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Raksha Bandhan 2026: सिर्फ राखी नहीं, इन परंपराओं से पूरा होता है त्योहार

रक्षाबंधन का त्योहार केवल राखी बांधने के लिए ही नहीं मनाया जाता, इसके अलावा भी कुछ पारंपरिक रस्में हैं, जिनके बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं इन परंपराओं के बारे में।
Updated:- 2026-08-27, 09:30 IST
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हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इस त्योहार का काफी महत्व है। आमतौर पर लोग इसे केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने और उपहारों के लेन-देन के रूप में देखते हैं। हालांकि, रक्षाबंधन का त्योहार बस यहीं तक सीमित नहीं है। पौराणिक मान्यताओं और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार, यह दिन सिर्फ भाई-बहन के प्यार का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज से जुड़ने का भी माना जाता है। इस दिन कुछ खास पुरानी रस्में भी निभाई जाती हैं, जो इस त्योहार को पूरा करती हैं।

रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण पारंपरिक रस्में

अगर आप भी इन परंपराओं के बारे में जानना चाहती हैं, तो आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन के इस पावन पर्व को पूरा करने के लिए कौन सी खास पुरानी रस्में निभाई जाती हैं।

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(Image credit/magnific)

1. श्रावणी उपाकर्म और ऋषि पूजन की परंपरा

सावन पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला यह पर्व केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि इस दिन गुरुजन और ब्राह्मण नदियों के किनारे नया जनेऊ धारण करते हैं। राखी के दिन ऋषियों और पूर्वजों को जल अर्पित करने का भी बहुत महत्व है। यह आसान रस्म हमें अपने संस्कारों, विचारों और समाज के प्रति जिम्मेदारियों की सीख देती है।

2. रक्षा थाली सजाना और ईश्वर की पूजा

राखी के दिन पूजा की थाली तैयार करने और भगवान का ध्यान करने का भी बहुत महत्व माना जाता है। इस दिन घर के लोग पारंपरिक तरीके से पूजा की थाली सजाते हैं। इसमें रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, धूप और ताजी मिठाइयां रखी जाती हैं। इस रस्म की शुरुआत में बहनें सबसे पहले भगवान और कुलदेवता को राखी बांधती हैं। ईश्वर को राखी बांधने के बाद ही वे भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारती हैं और कलाई पर राखी बांधती हैं।

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3. शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का ध्यान

रक्षाबंधन के दिन सही समय और शुभ मुहूर्त का विशेष रूप से पालन किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन भद्रा काल के दौरान राखी बांधना अशुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में राखी बांधने के कारण ही रावण का विनाश हुआ था। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जाती है। इसके अलावा दिशा का भी ध्यान रखा जाता है; राखी बांधते समय भाई का मुंह पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।

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4. सुरक्षा का वचन और उपहार देना

राखी बंधवाने के बाद भाई अपनी बहन को उम्रभर रक्षा करने का वचन देता है और उसकी पसंद का कोई उपहार भी भेंट करता है। इसके बाद पूरा परिवार एक साथ बैठकर मिठाइयां खाता है, जिससे घर में खुशियों का माहौल बन जाता है। इन सभी परंपराओं के बिना राखी का त्योहार अधूरा माना जाता है।  

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रक्षाबंधन का यह अवसर सिर्फ एक धागा बांधने की रस्म नहीं है, बल्कि प्यार, सुरक्षा और सम्मान का एक खूबसूरत संगम है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के साथ-साथ पूजा थाली सजाने, शुभ मुहूर्त का ध्यान रखने और अपनी परंपराओं को निभाने का काम भी पूरे दिल से करती हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।

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