प्रकृति के साथ बिताया गया थोड़ा समय कैसे बदल सकता है आपकी जिंदगी

जब भी पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा होती है तो आम लोगों को ऐसा लगता है, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा दूरगामी योजनाएं बनाकर इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर ऐसे में किसी एक व्यक्ति के प्रयास से क्या हासिल होगा? यहीं पर हमें अपना नजरिया बदलना होगा क्योंकि बेहतरी की दिशा में पहला कदम उठाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। फिर उन छोटे-छोटे कदमों से ही आप मीलों लंबे सफर पर निकल पड़ते हैं और आपको खुद भी अंदाज़ा नहीं होता कि आप इतनी जल्दी मंजि़ल के करीब कैसे पहुंच गए? अपनी सेहत और खुशहाली के लिए भी यह बहुत जरूरी है कि थोड़ा वक्त प्रकृति के साथ बिताएं।
रहेंगे फिट
अधिकतर लोग फिटनेस के लिए जिम में जाकर बहुत पैसे खर्च करते हैं, पर कई उससे उन्हें कोई विशेष लाभ भी नहीं होता। हाल ही में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध से यह तथ्य सामने आया है कि बागवानी बहुत अच्छी एक्सरसाइज़ है। प्रतिदिन एक घंटे तक पौधों की देखभाल संबंधी कार्यों से लगभग 300 कैलरी बर्न होती है, यह जिम में 40 मिनट तक वर्कआउट करने के बराबर है। अगर बागवानी करना इतना फायदेमंद है तो आज ही से जुट जाएं इस कार्य में। अगर आपके घर में थोड़ी सी भी जगह है तो वहां अपनी सुविधा के अनुसार कुछ पौधे ज़रूर लगाकर नियमित रूप से उनकी देखभाल करें। जब गार्डनिंग के प्रति आपके मन में लगाव होगा तो प्लांट्स की देखभाल के लिए रोज़ाना सुबह बहुत जल्दी आपकी नींद खुल जाएगी। इससे आपकी दिनचर्या व्यवस्थित होगी। इससे आप हमेशा खुश और ऐक्टिव रहेंगे।
मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी
प्रकृति के साथ समय बिताना केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आजकल डिप्रेशन के मरीज़ों को डॉक्टर बागवानी करने की सलाह देते हैं और इसके का$फी सकारात्मक परिणाम नज़र आते हैं। इस संदर्भ में मानस ग्लोबल फाउंडेशन की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता शर्मा कहती हैं, 'प्रकृति के साथ वक्त बिताने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है, सुंदर दृश्य, ठंडी हवाएं, खुला आसमान और पक्षियों के मधुर कलरव सुनकर व्यक्ति तनाव पैदा करने वाली बातों को भूल जाता है। इस दृष्टि से गार्डनिंग और पेड़-पौधों के बीच टहलना किसी उपचार की तरह फायदेमंद होता है। जब व्यक्ति पेड़-पौधों की देखभाल कर रहा होता है तो उस दौरान होने वाली शारीरिक गतिविधियों से उसके ब्रेन में हैप्पीनेस हार्मोन डोपामाइन का सीक्रेशन तेज़ी से होता और वह बहुत अच्छा महसूस करता है। आज की व्यस्त दिनचर्या के कारण अधिकतर लोग तनावग्रस्त रहते हैं। ऐसी समस्या को दूर करने के लिए पेड़-पौधों के साथ थोड़ा वक्त बिताना बहुत फायदेमंद साबित होता है और सभी को इसके लिए थोड़ा समय ज़रूर निकालना चाहिए।

बहुत कुछ सीखते हैं बच्चे
अगर आप अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं तो शुरू से ही उन्हें प्रकृति के साथ उनकी दोस्ती कराएं। उन्हें अपने अपने साथ वॉक पर ले जाएं और पेड़-पौधों के नाम और उनके गुणों के बारे में बताएं। इस संदर्भ में बाल मनोवैज्ञानिक गगनदीप कौर कहती हैं, 'बागवानी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो बच्चों को जि़म्मेदार, धैर्यवान और संवेदनशील बनाती है। अगर आपके बच्चे की उम्र पांच साल से अधिक है तो गार्डनिंग संबंधी कार्यों के दौरान उसे भी अपने साथ रखें, छोटे-छोटे कार्यों में उससे मदद लें। गर्मी की छुट्टियों में आप उसे आसानी उगने वाले फूलों के बीज दें और एक छोटा सा गमला देकर उससे खुद प्लांट तैयार करने को कहें। जब वह प्रतिदिन पौधे की देखभाल करेगा तो वह उसमें धैर्य और जि़म्मेदारी की भावना विकसित होगी। कई बार शुरुआती दौर में कुछ पौधे सूख जाते हैं, ऐसे स्थिति में अगर आपका बच्चा उदास हो जाए तो उसे समझाएं कि कोई बात नहीं, कभी-कभी ऐसा होता है। हम दोबारा कोशिश करते हैं। इससे आपका बच्चा अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बार-बार कोशिश करेगा। इस छोटे से उदाहरण से वह समझ जाएगा कि किसी भी कार्य में हमेशा सफलता नहीं मिलती, लेकिन हमें अपनी कोशिश ज़ारी रखनी चाहिए। इस तरह बागवानी से उसमें आशावादी दृष्टिकोण विकसित होगा।

प्रकृति के साथ रहें स्वस्थ
आज के तनाव भरे जीवन में अगर आप दिमा$गी सुकून चाहते हैं, तो कुछ पल प्रकृति के साथ ज़रूर बिताएं। आजकल महानगरों के अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों के पास इतनी जगह नहीं होती कि वे अपनी इच्छा के अनुकूल पेड़-पौध लगा सकें। शहरी आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जो रोज़गार के अच्छे अवसरों की तलाश में छोटे शहरों या गांव को छोड़कर यहां आया है। बड़े अपार्टमेंट्स में सारी सुविधाएं होने के बावज़ूद वे अपने खुले घर-आंगन और खेत-खलिहान की कमी अकसर महसूस करते हैं। पहले उन्हें सब्जि़यां और मौसमी फल ख़्ारीदने की ज़रूरत नहीं होती थी, जब भी इच्छा होती वे अपने बगीचे तोड़कर ले आते थे। प्रकृति से दूर होना व्यक्ति के मन को उदास कर देता है। इसी वजह से आजकल महानगरों में रहने वाले लोग शहर से दूर किराये पर खुली ज़मीन लेकर ग्रुप फार्मिंग कर रहे हैं। दिल्ली के आइटी प्रोफेशनल अंकित शर्मा कहते हैं, 'एक बार मेरे बेटे ने मुझसे पूछा कि पापा क्या गुड़ भी आलू की तरह ज़मीन के भीतर उगता है, उसके इस सवाल पर पहले तो मुझे हंसी आई, लेकिन पल भर के बाद यह सोचकर चिंतित हो गया कि हमारा बचपन तो पेड़ों-पौधों के बीच खेलते-कूदते हुए बीता है,
जब भी मर्जी हो तो हम आम-अमरूद तोड़ कर खा लेते थे, क्या हमारे बच्चे इन छोटी-छोटी खुशियों से वंचित रह जाएंगे? आखिर उन्हें प्रकृति को करीब से देखने और समझने का मौका कैसे मिलेगा? ऐसे सवालों से मेरा मन विचलित होने लगा, तब मैंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर फार्मिंग के लिए किराये पर ज़मीन का प्रबंध किया, जो हमारे घर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर है, वहां की देखभाल के लिए दो ऐसे लोग रहते हैं, जिन्हें खेती अच्छी समझ है। हर संडे को हमलोग सपरिवार वहां जाकर अपने पेड़-पौधों की देखभाल करते हैं। बच्चे अपने हाथों से ताज़ी सब्जि़यां तोड़कर बहुत खुश होते हैं। छुट्टी वाले दिन हमारे घर पर पिकनिक जैसा माहौल रहता है। बच्चों को भी अब प्रकृति से इतना लगाव हो गया है कि वे पहले की तरह शॉपिंग मॉल जाने की जि़द नहीं करते, बल्कि उन्हें हमारे साथ बागवानी करना ज्य़ादा अच्छा लगता है।
अब तो आपको भी य कीन हो गया होगा कि अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से आप न केवल पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बना सकते हैं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्वयं भी हमेशा प्रसन्न और सक्रिय रहेंगे।
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निभाएं अपनी जिम्मेदारी
- दैनिक जीवन में की जाने वाली छोटी-छोटी कोशिशें भी पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने में मददगार हो सकती हैं। इसके लिए आप इन बातों का ध्यान रखें :
- जहां तक संभव हो प्लास्टिक के उपयोग से बचें और अपने घर में गीले और सूखे कचरे के लिए अलग डस्टबिन रखें।
- करीबी लोगों को जन्मदिन जैसे खास अवसरों पर फूलों के बुके देने के बजाय उन्हें किसी सुंदर पौधे का उपहार दें।
- अगर घर में थोड़ी भी जगह है तो वहां तुलसी, बेसिल, पॉर्सले, धनिया, पुदीना, गिलोय, एलोवेरा और करी पत्ता जैसे उपयोगी हब्र्स ज़रूर लगाएं क्योंकि इनमें कई औषधीय गुण मौज़ूद होते हैं।
- आसपास अगर कोई खुली जगह हो तो बारिश के मौसम में वहां नीम, पीपल, गुलमोहर और बरगद के पौधे रोप दें। इससे जहां एक ओर राहगीरों को छांव मिलेगी, वहीं वे सभी पेड़ वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।
अगर प्रकृति के साथ रहने पर इतने सारे फायदे मिलते हैं तो फिर देर किस बात की, पौधे लगाएं और खुशियां बांटें। यह जानकारी अगर आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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