क‍ि अल्पना में बनने वाले ड‍िजाइन सिर्फ डेकोरेशन के लिए नहीं होते हैं। कई डिजाइन लोगों की मान्यताओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। जैसे-

  • कमल और पैरों के निशान: शुभ शुरुआत और देवी के स्वागत से कनेक्‍टेड हैं।
  • मछली और धान: बंगाल के खानपान, खेती और खुशहाली की याद दिलाते हैं।
  • सूरज और चांद: खूबसूरत दुनि‍या का प्रतीक है।
  • दरवाजे के पास बने डिजाइन: घर के एंट्रेंस को सुंदर बनाने और मेहमानों का स्वागत करने के लिए बनाए जाते हैं।

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

image credit- magnific

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।