Sat Sep 12, 2026 | Updated 08:08 PM IST

हरतालिका तीज में रातभर जागने की परंपरा क्यों है? जानें धार्मिक मान्यता

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना और पूरी रात भजन करती हैं। इस व्रत में रातभर जागने की परंपरा है। नीचे लेख में पढ़ें क्यों?
Updated:- 2026-09-12, 19:21 IST
why women stay awake night hartalika teej fast

Hartalika Teej 2026 Niyam: हरतालिका तीज हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत का महत्वपूर्ण नियम रातभर जागना है। हरतालिका तीज में रातभर जागने के पीछे की पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यताएं हैं। इतना ही नहीं अगर कोई महिला रात के समय सो जाती हैं, तो व्रत टूट जाता है। चलिए नीचे लेख में वाराणसी के पंडित राघवेंद्र तिवारी से जानें इसके पीछे का कारण और परंपरा।

माता पार्वती की कठोर तपस्या का प्रतीक

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने जंगल में बिना अन्न और जल ग्रहण किए वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्या की। भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाया और पूरी रात बिना सोए ध्यान एवं साधना में लीन रहीं। माता पार्वती के इसी समर्पण और अटूट साधना को याद करते हुए महिलाएं रातभर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं।

Hartalika Teej Vrat Niyam

Image Credit- AI

अखंड ज्योति की रक्षा का नियम

हरतालिका तीज की पूजा शाम (प्रदोष काल) के समय शुरू होती है और रातभर चलती है। पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर अखंड दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि यह दीपक पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। इस ज्योति की देखरेख करने और इसे प्रज्वलित रखने के लिए महिलाएं रातभर जागकर पूजा-अर्चना करती हैं।

इसे भी पढ़ें- हरियाली तीज और हरतालिका तीज एक नहीं, जानें दोनों में क्या है अंतर?

रात्रि के चार प्रहर की विशेष पूजा

हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की चारों प्रहर की पूजा का विधान है। हर प्रहर में शिव-पार्वती को जल, बेलपत्र, फूल, और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। इस प्रहर पूजा के चलते रात में सोने का नियम नहीं होता।

  • प्रथम प्रहर- संध्या समय (प्रदोष काल)
  • द्वितीय प्रहर- मध्य रात्रि
  • तृतीय प्रहर-देर रात (तड़के)
  • चतुर्थ प्रहर-सूर्योदय से ठीक पहले

रात में न सोने को लेकर धार्मिक मान्यता क्या है?

लोक मान्यताओं और व्रत कथाओं में ऐसा माना जाता है कि जो महिला हरतालिका तीज के व्रत के दौरान रात में सो जाती है, उसे अगले जन्म में अजगर या कोई अन्य जीव बनने का दोष लगता है। यद्यापि ये लोककथाएं हैं, लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य व्रती महिला का ध्यान केवल भगवान की भक्ति में लगाए रखना और आलस्य से बचाना है।

Hartalika Teej fast

Image Credit- AI

हरतालिका तीज पर जागरण कैसे किया जाता है?

रातभर महिलाएं एक स्थान पर एकत्र होकर शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनती हैं, ढोलक-मंजीरे के साथ भजन-कीर्तन करती हैं और लोकगीत गाती हैं। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद अंतिम पूजा की जाती है, जिसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है

इसे भी पढ़ें- हरतालिका तीज में मिट्टी से शिव-पार्वती बनाने की परंपरा क्यों? जानें महत्व और पौराणिक कथा

अगर आप भी हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं, तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। यहां हमने पंडित राघवेंद्र तिवारी के द्वारा बताई गई जानकारी को साझा किया है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। साथ ही बॉलीवुड, सेलेब्स और टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- Ai (main)


Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।