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पर्सनल लोन लेने वाले की मौत होने पर भुगतान कौन करेगा? जानें RBI के नियम

जब लोन धारक की मृत्यु हो जाती है तो क्या लोन चुकाने की जिम्मेदारी कानूनी वारिसों की होती है या गारंटर भरता है। जानते हैं, इस लेख के माध्यम से...
Editorial
Updated:- 2025-11-26, 19:00 IST

आज के समय में लोन लेना जितना आसान है उसे चुकाना उतना ही मुश्किल है। ऐसे में जब किसी कर्जदार की अचानक से मौत हो जाती है, तो बकाया लोन चुकाने की कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी किस पर आती है? बता दें कि इससे जुड़े नियम लोन के प्रकार और उसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका पर निर्भर करते हैं। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि लोन धारक की मृत्यु के बाद किसे लोन चुकाना होता है। पढ़ते हैं आगे...

लोन के प्रकार पर निर्भर करती है-

बता दें कि लोन के कई प्रकार होते हैं। सिक्योर्ड लोन (Secured Loan) होम लोन, कार लोन या किसी संपत्ति (Property) से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर लोन को बिना चुकाए व्यक्ति की डेथ हो जाए तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति को बेचकर बकाया वसूल सकता है।

अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan), पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, ये लोन किसी संपत्ति से जुड़े नहीं होते। ऐसे में इन तरह के लोन के लिए बैंक परिवार या वारिसों पर तुरंत दबाव नहीं डालता और बकाया को बट्टे खाते (NPA) में डाल दिया जाता है।

अगर लोन में कोई और व्यक्ति शामिल है, तो लोन धारक की मृत्यु के बाद, लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी तुरंत सह-आवेदक पर आ जाती है। बैंक सबसे पहले इन्हीं से संपर्क करता है।

वहीं अगर सह-आवेदक नहीं है, तो लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी गारंटर के कंधे पर आ जाती है, जिसने लोन चुकाने की गारंटी दी थी। ऐसे में किसी व्यक्ति का गारंटर बनने से पहले लोन की शर्तें समझना बेहद जरूरी है।

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 यदि न तो सह-आवेदक है और न ही गारंटर, तो बैंक कानूनी वारिसों से संपर्क करता है। हालांकि, वारिस केवल उस संपत्ति के मूल्य तक ही लोन चुकाने के लिए जिम्मेदार होते हैं जो उन्हें विरासत में मिली है। यदि वारिस भुगतान करने के लिए मना करें और लोन सिक्योर्ड था तो बैंक संपत्ति जब्त कर सकता है। वहीं, वारिस को कोई संपत्ति विरासत में नहीं मिली है, तो उनकी व्यक्तिगत संपत्ति पर कोई दायित्व नहीं होता है।

ऐसे में बड़े लोन लेते समय लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस (Term Insurance) लेना एक समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है। कर्जदार की मृत्यु होने पर, यह इंश्योरेंस सीधे बैंक को बकाया लोन चुकाने में मदद करता है और परिवार को आर्थिक बोझ से पूरी तरह मुक्त कर देता है।

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