Sat Sep 12, 2026 | Updated 03:26 AM IST

केरल का मशहूर नृत्य Kathakali में पहले केवल पुरुष ही लेते थे हिस्सा, जानें कब और कैसे हुई महिलाओं की एंट्री

कथकली केरल का प्रसिद्ध डांस फॉर्म है, जिसमें पहले सिर्फ पुरुष ही भाग लेते थे। जानिए महिलाएं इस नृत्य में कब से भाग ले रही हैं।
Updated:- 2024-07-26, 17:15 IST
image

History Of Kathakali: भारत अपनी कला और संस्कृतियों के लिए काफी मशहूर है। यहां हर राज्यों में कई अनोखे डांस फॉर्म है, जो बेहद दिलचस्प हैं। इनमें भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, बीहू, गरबा, भांगड़ा आदि शामिल हैं, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं- कथकली नृत्य की।

कथकली दो शब्दों कथा और कली से मिलकर बना है। इसमें कथा का मतलब कहानी और कली का अर्थ प्ले है। इसका मतलब स्पष्ट है कि इस नृत्य में डांस करने के साथ-साथ फेस के एक्सप्रेशन पर भी काम किया जाता है। यह केरल का लोक नृत्य है और इसे बेहद कठिन माना जाता है। इस कला में माहिर होने के लिए आपको सालों लग सकते हैं।

कथकली में न सिर्फ डांस किया जाता है, बल्कि इसका कॉस्टयूम और मेकअप भी बिल्कुल अलग होता है। कथकली से एक रोचक बात यह भी है कि इसे पहले सिर्फ पुरुष कलाकार हा पेश करते थे। बाद में, इस नृत्य में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। तो चलिए आज हम आपको कथकली और इसके इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताते हैं।

इसे भी पढ़ें- जट-जटिन से लेकर डोमकच तक, बिहार की आन-बान और शान हैं ये नृत्य

कथकली नृत्य का इतिहास

kerala famous kathakali dance history

कथकली नृत्य की उत्पत्ति करीब 300 साल पहले केरल में हुई थी। संगीत, नृत्य, भक्ति, नाटक, श्रृंगार और वेशभूषा के साथ अतीत की महान कहानियों को जोड़ते हुए इस डांस को परफोर्म किया जाता है। इस नृत्य में चेहरे के इशारों और भावों का इस्तेमाल किया जाता है। अब आप सोचेंगे कि भला इस नृत्य में इतने मेकअप की क्या जरूरत है? तो हम आपको बता दें कि कथकली में हर रंग का अपना अलग महत्व है। इसके तहत हरा रंग रोमांस, लाल रंग गुस्सा, काला रंग तमस और सफेद रंग सात्विकता को परिभाषित करता है। इसमें पहनी जाने वाली पोशाक का वजन भी 12 किलो का होता था। पहले इसके लिए सिर्फ पुरुष कलाकार ही होते थे।

इसे भी पढ़ें- प्रसिद्ध भारतीय नृत्य कुचिपुड़ी के बारे में कितना जानते हैं आप?

कथकली में कैसे हुई महिलाओं की एंट्री

kathakali dance history

कथकली हमेशा पर पुरुष ही इसे प्रस्तुत करते थे, लेकिन 1970 के बाद से स्थिति में कुछ बदलाव आया और आज इस नृत्य में महिलाएं भी हिस्सा लेने लगी हैं। कथकली आमतौर पर रामायण और महाभारत के ऊपर एक्ट किया जाता है। इस नृत्य के जरिए हर चीज को भाव से कम्युनिकेट किया जाता है। इसमें न सिर्फ चेहरे की एक्सप्रेशन होती है, बल्कि चेहरा, हाथ, पांव और मूवमेंट्स सभी इस नृत्य को खास बनाने में मदद करते हैं। इस डांस को हर कोई नहीं कर सकता है। इसके लिए एक स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है। आप कथकली को नृत्य न कहकर एक विकसित भाषा भी मान सकते हैं।

इसे भी पढ़ेंआइए जानते हैं प्रसिद्ध भारतीय नृत्य कथकली के इतिहास के बारे में

 

इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय भी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही,अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हर जिन्दगी के साथ

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है! हमारे इस रीडर सर्वे को भरने के लिए थोड़ा समय जरूर निकालें। इससे हमें आपकी प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यहां क्लिक करें

Image credit- Herzindagi

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।