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Expert Tips: भोजन से पहले भोजन मंत्र क्यों जरूरी है? क्या कहता है शास्त्र?

आइए ज्योतिषाचार्य और वास्तु स्पेशलिस्ट डॉ आरती दहिया जी से जानें भोजन से पहले भोजन मंत्र क्यों जरूरी है और इसका क्या महत्व है।   
Updated:- 2021-11-18, 15:24 IST
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शास्त्रों में भोजन करना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शरीर के अंदर कई तरह की ऊर्जाओं का प्रवेश होता है। वास्तव में भोजन हमारे शरीर को आगे बढ़ाने के लिए एक ईंधन की तरह काम करता है। ऐसा माना जाता है कि यदि शरीर को सही मात्रा में और सही तरीके से भोजन प्राप्त नहीं होता है तो कई शारीरिक विकार जन्म ले सकते हैं। शुद्ध और सेहत से भरपूर भोजन स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है और हमारे मन को भी शुद्ध करता है।

आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी कि 'जैसा खाए अन्न वैसा होए मन ' वास्तव में ये कहावत इसीलिए कही गयी है कि साफ़ और शुद्ध तरीके से बनाया गया भोजन कई तरह से लाभदायक होता है। इसलिए शास्त्रों में भोजन करने के कई नियम बताए गए हैं जैसे भोजन से पहले हाथ और पैर धोने चाहिए, भोजन जमीन पर बैठकर करना चाहिए, भोजन को कई बार चबाकर करना चाहिए और इन सबसे प्रमुख है भोजन करने से पूर्व भोजन मंत्र पढ़ना चाहिए। इन सभी सवालों का अपना अलग महत्व और शास्त्रों में इनके अलग कारण बताए गए हैं। ऐसे ही एक सवाल ' भोजन से पहले भोजन मंत्र क्यों पढ़ना चाहिए 'का उत्तर जानने के लिए हमने जानी मानी ज्योतिषाचार्य और वास्तु स्पेशलिस्ट डॉ आरती दहिया जी से बात की, उन्होंने हमें जो बताया वो आप भी जानें। 

किसी भी पाप से बचने के लिए जरूरी है भोजन मंत्र 

bhojn mantra inportance shastra

ऐसा माना जाता है कि जब हम भोजन करना आरंभ करते हैं उससे पहले हमें भोजन मंत्र का उच्चारण जरूर करना चाहिए। दरअसल यह मंत्र हमें कई पापों से मुक्ति दिलाने का मार्ग होता है। भोजन से पूर्व भोजन मंत्र का उच्चारण उस ईश्वर को धन्यवाद देना है जिन्होंने हमें यह भोजन प्राप्त कराया और हमारे शरीर को ऊर्जा देने का मार्ग प्रशस्त किया। भोजन मंत्र उस ईश्वर से अपनी किसी भी ऐसी गलती की क्षमा प्रार्थना के लिए भी किया जाता है जो हमसे अंजाने में हो गयी हो जैसे यह संभावना है कि खेत की जुताई करते समय या अनाज को पीसते या पकाते समय यदि अंजाने में कोई जीव मर गया हो तो उस पाप से ईश्वर हमें मुक्ति दिलाए । पापों से बचने के लिए, भोजन के एक-एक टुकड़े के साथ भगवान का नाम जपें और इसे भगवान के प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। 

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भोजन से पहले भोजन मंत्र पढ़ने से संस्कारों का होता है प्रवेश 

रज-तम-प्रधान वाणी भोजन करते समय खाए जाने वाले भोजन और पर्यावरण पर समान संस्कार पैदा करती है। जब ऐसा भोजन हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो ये संस्कार हमारे शरीर से जाते हैं। भोजन पर रज-तम संस्कारों के फलस्वरूप भोजन करने का मुख्य उद्देश्य अर्थात् स्वस्थ तन और मन होना पूर्ण नहीं होता। इसलिए भोजन बनाते और भोजन करने से पूर्व भोजन मंत्र का उच्चारण अच्छे संस्कारों को शरीर में प्रवेश कराता है। तभी इस भोजन का सेवन वास्तव में फायदेमंद हो सकता है जब उससे पूर्व मंत्रोचारण किया गया हो।

नकारात्मक शक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए

bhojan mantra before meal

भोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जो आस- पास की कई नकारात्मक ऊर्जाओं को भी उत्तेजित करती है। इसलिए भोजन करते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए और भोजन मंत्र का उच्चारण करना चाहिए ताकि किसी भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश और किसी भी अनिष्ट शक्ति के हस्तक्षेप से बचा जा सके। इसलिए, हिंदू धर्म में भोजन मंत्र के साथ भोजन का पहला ग्रास या टुकड़ा ईश्वर के नाम का निकाला जाता है। ऐसा करने से हर एक नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शरीर को सकारात्मक ऊर्जाएं मिलती हैं। 

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क्या कहता है शास्त्र 

भोजन मंत्र का उच्चारण करने के बाद भोजन करना शास्त्रों के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में इस बात का जिक्र है कि भोजन मंत्र शरीर को सभी प्रकार की ऊर्जाओं से युक्त बनाता है। भोजन मंत्र पढ़ने की भी अपनी विधि होती है जिससे इसका पूर्ण फल मिल सके। यदि भोजन विधि विधान से किया जाए और इससे पूर्व भोजन मंत्र का उच्चारण किया जाए तो इसका फल कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। भोजन करने से पूर्व हाथ पैर धोकर मुंह को अच्छे से साफ करें और भोजन मंत्र का उच्चारण करें। (गायत्री मंत्र के जाप में है इन बीमारियों का इलाज)

क्या है भोजन मंत्र

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

इस मंत्र का अर्थ है कि हे परमेश्वर! हम शिष्य और आचार्य दोनों की साथ-साथ रक्षा करें। हम शिष्य और आचार्य दोनों का एक साथ पोषण करें। हम दोनों साथ मिलकर बड़ी ऊर्जा और शक्ति के साथ कार्य करें एवं विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य प्राप्त करें। हमारी बुद्धि तेज हो। हम दोनों परस्पर द्वेष न करें। ओम! शांति, शांति, शांति ।”

bhojn mantra significance by expert

क्या है एक्सपर्ट की राय 

भोजन मंत्र का महत्व बताते हुए ज्योतिषाचार्य डॉ आरती दहिया जी बताती हैं कि अन्न को शास्त्रों में पूजनीय माना गया है यदि भोजन ग्रहण करने से पहले हम मां अन्नपूर्णा का धन्यवाद करते हैं तो हमें भोजन सामान्य से अधिक ऊर्जा प्रदान करता है और भोजन से होने वाले कई विकारों से भी बचाता है। 

 

इस प्रकार भोजन मंत्र शास्त्रों के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है और भोजन से पहले आप ईश्वर को जरूर याद करें, ऐसा करने से आपको भोजन से और अधिक ऊर्जा मिलेगी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik 

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