Sat Sep 12, 2026 | Updated 08:08 AM IST

भारत में कितने प्रतिशत आबादी LPG गैस पर निर्भर, अगर सप्लाई में हुई कमी तो देश की रसोई से लेकर अर्थव्यवस्था तक पर क्या असर पड़ सकता है?

Worldometer और UN प्रोजेक्शन के अनुसार, भारत की कुल आबादी लगभग 147.28 करोड़ से 147.66 करोड़ के बीच पहुंच गई है। एलपीजी गैस क्राइसेस के बीच मन में सवाल आता है कि इसमें से कितने प्रतिशत आबादी इस पर निर्भर है? फॉरेन मिनिस्टर रोबिंदर सचदेव के अनुसार,  भारत में प्रतिदिन 90,000 टन एलपीजी गैस की खपत होती है। 
Updated:- 2026-03-16, 21:26 IST
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India LPG Crisis: इन दिनों हर तरफ एलपीजी गैस को लेकर मारामारी चल रही है। सड़कों पर लगने वाले पानी पुरी और टिक्की के ठेलों पर चाट मिलनी बंद हो गई है। वहीं रेस्टोरेंट ने खाना मंगवाना पर गैस की किल्लत की वजह से एक्स्ट्रा चार्ज करना शुरू करता है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ रेस्टोरेंट बंद भी हो गए हैं। एजेंसी के बाहर लोग लंबी-लंबी लाइन लगाकर खड़े हैं। इतना ही नहीं बल्कि बुकिंग के बाद भी लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। भारत में LPG अब सिर्फ ईंधन नहीं बल्कि करोड़ों घरों की लाइफ लाइन बन चुकी है। इजरायल और ईरान के बीच वॉर के कारण भारत में गैस की सप्लाई बाधित है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% से 66% LPG आयात करता है जिसका 90% हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता है। चलिए नीचे लेख में जानिए भारत में कितने प्रतिशत आबादी LPG गैस पर निर्भर, अगर सप्लाई में हुई कमी तो देश की रसोई से लेकर अर्थव्यवस्था तक पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत में कितने प्रतिशत आबादी LPG गैस पर निर्भर है?

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फॉरेन मिनिस्टर रोबिंदर सचदेव के अनुसार, भारत में प्रतिदिन 90,000 टन एलपीजी गैस की खपत होती है। इन 90,000 टन में से केवल एक तिहाई का ही उत्पादन भारत में होता है। वहीं दो तिहाई 60,000 टन आयात किया जाता है और सूखे के कारण, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में, एलपीजी, जिसकी आपूर्ति प्रतिदिन 60,000 टन होनी चाहिए थी,जो अचानक बंद हो गई है।

भारत में लगभग 33.37 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं। इसमें से 10.56 करोड़ से अधिक परिवार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आते हैं। हम हर साल लगभग 20-22 मिलियन टन LPG आयात करते हैं।

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सप्लाई में कमी का देश पर क्या असर पड़ेगा?

impact of LPG shortage on India

सप्लाई कम होने के कारण कीमतें आसमान छूने लगती हैं। मार्च 2026 में दिल्ली जैसे शहरों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये और कमर्शियल में 114 रुपये तक का उछाल देखने को मिला है। इससे आम आदमी की बचत खत्म होती है और टाइम पॉवर्टी बढ़ती है।

LPG केवल घरों में नहीं बल्कि रेस्तरां, ऑटोमोबाइल और छोटे उद्योगों में भी इस्तेमाल होती है। कमर्शियल गैस महंगी होने से बाहर का खाना, मिठाई और चाय-नाश्ता सब महंगा हो जाता है। यह सीधे तौर पर रिटेल महंगाई को बढ़ाता है, जिससे बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं और बाजार में नकदी की कमी हो सकती है।

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, गैस की कमी से देश के कई सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने में दिक्कत आ रही है। अगर बच्चों को पोषण नहीं मिलेगा, तो इसका लंबे समय तक असर देश के स्वास्थ्य और शिक्षा स्तर पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब गैस महंगी होती है और भारत को वैकल्पिक रास्तों जैसे अमेरिका या रूस से गैस मंगवानी पड़ती है, तो लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस का खर्च बढ़ जाता है। इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटता है और रुपया कमजोर होता है।

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