Mon Sep 14, 2026 | Updated 07:34 PM IST

क्यों गणेश जी को प्रिय है मोदक? जानें पहली बार भोग लगाने की अनोखी कहानी

आज से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू हो चुका है। इस मौके पर लोग भगवान गणपति की स्थापना करते हैं। साथ ही उनके प्रिय भोग और व्यंजन बनाए जाते हैं, जिसमें मोदक बेहद खास है। नीचे लेख में जानें बप्पा के प्रिय भोग की कहानी।
Updated:- 2026-09-14, 18:03 IST
meaning of Modak in Hinduism

गणपति बप्पा के खास भोग की बात करें और मोदक का नाम न आए भला ऐसा कैसे हो सकता है। 10 दिनों तक चलने वाले पर्व गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो चुकी है। इस दिन लोग बप्पा को ढोल-बाजे के साथ घर लाते हैं और धूमधाम से इनकी स्थापना करते हैं। साथ ही बप्पा के स्वागत के लिए अलग-अलग प्रकार के व्यंजन बनाते हैं, जिसमें मोदक विशेष रूप से बनाए जाते हैं। गणेशजी को 'मोदकप्रिय' भी कहा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बप्पा को लड्डू, पेड़े या किसी अन्य मिठाई के बजाय मोदक ही सबसे ज्यादा क्यों पसंद हैं? आज के इस लेख में हम आपको बप्पा को मोदक प्रिय क्यों है इसके पीछे की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

गणपति बप्प को पहली बार मोदक का भोग किसने लगाया था?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पहले मोदक की कहानी भगवान शिव, देवी पार्वती और बाल गणेश के ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया के आश्रम में जाने से शुरू होती है। देवी अनुसूया ने दिव्य परिवार का स्वागत किया और सबसे पहले बाल गणेश को भोजन कराने पर जोर दिया। बहुत ज्यादा खाने के शौकीन गणेश ने एक के बाद एक कई व्यंजन खाए, उन्होंने सारे नमकीन और बने हुए खाने को खत्म कर दिया, फिर भी उनका पेट नहीं भरा। यह देखते हुए कि साधारण भोजन से उनकी तृप्ति नहीं होगी, देवी अनुसूया ने गुड़ और नारियल से भरी एक खास मिठाई मोदक पेश की। इस एक मिठाई मोदक को खाते ही गणेश को तुरंत पूरी संतुष्टि महसूस हुई।

bappa ko modak kyu pasand hai

गणपति को 21 मोदक का ही क्यों लगाया जाता है भोग?

गणपति बप्पा को मोदक खाकर तृप्ति मिली। इसके बाद उन्होंने जोर से डकार ली। दिलचस्प बात यह है कि ठीक उसी समय, भगवान शिव ने 21 बार डकार ली, जिससे यह संकेत मिला कि गणेश की संतुष्टि से उनकी अपनी भूख भी मिट गई है। इससे खुश होकर देवी पार्वती ने घोषणा की कि मोदक हमेशा गणेश की पसंदीदा मिठाई रहेगी और इसी से पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में 21 मोदक चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

मोदक का अर्थ क्या होता है?

'मोदक' शब्द 'मोद' से बना है, जिसका अर्थ आनंद या परम सुख है। जिस तरह मोदक अपनी मीठी गुठली को एक साधारण बाहरी आवरण के भीतर छिपाए रखता है, उसी तरह परम आध्यात्मिक आनंद और ज्ञान भौतिक दुनिया की बाहरी परतों के नीचे छिपे होते हैं।

Besan-Modak-Recipe

वहीं मोदक का नुकीला सिरा फोकस और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चौड़ा आधार स्थिरता और जमीन से जुड़ाव का प्रतीक है। साथ ही मोदक बनाने की प्रक्रिया मीठी भरावन को अंदर बंद करना अपनी इंद्रियों को भीतर की ओर मोड़ने और अपने भीतर दिव्य आनंद की खोज करने का प्रतीक है।

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अगर आपको अभी तक यह लगता था कि बप्पा को यूं ही मोदक का भोग लगाया जाता है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यकीनन आपको अब इसके पीछे के कारण के बारे में पता चल गया होगा। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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FAQ
मोदक शब्द का धार्मिक अर्थ क्या है?
'मोद' का अर्थ खुशी और 'क' का अर्थ छोटा भाग होता है, यानी जो जीवन में छोटी-छोटी खुशियां भर दे।
परशुराम जी के साथ युद्ध का मोदक से क्या संबंध है?
दंत टूटने के बाद गणेश जी को चबाने में कठिनाई हो रही थी, इसलिए उन्हें नरम मोदक खिलाया गया।
गणेश जी का कौन सा नाम मोदक से जुड़ा है?
मोदक प्रिय होने के कारण ही गणेश जी को 'मोदकप्रिय' नाम से भी पूजा जाता है।
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