सिर्फ एक मुलाकात में ही क्यों निचोड़ लेते हैं कुछ लोग आपकी एनर्जी? जानिए साइकोलॉजी

आपने देखा होगा कि कई बार किसी एक इंसान से सिर्फ 5 या 10 मिनट की बातचीत के बाद ही मन भारी होने लगता है, दिमाग काम करना बंद कर देता है और थकान महसूस होने लगती है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान कोई बहस, झगड़ा या तनाव भी नहीं हुआ होता है, फिर भी ऐसा महसूस होता है। अक्सर लोग इस स्थिति को नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, मनोविज्ञान बताता है कि बातचीत केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं है। दिमाग सामने वाले के चेहरे के भाव, आवाज का लहजा और अनदेखी उम्मीदों को समझने में लगातार मेहनत करता है, जिससे मानसिक थकान होती है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस मनोवैज्ञानिक स्थिति के बारे में सबकुछ...
भावनात्मक जुड़ाव है जिम्मेदार
जब हम किसी व्यक्ति से बात करते हैं, तो हमारा दिमाग केवल उसके शब्दों को नहीं सुनता, बल्कि उसकी भावनाओं को भी महसूस करता है।
- इमोशनल कॉन्टैजियन- मनोविज्ञान में इस स्थिति को भावनात्मक संक्रमण कहते हैं। इसमें हम जाने-अनजाने सामने वाले की नकारात्मकता या उदासी को सोख लेते हैं।
- मिरर इफेक्ट- हमारा दिमाग दूसरों की भावनाओं को कॉपी करता है। अगर सामने वाला लगातार परेशान या निराश है, तो हमारा दिमाग भी उसी तनाव को महसूस करने लगता है।

बातचीत में क्यों महसूस होती है मानसिक थकान?
एक्सपर्ट के मुकाबिक, बातचीत एक दोतरफा प्रक्रिया है, लेकिन जब संतुलन बिगड़ता है, तो दिमाग की ऊर्जा खत्म होने लगती है। ऐसे में जब एक ही इंसान अपनी समस्याएं, शिकायतें सुनाता रहता है और आपको सिर्फ सुनने की भूमिका में रखता है तब ऐसा होता है। इससे अलग सामने वाले की बातों और नकारात्मकता को लगातार सहने में दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे मानसिक थकान होती है।
यह भी पढ़ें- क्या आपका मन भी रहता है अशांत? खुद से प्यार करना सीखें और पाएं मानसिक शांति
क्या ऐसा करने वाला हर इंसान 'टॉक्सिक' होता है?
सोशल मीडिया के इस दौर में लोग अक्सर दूसरों को तुरंत 'टॉक्सिक' करार दे देते हैं, लेकिन ऐसा करना हमेशा सही नहीं होता।कोई व्यक्ति किसी बड़े संकट, काम के दबाव या ब्रेकअप से गुजर रहा हो सकता है। ऐसे समय में उसे भावनात्मक सहारे की ज्यादा जरूरत होती है। साथ ही, अगर कोई कभी-कभी अपनी परेशानी शेयर करता है, तो वह सामान्य है। बता दें कि समस्या तब होती है जब हर बातचीत में सिर्फ नकारात्मकता ही मिले।

मेंटल एनर्जी बचाने के उपाय
अपनी मानसिक सेहत का ध्यान रखना स्वार्थ नहीं, बल्कि बेहद जरूरी जरूरत है। इसके लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं-
- अगर किसी व्यक्ति से बात करके हमेशा आपकी एनर्जी खत्म होती है, तो उनसे मिलने का समय सीमित करें।
- यह सुनिश्चित करें कि रिश्तों में बातचीत दोतरफा हो, जहां आपकी बात भी सुनी जाए।
- हर किसी की समस्या को हल करने की जिम्मेदारी खुद पर न लें।
जीवन में रिश्तों का संतुलन होना बेहद जरूरी है। कठिन समय में दूसरों की मदद करना और उनकी बात सुनना इंसानियत है, लेकिन अगर यह आपकी अपनी मानसिक शांति और ऊर्जा को पूरी तरह से खत्म करने लगे, तो संभल जाना ही समझदारी है।
यह भी पढ़ें- भगवान शिव की ये 3 सुबह की आदतें अपनाएं, बिखरा मन होगा शांत और मिलेगा सुकून
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: magnific
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।