देश की सबसे प्रसिद्ध विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज का 6 अगस्त 2019 को निधन हो गया है। दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हुई। ये दुखद खबर सुनकर पूरा देश शोक में डूबा हुआ है, क्या नेता-क्या अभिनेता सभी सुषमा स्वराज के आखिरी दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी तक सभी ने सुषमा स्वराज की मृत्यु पर शोक जताया है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ आज किया जाएगा।

सुषमा स्वराज, जिन्हें सबसे अच्छे विदेश मंत्री के रूप में जाना जाता रहा है, उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को गौरवान्वित किया है। जब पहले यह याद रखना मुश्किल होता था कि हमारे विदेश मंत्री कौन थे, तो सुषमा स्वराज ने हम सभी को महसूस कराया कि वह मौजूद हैं और दूसरों के लिए अच्छा करना चाहती हैं। जी हां सुषमा स्वराज देश की उन चुनिंदा मंत्रियों में से थीं, जिनकी पहचान उनकी पार्टी से नहीं बल्कि उनके काम और राजनीतिक कामों के जरिए भी होती थी। सुषमा स्वराज के अंतिम समय तक उन्होंने अपने कामों से देश की राजनीति और अपनी पार्टी में एक अलग जगह बनाई हुई थी। आज हम इन्हीं बातों पर बात करेंगे कि जो देश की हर महिला सुषमा स्वराज से सीख सकती है। 


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सुषमा ने नौकरशाही में हमारे विश्वास को बहाल किया  और अधिक से अधिक लोगों की मदद करके दुनिया भर में प्रशंसा हासिल की। उनकी पूरी कोशिश रही कि वे दूसरों के लिए उपलब्ध रहें और उनकी हेल्‍प करें। आज हम आपको सुषमा स्‍वराज से जुड़े कुछ तथ्‍यों के बारे में बताएंगे जो आपको उनके बारे में अधिक गर्व महसूस कराएंगे।

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सुषमा स्‍वराज से जुड़े 15 दिलचस्‍प तथ्‍य

1. सुषमा स्वराज ने इंडिया के सु्प्रीम कोर्ट के एक वकील के रूप में अभ्यास किया है, क्योंकि वह पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पूर्व लॉ की छात्रा थीं। उनके पास संस्कृत और राजनीति विज्ञान में बड़ी डिग्री के साथ स्नातक की डिग्री भी ली थी।
2. उनके बोलने के कौशल पर हमेशा ध्यान दिया जाता है। क्‍योंकि उन्‍होंने लगातार तीन वर्षों तक राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ हिंदी स्पीकर का पुरस्कार जीता था।
3. उनका राजनीतिक जीवन 1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)के साथ शुरू हुआ।

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4. कहा जाता है कि जब महिलाएं लीडर बनती हैं तो वह पुरुषों की तरह ही या उनसे ज्यादा कठोर हो जाती हैं। लेकिन सुषमा स्वराज के साथ ऐसा नहीं था। वह हर एक इंसान से सहानुभूति रखती थीं और उनसे कोई ट्विट कर हेल्‍प मांगता तो किसी भी समय उसकी हेल्‍प करने से पीछे नहीं हटती थीं। जी हां, NRI ही नहीं विदेशी भी भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज के फैन हैं। सुषमा स्‍वराज बस एक ट्वीट पर हर किसी की हेल्‍प को तैयार हो जाती थीं। विदेशों में रह रहे भारतीयों को जब कभी भी परेशानी हुई है तब-तब सुषमा स्‍वराज ने मदद का हाथ बढ़ाया था। 
5. 1977 में, जब सुषमा स्वराज हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में शामिल हुईं थी, तो वह 25 साल की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की मंत्री बनी थीं।
1979 में, जब उन्हें बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था, वह सिर्फ 27 साल की थीं। इसके साथ, वह भाजपा में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बन गईं। भारतीय समाजवाद के विचार कुछ ऐसे थे जिसने उसे अत्यधिक प्रभावित किया था।
6. अच्छे लीडर्स अपनी टीम को हमेशा क्रेडिट देते हैं और उनके द्वारा पूरे किए गए काम की पूरी इज्जत करते हैं। अमेरिका और ब्रिटिश के लीडर्स की तरह अगर अपने देश में आप कोई लीडर ढूंढेंगी तो आपको केवल सुषमा स्वराज ही नजर आएंगी। यह हर काम की बधाईयां देने के दौरान 'मैं' की जगह 'हम' का इस्तेमाल करती थीं और टीम को थैंक्स कहना नहीं भूलती थीं।

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7. सुषमा स्‍वराज को भारत में एक राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता बनने का गौरव भी प्राप्त था।
8. वह केवल 2 बार नहीं बल्कि 7 बार संसद सदस्य के रूप में चुनी गई हैं। वह उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार की विजेता भी थीं।
9. 1996 में, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान, सुषमा स्वराज को सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री चुना गया था।
10.1998 में, स्वराज स्वराज, अटल बिहारी वाजपेयी के केंद्रीय मंत्रिमंडल को छोड़ने के बाद दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
11. सुषमा स्वराज में फेमिनिज्‍़म के सारे गुण थे। केवल फर्क ये है कि वह कभी इसे चिल्लाकर जाहिर नहीं करती थीं। उन्होंने शादी के बाद पति के सरनेम को तो नहीं अपनाया लेकिन उनके नाम को अपना सरनेम बना लिया। इससे उन्होंने अपना प्यार भी जाहिर कर दिया और फेमिनिज्‍़म होने की सोच को भी।

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12. सुषमा स्वराज ने अपना घर और करियर काफी अच्छे तरह से संभाला। उनकी शादी 13 जुलाई 1975 को हुई थी। शादी के बाद जब सुषमा स्वराज पॉलिटिक्स में एक्टिव हो गईं तो उनके पति स्वराज कौशल ने उनके लिए एक सिद्धांत बना लिया - 'सहयोग पूरा, हस्तक्षेप निल।' सुषमा कहती हैं कि उनके पति ने कभी उनके पॉलिटिकल मामलों में कोई दखल नहीं दिया और सुषमा ने भी इन्हें हर कदम में अपने साथ रखा। इसलिए आज भी दोनों साथ हैं और एक परफेक्ट जोड़ी की मिसाल हमारे सामने रखते हैं।
13. यमन में फंसे भारतीयों के लिए सुषमा स्‍वराज ने ऑपरेशन राहत चलाया और साढ़े 5 हजार से ज्‍यादा लोगों को बचाया गया। ये ऑपरेशन इतना सफल रहा कि भारत ही नहीं यमन में फंसे 41 देशों के नागरिकों को इस ऑपरेशन के जरिए ही सुरक्षित बचाया जा सका। 


14. सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के बाद 15 साल पहले भटककर सरहद पार पाकिस्‍तान पहुंच गई 8 साल की मासूम गीता को भारत लाया जा सका। गीता जब भारत लौटी तब उसकी उम्र 23 साल हो चुकी थी। गीता भारत आने के बाद सबसे पहले विदेशमंत्री सुषमा स्‍वराज से मिली। ऐसा ही कुछ कोलकाता की जूडिथ डिसूजा केस में भी हुआ। जूडिथ को 9 जून को काबुल से अगवा कर लिया गया था। सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के बाद अफगान अधिकारियों ने जूडिथ की रिहाई सुनिश्‍चित करवाई।  

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15. सुषमा स्वराज ने इस बार लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला लिया था। उनके स्वास्थ्य के चलते ये फैसला लिया गया था, वो कितनी तकलीफ में हैं उन्होंने ये कभी किसी को जाहिर होने नहीं दिया।

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16. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 2019 में होने वाले आम चुनाव में न लड़ने का ऐलान कर भले ही अपने प्रशंसकों को निराश कर दिया था, लेकिन उनके पति इस फैसले से बेहद खुश थे। सुषमा के पति स्वराज कौशल ने पत्नी के फैसले के बाद ट्वीट कर कहा था –अब और चुनाव नहीं लड़ने के आपके फैसले के लिए धन्यवाद।

सुषमा स्वराज निश्चित रूप से सभी के लिए प्रेरणा हैं और आने वाले सभी मंत्रियों के लिए उदाहरण स्थापित कर रही हैं।