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जोधपुर का 'धींगा गवर' मेला: जहां रात में लाठी लेकर निकलती हैं महिलाएं, जानें परंपरा

राजस्थान के जोधपुर में एक अनोखा मेला हर साल लगता है। हम बात कर रहे हैं धींगा गवर मेले की। जानिए क्यों इस मेले में महिलाएं रात के अंधेरे में पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं।
Updated:- 2026-08-19, 01:28 IST
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भारत अपनी अनूठी संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। खासकर जब बात राजस्थान की हो, तो मारवाड़ की धरती का नाम सबसे पहले आता है। यह जगह ऐतिहासिक किस्सों और अनोखे त्योहारों से भरी हुई है। इन्हीं में से एक बेहद अनोखा उत्सव है, जो हर साल जोधपुर में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जोधपुर का प्रसिद्ध धींगा गवर मेला बाकी आम मेलों से बिल्कुल अलग है। यह मेला वैशाख के महीने में लगता है। इसमें खासकर सूरज ढलने के बाद का नजारा देखने लायक होता है। इस मेले में महिलाएं अलग-अलग तरह के रूप (स्वांग) बनाकर और हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर निकलती हैं। अगर आप भी इसके बारे में जानना चाहती हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें।

1. क्या है धींगा गवर परंपरा और इसका इतिहास?

राजस्थानी बोली में 'धींगा' शब्द का मतलब होता है जबरदस्ती या अपनी मर्जी चलाना, जबकि 'गवर' का संबंध माता पार्वती से है। इस उत्सव की शुरुआत जोधपुर के पूर्व महाराजा आरी सिंह के राज से मानी जाती है। कहा जाता है कि मेवाड़ की एक रानी ने जोधपुर आने के बाद इस त्योहार की शुरुआत की थी। इस परंपरा का खास मकसद महिलाओं को एक दिन के लिए पूरी आजादी देना और समाज की पाबंदियों से दूर रखना था।

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(image credit: instagram/jodhpur_the_blue_heaven)

2. मेले में रात होते ही बदल जाता है शहर का माहौल

राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, धींगा गवर पूजा की शुरुआत गणगौर के ठीक बाद होती है और यह मेला करीब 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं व्रत भी रखती हैं। व्रत के आखिरी दिन आधी रात के बाद जोधपुर के पुराने शहर की गलियां महिलाओं से भर जाती हैं। औरतें और लड़कियां तरह-तरह के रूप बनाकर और हाथों में डंडे लेकर सड़कों पर निकलती हैं। उस समय पूरे शहर में सिर्फ महिलाओं की ही चलती है।

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3. पुरुषों पर लाठी बरसाने का अनोखा शगुन

इस मेले की सबसे खास बात यह है कि रात में अगर कोई पुरुष महिलाओं के सामने आता है, तो महिलाएं मिलकर उस पर लाठियां चलाती हैं। इतना ही नहीं, ऐसा माना जाता है कि धींगा गवर की रात अगर किसी कुंवारे लड़के पर कोई महिला लाठी मार देती है, तो उसकी शादी जल्दी तय हो जाती है। यही वजह है कि शहर के नौजवान इस मेले में खुशी-खुशी महिलाओं से लाठी खाने आते हैं। 

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(image credit: instagram/jodhpur_the_blue_heaven)

4. अलग-अलग रूपों और वेशभूषा का प्रदर्शन

इस मेले में महिलाएं सिर्फ पारंपरिक राजस्थानी कपड़े ही नहीं पहनतीं, बल्कि पुलिस अफसर, डाकू, राजा, यमराज और साधु-संतों जैसे अलग-अलग रूप बनाकर पहुंचती हैं। पूरे शहर में जगह-जगह गवर माता की मूर्तियां रखी जाती हैं। इन मूर्तियों के पास महिलाएं देर रात तक नाचती-गाती भी हैं। 

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जोधपुर का धींगा गवर मेला सिर्फ एक पूजा या त्योहार नहीं है, बल्कि यह मारवाड़ी संस्कृति और आपस के प्यार को दिखाता है। रात के अंधेरे में हाथ में लाठी लेकर निकलती महिलाओं की यह परंपरा उनकी निडरता और उत्साह को दर्शाती है। अगर आप भी राजस्थान के लोक-जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखना चाहती हैं, तो जोधपुर के इस अनोखे मेले को देखने जरूर जाएं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।   

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