बच्चे से हो गई है कोई गलती? उसे डांटने के बजाय पूछें ये 3 सवाल, खुद जिम्मेदारी लेना सीख जाएगा आपका बच्चा

बच्चे स्वभाव में बेहद ही चंचल होते हैं और उनसे गलतियां होना एक आम बात है, लेकिन जब घर में कोई सामान टूट जाता है या बच्चा पढ़ाई में लापरवाही बरतता है, तो ज्यादातर पेरेंट्स का पहला रिएक्शन डांटना या चिल्लाना होता है। एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि गुस्से में दी गया रिएक्शन बच्चे को डरा तो सकता है, लेकिन उसे अपनी गलती का एहसास नहीं करा सकता। ऐसे में अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा अपनी गलती को माने और सुधारे और भविष्य के लिए जिम्मेदार बने, तो डांटने के बजाय उनसे बात करें। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों को कैसे समझाया जाए? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
बच्चों पर चिल्लाना समाधान क्यों नहीं है?
किसी बच्चे को चिल्लाते पर उसका दिमाग सर्वाइवल मोड में चला जाता है। ऐसे में बच्चा या तो झूठ बोलने लग जाता है या फिर जिद्दी बनकर आपसे दूरी बना लेता है, चिल्लाने से बच्चा यह नहीं सीखता कि उसने क्या गलत किया, बल्कि वह यह सोचने लगता है कि वह बुरा है। डांट-फटकार से बच्चे के आत्मविश्वास में कमी हो जाती है और वह अपनी गलतियों को छिपाने का माहिर बन जाता है, जो उसके पर्सनल डेवलपमेंट के लिए हानिकारक है।

गलती होने पर पूछें ये 3 जादुई सवाल
क्या हुआ था? - उसे बिना किसी बात पर टोके बोलने के लिए कहें। इससे उसे लगेगा कि आप उसकी बात सुनी जा रही है और वह बिना डरे सच बोलेगा।
अब हमें इसे ठीक करने के लिए क्या करना चाहिए? - यह सवाल सबसे मने है। यह बच्चे के दिमाग को समस्या से हटाकर सॉल्व की ओर ले जाता है। चाहे वह बिखरा हुआ खाना समेटना हो या किसी से माफी मांगना, उसे खुद रास्ता सोचने दें।
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अगली बार हम इसे अलग तरीके से कैसे कर सकते हैं? - यह सवाल बच्चे को फ्यूचर के लिए योजना बनाना सिखाता है। इससे वह अपनी गलती से सबक लेना सीखता है।

बच्चे के फ्यूचर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
जब आप बच्चे खुद सॉल्यूशन सोचते हैं, तो उनके अंदर अकाउंटेबिलिटी यानी जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है।
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