Delhi Crime Cast Interview: रसिका दुग्गल और राजेश तैलंग ने नेटफ्लिक्स सीरीज 'दिल्ली क्राइम' के अपने किरदारों पर की चर्चा

By Saudamini Pandey20 Mar 2019, 16:16 IST

'मंटो', 'किस्सा' में नजर आईं रसिका दुग्गल और 'मुक्केबाज', 'सेलेक्शन डे' में नजर आए राजेश तैलंग नजर आएंगे दिल्ली गैंगरेप केस पर बनी नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज 'दिल्ली क्राइम' में। सीरीज में पुलिसवालों का किरदार निभाने वाले इन दोनों कलाकारों से खास बातचीत की मेघा ममगेन ने। आम लोगों के लिए पुलिसवालों को देखने का नजरिया अलग होता है, उन्हें नहीं मालूम होता कि पुलिसवाले किस तरह की लिमिटेशन में काम करते हैं और किस तरह की मुश्किलों का उन्हें सामना करना पड़ता है। इस सीरीज में काम करके रसिका और राजेश का पुलिसवालों के लिए नजरिया बदल गया। यह सीरीज करने के दौरान कैसे रहे उनके अनुभव, आइए जानते हैं-

मेघा ममगेन का सवाल: क्या सीरीज शुरू होने से पहले किसी तरह की नर्वसनेस फील हो रही है? 

रसिका का जवाब: मुझे काम को लेकर नर्वसनेस फील नहीं होती। मैं पर्दे पर अपना काम देखने के लिए एक्साइटेड हूं, मुझे अपने काम के लिए कैसे रिएक्शन मिलते हैं, यह देखने के लिए बेताब हूं। राजेश तैलंग का जवाब: हर इंसान अलग तरह से काम को देखता है, यह देखना दिलचस्प होता है कि वे उसमें क्या देख रहे हैं। फीडबैक कई बार बहुत अलग होते हैं और ऐसे भी होते हैं, जो हमने कभी सोचे नहीं होते। ऐसे में हमें अपने बारे में नई चीजें जानने को मिलती हैं। फिल्म और सीरीज दोनों पर यह चीज लागू होती है। 

राजेश तैलंग का जवाब: जब भी रिलीज होती है फिल्म तो मुझे ज्यादा टेंशन नहीं होती। मैं इस बात के लिए सजग रहता हूं कि लोग फिल्म में मेरे काम को किस तरह से लेंगे। यह काम अकेले नहीं होता, इसमें पूरी टीम का एफर्ट होता है, ऐसे में यह फिक्र होती है कि पर्दे पर काम किस तरह से दिखाई देगा।  

मेघा ममगेन का सवाल: दिल्ली पुलिस को लेकर आम लोगों की धारणा बहुत अच्छी नहीं है, क्या इस सीरीज में काम करने के बाद आपकी धारणा में कोई बदलाव आया है?

रसिका का जवाब: पुलिस के बारे में कोई स्पष्ट नजरिया नहीं था। कुछ जानने वाले पुलिस में हैं, उनके जरिए, खबरों के जरिए पुलिस की एक छवि मन में बनी थी, लेकिन पुलिस वालों से कभी ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी। इस सीरीज के दौरान पुलिस वालों ने काफी संजीदगी से बात की। ट्रेनिंग के दौरान कई आईपीएस अफसरों से बातचीत हुई थी। इनसे बात करने से जाहिर हुआ कि ये कितने स्पिरिटेड और आदर्शवादी थे, ये मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा था। उनके अंदर बदलाव लाने का जज्बा दिखा। काम की लिमिटेशन्स को लेकर थोड़ी झुंझलाहट भी दिखी, लेकिन आखिरकार उनसे बातचीत के बाद एक भरोसा भी कायम हुआ। 

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राजेश तैलंग का जवाब: मेरा वास्ता रहा है पुलिस वालों से, मैं पुलिसवालों का कुछ किरदार निभाए भी हैं। जिस दौरान निर्भया मामला हुआ, उस दौरान राजधानी में काफी ज्यादा विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही थी, इस बीच भी पुलिसवाले बहुत बारीकी से अपना काम करने में जुटे हुए थे। उन्होंने महज 6 दिन में सारी कार्रवाई पूरी कर ली, हमें यह बात मालूम नहीं थी। हम कैंडल मार्च का हिस्सा थे, लेकिन हमें संभाल रहे थे पुलिसवाले और भीड़ को भी। 

मेघा ममगेन का सवाल: रसिका आपके किरदार में एक वलनरेबिलिटी दिखाई देती है, जो कमजोरी की निशानी नहीं है। इसकी इंस्पिरेशन आपको कहां से मिलती है?

रसिका का जवाब: मैं जो भी किरदार निभाती हूं, उसमें बेझिझक वलनरेबिलिटी होती है, यह खुद को मजबूत तरीके से रखने की निशानी है। आप जब किसी चीज में इस तरह से डूब जाते हैं कि चीजें आपको प्रभावित करने लगे, तो उसमें साहस की जरूरत होती है। मैं अपने आसपास मौजूद महिलाओं से बहुत कुछ एब्जॉर्ब करती हूं और यह प्रक्रिया काफी स्वाभाविक होती है। 

मेघा ममगेन का सवाल: राजेश आपके किरदार में सिस्टम को लेकर एक तरह की लिमिटेशन नजर आती है, एक तरह की हेल्पलेसनेस नजर आती है, आपको इसकी इंस्पिरेशन कैसे मिली?

राजेश तैलंग का जवाब: मैंने एक पुलिसवाले से बात की थी और उनसे मुझे काफी कुछ समझने को मिला। जिस पुलिसवाले का किरदार मैंने निभाया है, वह लंबे वक्त से पुलिस में है, उसने बहुत से एनकाउंटर किए हैं। अपने किरदार के जरिए मैंने यही कोशिश की कि किरदार में इंसानियत दिखे और उसकी बेबसी भी दिखाई दे।