Mahalakshmi Vrat 2026: 18 या 19 सितंबर, व्रत कब से शुरू हो रहे हैं? जानें शुभ मुहूर्त और कथा

Mahalakshmi Vrat 2026 की शुरुआत जल्द ही होने वाली है। यह 16 दिन का अनुष्ठान धन और ऐश्वर्य की देवी मां महालक्ष्मी को समर्पित है, जो सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
Updated:- 2026-09-17, 16:30 IST
mahalakshmi vrat 2026

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से धन, ऐश्वर्य और वैभव की देवी मां महालक्ष्मी की पूजा का पावन पर्व शुरू होता है। गणेश चतुर्थी के ठीक चार दिन बाद शुरू होने वाला यह अनुष्ठान पूरे 16 दिनों तक चलता है। पंचांग के मुताबिक, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को इस व्रत का समापन होता है। तिथियों के घटने-बढ़ाने के आधार पर कई बार यह अवधि 15 या 17 दिनों की भी हो जाती है। इस व्रत को पूरे नियम और निष्ठा से रखने पर साधक को माता महालक्ष्मी का अक्षय आशीर्वाद और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। ऐसे में इसकी तिथि और समय के बारे में पता होना जरूरी है। जानते हैं आगे...

महालक्ष्मी व्रत 2026 कब से शुरू होगा? (Mahalakshmi Vrat 2026 Start Date)

साल 2026 में महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत शनिवार, 19 सितंबर को हो रही है। बता दें कि इस बार तिथियों की गणना के अनुसार संपूर्ण व्रत की अवधि 15 दिनों की होगी, जिसका समापन शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को होगा।

महालक्ष्मी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त (Mahalakshmi Vrat Shubh Muhurat)

यहां दिए गए शुभमुहूर्त के अनुसार ही पूजा करें-

  • अष्टमी तिथि की शुरुआत: 18 सितंबर 2026 को दोपहर 01:00 बजे
  • अष्टमी तिथि का समापन: 19 सितंबर 2026 को दोपहर 03:26 बजे
  • व्रत का आरंभ: 19 सितंबर 2026 (शनिवार)
  • व्रत का समापन: 3 अक्टूबर 2026 (शनिवार)

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इस पावन दिन का धार्मिक महत्व काफी अधिक है, क्योंकि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा रानी के जन्मोत्सव यानी राधा अष्टमी के रूप में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, इसी दिन दूर्वा अष्टमी का व्रत भी रखा जाता है, जिसमें दूर्वा घास की विशेष पूजा होती है। साथ ही तीन दिनों तक चलने वाली ज्येष्ठ देवी पूजा की शुरुआत भी इसी तिथि से होती है।

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महालक्ष्मी व्रत की पौराणिक कथा (Mahalakshmi Vrat Katha)

स्कंद पुराण के अनुसार, जब भगवान कार्तिकेय ने अपने पिता भगवान शिव से पूछा कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम महालक्ष्मी व्रत का पालन किसने किया था, तब शिवजी ने राजा मंगलार्ण और रानी पद्मावती की कथा सुनाई।

सरोवर पर देव कन्याओं का दर्शन

प्राचीन काल में कुंडननगर पर राजा मंगलार्ण का शासन था। एक बार राजा शिकार खेलते समय जंगल में प्यास से व्याकुल हो गए। राजा के सेवक तवल्लक नामक एक धर्मपरायण व्यक्ति के साथ पानी की तलाश में निकले। जंगल के अंदर एक सुंदर सरोवर के पास तवल्लक ने देखा कि कुछ देव कन्याएं सुंदर वस्त्र धारण कर देवी महालक्ष्मी की पूजा कर रही थीं। पूछने पर उन्होंने बताया कि यह महालक्ष्मी का सिद्ध व्रत है, जो हर मनोकामना पूरी करता है। तवल्लक ने उनसे व्रत का विधान सीखा, रक्षासूत्र बंधवाया और राजा के पास जल लेकर लौटा। पूरी बात सुनकर राजा ने भी वहीं व्रत का संकल्प लिया और कलाई पर रक्षासूत्र बांध लिया।

राजमहल लौटने पर जब राजा की क्रोधी स्वभाव वाली पत्नी पद्मावती ने उनके हाथ में धागा देखा, तो उसने ईर्ष्या और क्रोध में आकर उस पवित्र सूत्र को तोड़कर आग में फेंक दिया। राजा ने रानी को चेताया कि उसने देवी महालक्ष्मी का घोर अनादर किया है। इस अपराध के कारण राजा ने रानी को भरे जंगल में छोड़ दिया।

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जंगल में भटकते हुए रानी पद्मावती महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पहुंची। रोती हुई रानी की व्यथा देखकर ऋषि ने अपने तपोबल से समझ लिया कि यह सब देवी लक्ष्मी के अपमान का फल है। महर्षि वशिष्ठ ने रानी से पूर्ण विधि-विधान से महालक्ष्मी व्रत करवाया। व्रत के प्रभाव से रानी का मन निर्मल हो गया और उनका खोया हुआ रूप व सौंदर्य वापस लौट आया।

पुनर्मिलन और राज्य में समृद्धि

कुछ समय बाद राजा मंगलार्ण पुनः शिकार करते हुए महर्षि वशिष्ठ के आश्रम के पास पहुंचे। वहां उन्होंने एक अत्यंत रूपवती स्त्री को देखा। जब राजा ने उनसे परिचय पूछा, तो रानी ने बताया कि महर्षि वशिष्ठ की कृपा और महालक्ष्मी व्रत के प्रभाव से ही उन्हें यह नया जीवन और सौंदर्य मिला है। राजा को अपनी भूल का एहसास हुआ, वे रानी को ससम्मान वापस महल ले आए। इसके बाद राजा, रानी और पूरी प्रजा ने 16 साल तक निष्ठापूर्वक महालक्ष्मी व्रत का पालन किया, जिससे उनका राज्य धन-धान्य और खुशहाली से भर गया।

निष्कर्ष

भगवान शिव के अनुसार, जो भी मनुष्य 16 सालों तक श्रद्धा से इस व्रत को करता है, उसके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। 

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FAQ
2026 में महालक्ष्मी व्रत का समापन कब होगा?
इस वर्ष महालक्ष्मी व्रत का समापन शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को होगा।
महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत के दिन और कौन से पर्व मनाए जाते हैं?
इस दिन राधा अष्टमी (राधा रानी जन्मोत्सव), दूर्वा अष्टमी और तीन दिवसीय ज्येष्ठ देवी पूजा का आरंभ भी होता है।
महालक्ष्मी व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?
यह व्रत धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इसे निष्ठा से करने पर जीवन से दरिद्रता समाप्त होती है।
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