पीले रंग के इस फूल को कहा जाता है Rain Indicator, बेहद खास है इसकी वजह

Rain Indicator Amaltas Tree: प्रकृति में ढेरों ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिनके खिलने और झड़ने से मौसम के बदलाव का पता चलता है। अगर आपने गौर किया हो, तो सड़क के किनारे मौजूद अमलतास के पेड़ पर खिलने वाले पीले रंग के लटकते फूल हर किसी का दिल मोह लेते हैं। इस पेड़ को अमलतास या गोल्डन शॉवर ट्री के नाम से जाना जाता है। अमलतास के ये खूबसूरत पीले फूल जो देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं उनका प्रकृति से खास संबंध है। अब आप सोच रही होंगी कि ऐसा कैसे बता दें कि इन्हें प्रकृति का रेन इंडिकेटर (Rain Indicator) यानी बारिश का संकेत देने वाला कहा जाता है।
ग्रामीण इलाकों में इस पेड़ को देखकर मानसून के आने का अंदाजा लगाया जाता रहा है। बिना किसी आधुनिक तकनीक या सैटेलाइट के, यह पेड़ मौसम में होने वाले बदलावों को इतनी सटीकता से भांप लेता है कि इसके फूल खिलने का सीधा संबंध आने वाली पहली बारिश से जुड़ जाता है। चलिए नीचे लेख में जानते हैं कैसे और किस तरह से यह पौधा कैसे देता है बारिश का संकेत?
अमलतास को क्यों कहा जाता है रेन-इंडिकेटर? (Why is Amaltas Called Rain-Indicator)

अमलतास का पेड़ भारतीय उपमहाद्वीप के मौसम चक्र के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाकर चलता है। जब अप्रैल और मई के महीने में भीषण गर्मी अपने चरम पर होती है, तब अमलतास के पेड़ से पत्तियां पूरी तरह गिर जाती हैं और पूरा पेड़ चमकीले पीले फूलों के गुच्छों से लद जाता है। अमलतास के पेड़ पर जब फूल पूरी तरह से खिलकर अपनी सुदंरता बिखेर देते हैं, तो उसके ठीक 45 से 50 दिनों के भीतर उस इलाके में मानसून की पहली बारिश दस्तक दे देती है।
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अमलतास के पेड़ कैसे लगता है बारिश के आने का पता? (How Amaltas Tree Predicts Rain)
हवा में आने वाली हल्की सी नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव को अमलतास का पेड़ बहुत पहले ही महसूस कर लेता है। जैसे ही अमलतास के सुनहरे फूल पूरी तरह खिलते थे, तो यह इस बात का संकेत हुआ करता था जल्दी ही बारिश होने वाली है।
अमलतास के पेड़ कहां पाए जाते हैं?

अमलतास मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया का मूल पेड़ है। भारत में यह लगभग हर राज्य में पाया जाता है। इसे सूखे और गर्म मौसम वाले इलाके बहुत पसंद हैं, इसलिए यह मैदानी क्षेत्रों, शुष्क जंगलों और पहाड़ी इलाकों की तलहटी में आसानी से उग जाता है।
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