Wed Sep 23, 2026 | Updated 08:54 PM IST

साल में 2 बार सूर्य देव स्वयं करते हैं मां अंबाबाई का तिलक, जानें कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर की अनोखी परंपरा

महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में एक ऐसी ही खास परंपरा जुड़ी है, जिसे किरणोत्सव कहा जाता है। इस घटना के तहत साल में दो बार सूर्य देव खुद अपने किरणों से मां अंबाबाई का तिलक करते हैं।
Updated:- 2026-09-23, 19:30 IST
Mahalakshmi Temple Kiranotsav dates

Kolhapur Mahalakshmi Temple: भारत अपनी विविधता, संस्कृति, मंदिर की वास्तुकला और श्रद्धा के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यहां स्थित मंदिरों और परंपराओं के जानने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। आज के इस लेख में हम आपको कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां माता अंबाबाई के चरणों का तिलक स्वयं सूर्य देव करते हैं। नीचे पढ़ें क्या यह अनोखी परंपरा।

क्या है किरणोत्सव की परंपरा?

कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में हर साल सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में प्रवेश करती हैं। मां अंबाबाई की मूर्ति के चरणों से होते हुए उनके चेहरे तक पहुंचती हैं। इसे ही किरणोत्सव या सूर्य किरण महोत्सव कहा जाता है। यह नजारा बेहद अलौकिक और देखने लायक होता है। विज्ञान के इस अद्भुत चमत्कार को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर में इकट्ठा होते हैं।

mahalakshmi temple kirnoustav

साल में कब और किन दिनों होती है यह घटना?

यह सूर्य-पूजा जैसी अनूठी खगोलीय घटना साल में दो बार, विशेष तिथियों पर घटित होती है। नीचे जानें-

  • पहली अवधि- 31 जनवरी,1 और 2 फरवरी को
  • दूसरी अवधि- 9, 10 और 11 नवंबर को

इन 2 दिनों में तीन-तीन दिनों के लिए सू्र्य की किरणें गर्भगृह में प्रवेश करती हैं। इस दौरान, सूर्यास्त के समय सूरज की आखिरी किरणें मंदिर के मुख्य द्वार से होते हुए सीधे गर्भगृह तक पहुंचती हैं। पहले दिन किरणें माता के चरणों को छूती हैं, दूसरे दिन मध्य भाग पर पड़ती हैं और आखिर चरण में सीधे माता के चेहरे को रोशन करती हैं।

मंदिर की बनावट है बेहद खास

कोल्हापुर में स्थित इस मंदिर की वास्तुकला और बनावट इतनी खास है कि आप देखते ही रह जाएंगी। आज से सैकड़ों साल पहले जब इस मंदिर का निर्माण किया गया था, तब मंदिर के वास्तुकारों ने इस बात का विशेष ध्यान रखा था कि सूर्य की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे गर्भगृह तक पहुंच सकें। 

Mahalakshmi Temple Kiranotsav dates

भक्तों के लिए इसका क्या महत्व है?

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि जब सूर्य देव स्वयं मां अंबाबाई का चरण तिलक करते हैं, तो यह दर्शन बेहद शुभ और कल्याणकारी होता है। इस दौरान मंदिर में विशेष उत्सव का माहौल होता है, भजन-कीर्तन होते हैं और माता का भव्य शृंगार किया जाता है।

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कोल्हापुर का यह महालक्ष्मी मंदिर न केवल शक्तिपीठों में से एक है बल्कि यह हमारी प्राचीन संस्कृति, खगोलीय ज्ञान और वास्तुकला की महानता का भी प्रतीक है। अगर आपको कभी महाराष्ट्र जाने का मौका मिले, तो इस ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन जरूर करें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर (श्री अंबाबाई मंदिर) की आधिकारिक वेबसाइट (mahalaxmikolhapur.org) पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान व्यवस्थापन समिति (Paschim Maharashtra Devasthan Samiti) से ली गई है। 

Image Credit- Paschim Maharashtra Devasthan Samiti Official Website

FAQ
किरणोत्सव के दौरान सूर्य की किरणें मूर्ति पर किस क्रम में पड़ती हैं?
किरणें पहले देवी के चरणों, फिर मध्य भाग (छाती) और अंत में चेहरे (माथे) पर पड़ती हैं।
इस मंदिर की वास्तुकला की क्या खासियत है?
मंदिर का निर्माण 7वीं सदी में हेमड़पंथी शैली में इस तरह किया गया है कि सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह तक पहुंचती हैं।
सूर्य किरणों का यह अद्भुत नजारा कितने समय तक रहता है?
सूर्य का प्रकाश देवी की मूर्ति पर प्रतिदिन लगभग 3 से 5 मिनट तक रहता है।
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