घर बना रहता है जंग का मैदान? बच्चों की लड़ाई को प्यार में बदलने के 5 जादुई तरीके

एक ही घर में रहने वाले दो बच्चों के बीच प्यार और तकरार का होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह तकरार हर वक्त की चीख-पुकार और जंग में बदल जाए, तो माता-पिता के लिए घर की शांति बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, माता-पिता के लिए उनके बच्चे एक समान होते हैं। भाई-बहनों के बीच इस लडाई को 'सिबलिंग राइवलरी' कहा जाता है। ऐसे में यह झगड़े क्यों होते हैं और इन्हें प्यार में बदलने के जादुई तरीके क्या हैं, इसके बारे में पता होना जरूरी है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आखिर बच्चे आपस में क्यों लड़ते हैं और कैसे इन बच्चों के साथ डील की जा सकती है। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
आखिर बच्चे आपस में क्यों लड़ते हैं?
- खिलौने, रिमोट या माता-पिता के टाइम को लेकर होने वाली छीना-झपटी झगड़े का कारण बनती है।
- जब पेरेंट्स अनजाने में एक बच्चे की तुलना दूसरे की काबिलियत से करते हैं, तो बच्चों में एक-दूसरे के प्रति जलन पैदा होती है।
बता दें कि हर बच्चे का स्वभाव बेहद ही अलग होता है। एक शांत हो सकता है तो दूसरा शरारती, जिससे तालमेल बिठाना थोड़ी सा मुश्किल हो जाता है।
झगड़ों को कैसे संभालें और प्यार कैसे बढ़ाएं?
कभी तुलना न करें - हर बच्चा अपने आप में खास होता है। कभी भी यह न कहें कि देखो तुम्हारा भाई कितना अच्छा पढ़ता है या अपनी बहन जैसी अक्ल लेकर आओ। ऐसी बातें बच्चों के मन में एक-दूसरे के लिए नफरत भर देती हैं। उनकी पर्सनल खूबियों की तारीफ करें।
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पक्षपात करने से बचें - झगड़ा होने पर सीधे जज न बनें। अगर आप हमेशा छोटे बच्चे का पक्ष लेंगे या बड़े को डांटेंगे, तो उनके बीच की कड़वाहट बढ़ेगी। उन्हें खुद अपनी समस्या सुलझाने का मौका दें। बस यह देखें कि कोई शारीरिक चोट न पहुंचाए।
टीम वर्क को बढ़ावा दें - बच्चों को ऐसे काम सौंपें, जिनमें उन्हें एक-दूसरे की मदद करनी पड़े। जैसे- तुम दोनों मिलकर खिलौने समेटो, फिर हम आइसक्रीम खाएंगे। जब वे साथ मिलकर कोई लक्ष्य हासिल करेंगे, तो उनमें एकता और टीम भावना जागेगी।
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