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एक क्लिक और 97 लाख पार, बैंक अधिकारी भी नहीं बच पाए साइबर फ्रॉड से; आप न करें ये छोटी सी गलती

पटना में एक बैंक सीनियर 97 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड का शिकार हुए। ठगों ने फेसबुक पर शेयर बाजार के विज्ञापन से फंसाया और एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए पैसे हड़प लिए। यह घटना दर्शाती है कि अनुभवी लोग भी ठगी का शिकार हो सकते हैं। 
Updated:- 2026-04-16, 17:49 IST
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आज के टाइम में सेफ्टी ही सबसे बड़ा बचाव है। जी हां, पटना में एक बैंक सीनियर के साथ हुई 97 लाख रुपये की ठगी इस बात का सबूत है कि साइबर ठगी अब एक्सपीरियंस लोगों को भी अपने जाल में फंसाने में माहिर हो चुके हैं। जब बैंकिंग की बारीकियों को समझने वाला सीनियर भी ठग का शिकार हो सकता है, तो आम लोग के लिए खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में छोटी सी मिस्टेक इस ठगी से आपको रूबरू करा सकती है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि यह ठगी कैसे हुई और आप खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठा सकती हैं? जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

कैसे हुई ठगी?

ठग करने वालों ने फेसबुक पर शेयर बाजार और ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का एडवरटाइजमेंट दिया। रिटायरमेंट के बाद लोग अक्सर इंवेस्टमेंट के जरिए कमाई बढ़ाना चाहते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं।

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बता दें कि सीनियर को एक ऐसे ऐप पर रजिस्टर करवाया गया जो बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखता था। वहां उनके द्वारा लगाए गए पैसे पर फेक मुनाफा भी दिखाया जा रहा था, जिससे उनका ट्रस्ट जीत लिया गया।

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ठगी से बचने के उपाय

ध्यान रहे कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर दिखने वाले जल्दी अमीर बनने के विज्ञापनों पर कभी क्लिक न करें। कोई भी सही संस्था सोशल मीडिया के जरिए इंवेस्टमेंट की गारंटी नहीं देती।

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शेयर मार्केट में इंवेस्ट के लिए हमेशा SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त ब्रोकर या ऐप को ही चुनें। किसी अनजान लिंक से डाउनलोड किए गए ऐप में अपनी बैंकिंग डिटेल्स कभी न डालें।

यदि आपको कोई वॉट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर स्टॉक टिप्स या इनसाइडर जानकारी देने का दावा करता है, तो तुरंत उस ग्रुप को छोड़ दें और नंबर ब्लॉक करें।

अपना यूजर आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी भी सूरत में किसी को न बताएं। बैंक या कोई भी सरकारी लोग फोन पर ये जानकारी नहीं मांगती।

नोट - 1930 पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर है। जितनी जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। इससे अलग cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।

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Images: Freepik

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