केरल का मशहूर नृत्य Kathakali में पहले केवल पुरुष ही लेते थे हिस्सा, जानें कब और कैसे हुई महिलाओं की एंट्री

History Of Kathakali: भारत अपनी कला और संस्कृतियों के लिए काफी मशहूर है। यहां हर राज्यों में कई अनोखे डांस फॉर्म है, जो बेहद दिलचस्प हैं। इनमें भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, बीहू, गरबा, भांगड़ा आदि शामिल हैं, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं- कथकली नृत्य की।
कथकली दो शब्दों कथा और कली से मिलकर बना है। इसमें कथा का मतलब कहानी और कली का अर्थ प्ले है। इसका मतलब स्पष्ट है कि इस नृत्य में डांस करने के साथ-साथ फेस के एक्सप्रेशन पर भी काम किया जाता है। यह केरल का लोक नृत्य है और इसे बेहद कठिन माना जाता है। इस कला में माहिर होने के लिए आपको सालों लग सकते हैं।
कथकली में न सिर्फ डांस किया जाता है, बल्कि इसका कॉस्टयूम और मेकअप भी बिल्कुल अलग होता है। कथकली से एक रोचक बात यह भी है कि इसे पहले सिर्फ पुरुष कलाकार हा पेश करते थे। बाद में, इस नृत्य में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। तो चलिए आज हम आपको कथकली और इसके इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताते हैं।
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कथकली नृत्य का इतिहास

कथकली नृत्य की उत्पत्ति करीब 300 साल पहले केरल में हुई थी। संगीत, नृत्य, भक्ति, नाटक, श्रृंगार और वेशभूषा के साथ अतीत की महान कहानियों को जोड़ते हुए इस डांस को परफोर्म किया जाता है। इस नृत्य में चेहरे के इशारों और भावों का इस्तेमाल किया जाता है। अब आप सोचेंगे कि भला इस नृत्य में इतने मेकअप की क्या जरूरत है? तो हम आपको बता दें कि कथकली में हर रंग का अपना अलग महत्व है। इसके तहत हरा रंग रोमांस, लाल रंग गुस्सा, काला रंग तमस और सफेद रंग सात्विकता को परिभाषित करता है। इसमें पहनी जाने वाली पोशाक का वजन भी 12 किलो का होता था। पहले इसके लिए सिर्फ पुरुष कलाकार ही होते थे।
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कथकली में कैसे हुई महिलाओं की एंट्री
कथकली हमेशा पर पुरुष ही इसे प्रस्तुत करते थे, लेकिन 1970 के बाद से स्थिति में कुछ बदलाव आया और आज इस नृत्य में महिलाएं भी हिस्सा लेने लगी हैं। कथकली आमतौर पर रामायण और महाभारत के ऊपर एक्ट किया जाता है। इस नृत्य के जरिए हर चीज को भाव से कम्युनिकेट किया जाता है। इसमें न सिर्फ चेहरे की एक्सप्रेशन होती है, बल्कि चेहरा, हाथ, पांव और मूवमेंट्स सभी इस नृत्य को खास बनाने में मदद करते हैं। इस डांस को हर कोई नहीं कर सकता है। इसके लिए एक स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है। आप कथकली को नृत्य न कहकर एक विकसित भाषा भी मान सकते हैं।
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Image credit- Herzindagi
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