Mahashivratri Puja Vidhi 2026: इस विधि से करें महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक, जानें नियम

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की प्रतिमा की पूजा तो की ही जाती है लेकिन इस दिन शिवलिंग पूजन का अत्यधिक महत्व माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग के कई प्रकार के अभिषेक किये जाते हैं, इन्हीं में से एक है रुद्राभिषेक जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में इस साल महाशिवरात्रि यानी कि 16 फरवरी के दिन कैसे करें रुद्राभिषेक और क्या है रुद्राभिषेक पूजा की संपूर्ण विधि, आइये जानते हैं इस बारे में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
महाशिवरात्रि शिवलिंग रुद्राभिषेक पूजा विधि (Mahashivratri Rudrabhishek Vidhi 2026)
शिवलिंग की स्थापना: सबसे पहले घर के पूजा स्थान में एक स्वच्छ थाली रखें। उस थाली में शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग के दाहिनी ओर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
पूजा सामग्री रखें: पूजा की थाली में सभी सामग्री जैसे कि पुष्प, अगरबत्ती, घी, दही, शहद, ताजा दूध, पंचामृत, गुलाब जल, मिठाई, गंगाजल, कपूर, सुपारी, बेल पत्र, लौंग, इलायची आदि रखें।
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सही दिशा चुनें: रुद्राभिषेक पूजा करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर साफ और शुद्ध स्थान पर बैठें। पूजा के लिए पूर्व दिशा की ओर आसन लगाकर बैठें।
पूजा आरंभ मंत्र बोलें: पूजा की शुरुआत 'ॐ नमः शिवाय' बोलकर करें। बेल पत्र पर इस पंचाक्षर मंत्र को लिखें और फिर उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। दीपक और पुष्प भी अर्पित करें। फिर कपूर जलाएं।
रुद्राभिषेक शुरू करें: सबसे पहले शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें। यह पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण होता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करके भगवान शिव को समर्पित करें।
अब शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और ताजे जल से अभिषेक करें। अब शिवलिंग पर कच्चे दूध में कुछ फूल मिलाकर अर्पित करें। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।
अभिषेक के बाद शिवलिंग को हल्के हाथों से साफ करें। इससे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा भाव दिखता है। साथ ही, या इस बात का प्रतीक है कि आप भगवान शिव के प्रति समर्पित हैं।
पूजा समापन करें: शिवलिंग पर वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद जनेऊ अर्पित करें, जो ब्राह्मणत्व और शुद्धता का प्रतीक होता है। शिवलिंग पर चंदन और भस्म का तिलक करें।
बेल पत्र, धतूरा और विशेष रूप से कनेर के फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इसके बाद शिवलिंग पर फल और मिष्ठान का भोग अर्पित करें और शिव मंत्रों का निरंतर जाप करते रहें।
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चूंकि यह रूद्र अभिषेक है, ऐसे में इसकी पूजा का समापन हमेशा महामृत्युंजय मंत्र से ही होता है। 'ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा अमृतात्॥'। अंत में भगवान शिव की आरती गाएं।
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